HomeUttarakhandAlmoraटीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का हल्ला बोल, सरकार को दी हुंकार

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का हल्ला बोल, सरकार को दी हुंकार

✿ अल्मोड़ा-बागेश्वर में सड़कों पर उतरे सैकड़ों शिक्षक, सरकार को अल्टीमेटम, डीएम व सीईओ को सौंपे ज्ञापन

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सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा/बागेश्वर: टीईटी अनिवार्यता समेत 13 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलित जूनियर हाईस्कूल शिक्षकों में सोमवार को जबर्दस्त उबाल देखा गया। अल्मोड़ा और बागेश्वर जिला मुख्यालयों पर सैकड़ों की तादाद में शिक्षकों ने सड़कों पर उतर कर रैली निकाली और हुंकार भरते हुए सरकार को चेताया। अल्मोड़ा में गांधी पार्क, तो बागेश्वर में नुमाइशखेत में शिक्षकों का हुजूम उमड़ा। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी तथा मुख्य शिक्षाधिकारी को ज्ञापन सौंपे। (आगे पढ़ें)

प्रदर्शन के दौरान शिक्षक नेताओं ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद उत्तराखंड के लगभग 15 हजार से 30 हजार सेवारत शिक्षकों के सामने नौकरी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि आदेश के अनुसार 55 वर्ष तक की आयु के प्रारंभिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है तथा इसके लिए केवल दो वर्ष का समय निर्धारित किया गया है। ऐसा न करने पर शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति का सामना करना पड़ सकता है। शिक्षकों ने इसे अव्यावहारिक बताते हुए कहा कि प्रभावित अधिकांश शिक्षक 40 से 55 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं, जिन पर पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियों का भारी दबाव है। इस उम्र में बच्चों की पढ़ाई, विवाह और अन्य जिम्मेदारियों के बीच दोबारा परीक्षा देने की बाध्यता मानसिक और व्यवहारिक रूप से बेहद कठिन है। (आगे पढ़ें)

ज्ञापन में शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए। शिक्षक नेताओं का कहना है कि वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर शिक्षकों को चार वर्ष की छूट देने के बावजूद शिक्षा विभाग ने समय रहते कोई ठोस दिशा-निर्देश जारी नहीं किए। पिछले आठ वर्षों की विभागीय निष्क्रियता का खामियाजा अब उम्रदराज शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। संघ की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी अनुभवी शिक्षकों, जिनके पास बीटीसी, सीपीएड और बीएड जैसी आवश्यक शैक्षिक योग्यताएं हैं, उन्हें टीईटी की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त रखा जाए। उन्होंने कहा कि सेवा के अंतिम पड़ाव में नौकरी जाने का भय उन्हें मानसिक तनाव और अवसाद की ओर धकेल रहा है। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने समय रहते सहानुभूतिपूर्वक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन पूरे उत्तराखंड में और व्यापक तथा उग्र रूप ले सकता है। (आगे पढ़ें)

रैली में अल्मोड़ा में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संगठन के जिलाध्यक्ष पंकज पांडे, मंत्री पुष्कर सिंह कुंवर, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, वरिष्ठ संयुक्त मंत्री कैलाश चंद्र जोशी, कोषाध्यक्ष अमित कुमार शर्मा समेत विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक बड़ी संख्या में जुटे। वहीं नुमाइशखेत मैदान बागेश्वर में संगठन के जिला अध्यक्ष रमेश सिंह रावत, जिला महासचिव भुवन चंद्र भट्ट, कोषाध्यक्ष आनंद मोहन जोशी, संरक्षक जगदीश चंद्र गुरुरानी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीमती दमवंती देव, संयुक्त मंत्री राम चंद्र जोशी और मीडिया प्रभारी संतोष सिंह दफौटी समते सैकड़ों शिक्षक शामिल हुए।

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