अल्मोड़ा, 27 अगस्त। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की अल्मोड़ा इकाई ने मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनजागरण के अभियान के तहत यहां कार्यक्रम आयोजित कर अपनी मांगें उठाई और नारेबाजी की। साथ ही जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन प्रेषित किया हैं। कार्यक्रम के जरिये आम जनता से संविधान तथा धर्म निरपेक्षता की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार केवल संघ का एजेंडा लागू कर संविधान तथा देश की धर्म निरपेशाला के साथ खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि एक के बाद एक संवैधानिक संस्थाओं पर हमला किया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण समाजसेवी एड. प्रशान्त भूषण पर चलाई जा रही अवमानना की कार्यवाही है। उन्होंने कहा कि कोविड—19 की आड़ में सरकार मनमानी पर उतर आई है। सरकार अमेरिका परस्त नीतियों को अपनाकर पड़ोसी राष्ट्रों से सम्बन्ध तनावपूर्ण बना कर युद्ध की स्थिति पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि लाकडाउन के बाद करोड़ों लोग नौकरी से हाथ धो चुके हैं। आर्थिक मंदी के कारण आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। लेकिन यह सब नियंत्रण करने में मोदी सरकार पूर्णतः विफल हो चुकी है। अब सरकार की जनविरोधी नीतियों, साम्प्रदायिक नीतियों के खिलाफ संघर्ष ही विकल्प है। इसके बाद 16 सूत्रीय मांग पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया। जिसमें आयकर के दायरे से बाहर के परिवारों का प्रतिमाह 7500 रूपये लगातार छह महीने तक देने, 10 किलो प्रति व्यक्ति अनाज अगले छह महीने तक देने, शहरी इलाकों में बेरोजगार हुए लोगों के लिए नया नियम बनाकर उन्हें काम देने, मजदूर हितों की सुरक्षा करने, सरकारी कंपनियों और उद्यमों का निजीकरण बंद करने समेत कोरोना से मारे गए लोगों, दलितों, आदिवासियों, ओबीसी और विकलांगों, उच्च शिक्षा, अल्पसंख्यों आदि से जुड़ी 16 सूत्रीय मांगें शामिल हैं। ज्ञापन देने वालों में आरपी जोशी, यूसूफ तिवारी, सुनीता पाण्डे, अरुण जोशी, प्रमोद रावत, मुमताज अहमद, शाहनवाज अंसारी आदि उपस्थित थे।
अल्मोड़ा : संविधान की रक्षा को आगे आने का आह्वान, राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
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