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लॉकडाउन के मायने बेमानी साबित हो रहे

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देहरादून। एक ओर देश कोरोना से जूझ रहा है पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया हैं। देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम जनमानस इस संकट की घड़ी में आम आदमी को सोशल डिस्टेंसिंग रखने और घरो से कम से कम निकलने का आग्रह कर रहे हैं ऐसे में कुछ लोगों ने इसे मजाक बना लिया है। पुलिस भी मूक दर्शक बनी हुयी है। कहने को तो रोज पुलिस कार्रवाई कर रही है लेकिन जिस तरह से हर रोज सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या बड़ रही है ऐसे में लॉकडाउन का मायने बेमानी साबित हो रहे हैं।

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बात राजधानी देहरादून की हो या पहाड के छोटे छोटे शहरों की यहां हर रोज लॉकडाउन तोड़ने की खबरे सामने आ रही है। राजधानी का तो हाल ये है कि सुबह जहां सात बजे नहीं कि पिकनिक मनाने वालों रैला सड़क पर उतर जाता है। हर कोई घर का सामान खरीदने जा रहा होता है। खरीददारी भी क्या होती ये सुनिय, कोई एक गड्डी धनिया तो कोई एक पाव प्याज या आलू खरीदने जा रहा होता है। हालात ऐसे हैं कि दुपहिया वाहनों पर दो लोग धड़ल्ले से चल रहे हैं और वो भी पुलिस के सामने से लेकिन कोई पूछने वाला नहीं है। यहां तक कि सुबह सात से एक बजे तक कोई भी रोकने वाला नहीं है।

लोकडाउन में दी जाने वाली यह छूट अब लोगों के लिए घूमने फिरने का जरिया बन गयी है। छूट के नाम पर राजधानी के एक कोने से दूसरे कोने तक कहीं भी चले जाओ कोई पूछने वाला नही है। इस दौरान ऐसा लगता ही नहीं है कि देश लाकडाउन के दौर से गुजर रहा हैं। कही किसी के चेहरे पर इस बीमारी का खौफ नहीं दिखता है। ऐसे में पुलिस भी मूक दर्शक बनी रहती है। हालांकि पुलिस के आला अधिकारी लगातार इस बात का दावा कर रहे हैं कि सब कुछ कंट्रोल में है लेकिन यकीन मानिए ऐसा कुछ नहीं है। कुछ भी पुलिस के कंट्रोल में नहीं है। दो पहिया और चार पहिया वाहनों को लगातार चलना और लाकडाउन में छूट के नाम पर हो रही अनदेखी आने वाले समय में सभी को भारी पड़ सकती है।

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