शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और NTA भंग करने की मांग
शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़। नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन की गूंज अब सीमांत जनपद पिथौरागढ़ तक पहुंच गई है। सोमवार को स्थानीय गांधी चौक में छात्र-युवाओं, अभिभावकों और विभिन्न सामाजिक एवं राजनीतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर आंदोलन के समर्थन में सभा आयोजित की। सभा में केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को भंग करने की मांग की गई। वक्ताओं ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और जनभावनाओं के अनुरूप आमूलचूल परिवर्तन किए जाने की भी मांग रखी।

सभा को संबोधित करते हुए भाकपा (माले) के नेता गोविंद कफलिया ने आरोप लगाया कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाएं अब एक संगठित उद्योग का रूप ले चुकी हैं। उनका कहना था कि इसका लाभ सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों को मिल रहा है, जबकि मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था, विदेश नीति, औद्योगिक नीति और कृषि व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है। कफलिया ने सरकार पर भ्रष्टाचार और लूट-खसोट के आरोप लगाते हुए उत्तराखंड सरकार पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने विपक्षी दलों और प्रगतिशील शक्तियों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और देश को विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
सोनम वांगचुक के साथ कार्रवाई को बताया अलोकतांत्रिक
जनमंच के संयोजक भगवान रावत ने अपने संबोधन में वैज्ञानिक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. सोनम वांगचुक के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें अनशन स्थल से हटाया जाना लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन और अमानवीय कदम है।
रावत ने कहा कि उत्तराखंड सहित पूरे देश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद बड़ी संख्या में युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है या उनके अभिभावकों की।
‘शिक्षित युवा बेरोजगार, नीति निर्धारक अशिक्षित’
आम आदमी पार्टी के नेता चंद्रप्रकाश पुनेड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों की प्राथमिकताओं में शिक्षा और युवाओं का भविष्य शामिल नहीं दिखाई देता। उन्होंने आरोप लगाया कि नीति निर्धारण के विभिन्न स्तरों पर ऐसे लोग बैठे हैं जिन्हें शिक्षा के महत्व का पर्याप्त ज्ञान नहीं है, जबकि उच्च शिक्षित युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षित बेरोजगार युवाओं और अशिक्षित नीति निर्धारकों के बीच असंतोष की खाई लगातार बढ़ रही है और यही स्थिति व्यापक जनआंदोलन का कारण बन रही है।
देश को जवाबदेह और पारदर्शी सरकार की जरूरत: कैप्टन महादेव भट्ट
सेवानिवृत्त कैप्टन महादेव भट्ट ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और जवाबदेह शासन व्यवस्था स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों में आम नागरिक अनेक कठिनाइयों का सामना कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई है।
उन्होंने डॉ. सोनम वांगचुक के साथ हुई कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन करने वालों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने पारदर्शी और जवाबदेह शासन व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया।
युवाओं ने आंदोलन को तेज करने का किया ऐलान
सभा में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और बेरोजगार अभ्यर्थी मौजूद रहे। प्रतिभागियों ने केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की तथा जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।
युवाओं ने कहा कि यदि आंदोलन आगे बढ़ता है तो पिथौरागढ़ के युवा भी इसे मजबूत बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।सभा में जनमंच के संयोजक भगवान रावत, एडवोकेट आलोक चौधरी, कॉमरेड दिनेश जोशी सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, छात्र, युवा और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।



