HomeUttarakhandBageshwarबागेश्वर: बाबा बागनाथ की नगरी से जुड़ी हैं खंडूरी की कई यादें

बागेश्वर: बाबा बागनाथ की नगरी से जुड़ी हैं खंडूरी की कई यादें

✸ सीएम रहते कई बार जिले का दौरा किया और विकास योजनाओं को नई दिशा दी

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दीपक पाठक, बागेश्वर: पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी सेना से राजनीति में आए। प्रशासनिक अनुशासन, साफ छवि तथा विकासवादी सोच से अलग पहचान बनाई। प्रदेश के मुख्यमंत्रित्वकाल में उनका बागेश्वर से भी अच्छा नाता रहा। मुख्यमंत्री रहते कई बार जिले के दौरों से यहां से उनकी कई यादें जुड़ी हैं। उन्होंने जिले की विकास योजनाओं को नई दिशा दी।

नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन सुबोध लाल साह ने बताया कि खंडूरी प्रोटोकाल को लेकर बेहद सख्त थे। उन्हें मंच पर अनावश्यक भीड़ बिल्कुल पसंद नहीं थी। कार्यक्रमों में सीमित लोगों की मौजूदगी और अनुशासित व्यवस्था पर वह विशेष ध्यान देते थे। अधिकारियों से भी समयबद्ध तथा व्यवस्थित कार्यशैली की अपेक्षा रखते थे। खंडूरी का जिले से विशेष आत्मीय लगाव था तथा विकास योजनाओं को लेकर वह हमेशा गंभीर रहते थे। उनका मानना था कि पर्वतीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का मजबूत होना जरूरी है। ये प्रमुख कार्य सदैव दिलाते रहेंगे उनकी याद:—
पार्किंग निर्माण को दिए थे एक करोड़

वर्ष 2008 में मुख्यमंत्री रहते हुए खंडूरी ने नगर में पार्किंग निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे। इसके अलावा नगर के लिए सीवर लाइन योजना की घोषणा भी की थी। सरयू घाट सुंदरीकरण योजना की शुरुआत भी उसी दौर की महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल रही, जिसका लाभ आज नगरवासियों को मिल रहा है।
उत्तरायणी मेले का किया था शुभारंभ

2009 में प्रसिद्ध उत्तरायणी मेले का शुभारंभ भी किया था। इस दौरान उन्होंने स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं तथा धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, मेले की व्यवस्थाओं और विकास कार्यों को लेकर वह काफी सजग रहते थे।
पर्यटन विकास पर दिया था बल

मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2008 में खंडूरी कौसानी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पर्यटन सुविधाओं, सड़क संपर्क तथा स्थानीय व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए उन्होंने कौसानी को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विकसित करने की बात कही थी। भारत का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले कौसानी की प्राकृतिक सुंदरता से वह काफी प्रभावित रहते थे।
तमाम ग्रामीणों से सीधे किया था संवाद

2009 में उन्होंने सड़क, पेयजल और ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों को गुणवत्ता से समझौता न करने के निर्देश दिए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, वह फाइलों से ज्यादा जमीनी स्थिति देखने पर भरोसा करते थे। मुख्यमंत्री रहते कपकोट क्षेत्र तथा दूरस्थ गांवों का भी दौरा किया था। ग्रामीण सड़क, स्वास्थ्य तथा पेयजल योजनाओं का निरीक्षण कर उन्होंने अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी। ग्रामीण बताते हैं कि वह सीधे लोगों से संवाद करते और समस्याओं को मौके पर सुनते थे।
बागनाथ मंदिर के दर्शन भी किए

मुख्यमंत्री रहते यहां प्रवास के दौरान उन्होंने सरयू-गोमती संगम स्थित प्रसिद्ध बागनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की थी। मेजर जनरल के रूप में भारतीय सेना में लंबी सेवा देने वाले खंडूरी राजनीति में भी अनुशासनप्रिय नेता के रूप में पहचाने गए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त रुख और पारदर्शी प्रशासन उनकी पहचान बना।

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