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प्रेरणादायी: दुर्गम राह से पैदल चलकर तड़म गांव पहुंचे अल्मोड़ा के डीएम अंशुल​ सिंह

✸ वन्य जीव हमले में मारे गए महिपाल के पीड़ित परिवार को बंधाया ढांढस
✸ विकास की हकीकत जांची, ग्रामीणों के दुखड़े सुने, ईई का जवाब तलब

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने गुरूवार को यह संदेश दे डाला कि जिला प्रशासन महज आफिस की कुर्सी तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर गांवों तक भी पहुंचता है। दरअसल, गुरूवार को डीएम जिले के दूरस्थ ब्लाक के गांव तड़म में दुर्गम मार्ग से पैदल चलकर पहुंच गए, जहां उन्होंने वन्य जीव के हमले में जान गंवा चुके स्व. महिपाल सिंह के परिवार से मिलकर उनका दु:ख साझा किया और गांव में विकास की स्थिति जांचते हुए ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। डीएम के साथ कई अधिकारी भी गांव पहुंचे, लेकिन लोनिवि के ईई के नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने स्पष्टीकरण लेने के निर्देश दिए।

दूरस्थ विकासखंड सल्ट की ग्रामसभा बोरड़ा के तोक तड़म में बीते दिनों मानव-वन्यजीव संघर्ष में ग्रामीण महिपाल सिंह की मौत के बाद डीएम अंशुल सिंह ने आज खुद गांव पहुंचे। जिलाधिकारी मुख्य सड़क से दुर्गम पैदल मार्ग से होते हुए गांव पहुंचे और यह साबित कर दिया कि प्रशासन महज कार्यालय तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसे दूर गांवों की भी सुध है। सर्वप्रथम जिलाधिकारी ने स्व. महिपाल सिंह के परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। परिवार की महिलाओं और बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना तथा पूरा भरोसा दिलाया कि परिवार को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन पीड़ित परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ खड़ा है तथा हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पीड़ित परिवार की आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को देखते हुए डीएम ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए परिवार की एक बेटी को अस्थाई रूप से तहसील कार्यालय सल्ट में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में तैनात करने के निर्देश एसडीएम को दिए। वहीं दूसरी बेटी को शिक्षक स्वयंसेवक के रूप में अस्थाई नियोजन देने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया।

इसके बाद उन्होंने गांव में चौपाल लगाकर ग्रामीणों के साथ विकास व गांव की समस्याओं पर चर्चा की और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। ग्रामीणों ने वन्यजीवों के बढ़ते खतरे, आवागमन की कठिनाइयों, पेयजल संकट तथा मूलभूत सुविधाओं की कमी से उन्हें अवगत कराया। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए। इस मौके पर लोक निर्माण विभाग रानीखेत के अधिशाषी अभियंता के अनुपस्थित रहने पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने पूरे ग्राम क्षेत्र में चेन लिंक फेंसिंग करने के निर्देश दिए ताकि ग्रामीणों को जंगली जानवरों के खतरे से सुरक्षा मिल सके। साथ ही तड़म से भोनखाल तक मार्ग के सुधारीकरण एवं मार्ग पर सोलर लाइट लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा प्रशासन की प्राथमिकता है।

जिलाधिकारी ने वन विभाग को क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इसके अतिरिक्त ग्रामीणों के लिए गधेरे से गांव तक पेयजल लाइन बिछाने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए, जिससे ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कुमेंरिया से बोरड तक सड़क निर्माण कार्य में भी शीघ्र कार्यवाही का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का पैदल गांव पहुंचने, उनकी समस्याओं को समझने और संवेदनशीलता के साथ समाधान का भरोसा देने पर उनका आभार व्यक्त किया। ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार उन्हें महसूस हुआ कि प्रशासन उनकी पीड़ा को वास्तव में समझ रहा है और उनके साथ खड़ा है। इस मौके पर प्रभागीय वनाधिकारी दीपक सिंह, उपजिलाधिकारी सल्ट रिंकू बिष्ट, अपर पुलिस अधीक्षक हरबंश सिंह, तहसीलदार आबिद अली सहित अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीण उपस्थित रहे।

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