शिक्षण, शोध और विश्वविद्यालय प्रशासन का लंबा अनुभव
विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर दे चुके हैं सेवाएं
CNE REPORTER, नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। विश्वविद्यालय के आचार्य प्रो. रीतेश साह को विश्वविद्यालय का कुलसचिव नियुक्त किया गया है। शिक्षण, शोध, प्रशासन और संस्थागत विकास के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रो. रीतेश साह इतिहास विषय में पीएच.डी. के साथ ही मानव संसाधन प्रबंधन में एम.बी.ए. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। वे समकालीन इतिहास, पर्यावरणीय इतिहास तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के इतिहास जैसे विषयों में लंबे समय से शोध कार्य कर रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय से मिल चुके हैं दो राष्ट्रीय सम्मान
प्रो. साह को उनके कार्यों के लिए रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से दो राष्ट्रीय स्तर के सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद तथा उत्तराखंड सरकार के सहयोग से संचालित पांच प्रमुख शोध परियोजनाओं का सफल नेतृत्व किया है।
शोध एवं अकादमिक गतिविधियों के साथ-साथ उन्होंने विश्वविद्यालय में शिक्षक प्रशिक्षण और अकादमिक गुणवत्ता को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे कुमाऊं विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन–शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन में संभाल चुके हैं कई अहम जिम्मेदारियां
प्रो. रीतेश साह का विश्वविद्यालय प्रशासन से भी लंबे समय से जुड़ाव रहा है। उन्होंने कुमाऊं विश्वविद्यालय में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए प्रशासनिक अनुभव हासिल किया है।
वे विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के अपर निदेशक, क्यू.ई.यू.ई.एस.टी. पत्रिका के संपादक, छात्र कल्याण के सहायक अधिष्ठाता, मिशन कर्मयोगी के नोडल अधिकारी, छात्र क्लब के अध्यक्ष तथा विश्वविद्यालय प्रकाशनों के मुख्य संपादक के रूप में जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने परीक्षा उपनियंत्रक, प्रॉक्टर तथा विश्वविद्यालय केंद्रीय मूल्यांकन के अधीक्षक जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व भी संभाले हैं।
पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता में भी सक्रिय
प्रो. साह की गतिविधियां विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रही हैं। वे जिला पौधारोपण समिति, जिला वनाग्नि समिति तथा उत्तराखंड वन विभाग की तकनीकी वानिकी समिति से भी जुड़े रहे हैं। इन दायित्वों के माध्यम से उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन तथा सामुदायिक सहभागिता से जुड़े कार्यों में योगदान दिया है।
छह पुस्तकों और 50 से अधिक शोध-पत्रों का लेखन
शैक्षणिक एवं शोध क्षेत्र में भी प्रो. साह का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने अब तक छह पुस्तकों, एक मोनोग्राफ तथा 50 से अधिक शोध-पत्रों का लेखन किया है। उनके शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित हुए हैं, जिनमें स्प्रिंगर नेचर भी शामिल है।
उन्होंने उत्तराखंड सरकार तथा कुमाऊं विश्वविद्यालय के लिए विभिन्न सचित्र अकादमिक प्रकाशनों के संपादन का कार्य भी किया है।
11 शोधार्थियों को पीएच.डी. के लिए किया मार्गदर्शन
प्रो. साह ने शोध के क्षेत्र में विद्यार्थियों का भी मार्गदर्शन किया है। अब तक वे 11 शोधार्थियों को पीएच.डी. के लिए मार्गदर्शन प्रदान कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त वे देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों में आमंत्रित व्याख्यान भी दे चुके हैं।
उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं अकादमिक कार्यों के बेहतर समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कुलसचिव के पद पर होती है। ऐसे में उनके प्रशासनिक अनुभव और अकादमिक पृष्ठभूमि को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शिक्षकों और अधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
प्रो. रीतेश साह के कुलसचिव पद पर नियुक्त होने पर कुमाऊं विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
प्रो. संजय पंत, प्रो. ललित तिवारी, प्रो. दिव्या यू. जोशी, प्रो. गीता तिवारी, प्रो. महेंद्र राणा, डॉ. गगनदीप होठी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. जिबू साबू, डॉ. नंदन सिंह, डॉ. मनोज बिष्ट, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. मोहित रौतेला, डॉ. दीपक मेलकानी, डॉ. पूरन अधिकारी, सहायक कुलसचिव राकेश विश्वकर्मा, बृजमोहन फ़र्सवन, नंदाबल्लभ पालिवाल, मोहित सनवाल, भूपाल करायत और विपिन कुमार सहित अनेक शिक्षकों एवं अधिकारियों ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।









