परीक्षा तिथि बदलने की उठी मांग
एक ही तिथि पर दो राज्यों की परीक्षाएं बनी फांस
सीएनई रिपोर्टर, गरुड़। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित प्रवक्ता मुख्य परीक्षा की तिथियों ने प्रशिक्षित बेरोजगारों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। परीक्षा कैलेंडर जारी होने के बाद से ही प्रदेश के युवाओं में गहरा आक्रोश व्याप्त है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि परीक्षाओं का टकराव उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जिसके चलते उन्होंने आयोग और प्रदेश सरकार से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।


प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन के केंद्रीय संयोजक हिमांशु उपाध्याय और सुरेश जोशी ने बताया कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने प्रवक्ता मुख्य परीक्षा के लिए 9 और 10 मई की तिथियां निर्धारित की हैं। विडंबना यह है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग की प्रवक्ता परीक्षा भी इन्हीं तिथियों को प्रस्तावित है। इस टकराव के कारण उन हजारों युवाओं के सामने संकट खड़ा हो गया है, जिन्होंने दोनों राज्यों में आवेदन किया है।
समान अवसर के अधिकार का हनन
संगठन के पदाधिकारी जगमोहन सिंह गुसाई और अनुराधा ने संयुक्त रूप से कहा कि दोनों राज्यों की परीक्षाएं एक ही दिन होने से अभ्यर्थियों के ‘समान अवसर के अधिकार’ का सीधा हनन हो रहा है। युवाओं का कहना है कि वे लंबे समय से इन परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें किसी एक परीक्षा को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो उनके करियर के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
भौगोलिक दूरी और समय की चुनौती
अभ्यर्थियों ने अपनी व्यावहारिक समस्याओं को साझा करते हुए कहा कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के परीक्षा केंद्रों के बीच की भौगोलिक दूरी बहुत अधिक है। विषम परिस्थितियों और सीमित समय के कारण किसी भी अभ्यर्थी के लिए 24 घंटे के भीतर दोनों राज्यों में परीक्षा देना शारीरिक और मानसिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे में परीक्षा तिथियों में फेरबदल ही एकमात्र समाधान नजर आता है।
आयोग और सरकार से शीघ्र समाधान की अपील
प्रशिक्षित बेरोजगारों ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि समय रहते परीक्षा तिथियों में परिवर्तन नहीं किया गया, तो प्रदेश का युवा आंदोलन के लिए मजबूर होगा। अभ्यर्थियों की मांग है कि उत्तराखंड लोक सेवा आयोग सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए नई तिथियां घोषित करे, ताकि किसी भी बेरोजगार का हक न मारा जाए।


