HomeUttarakhandBageshwarबागेश्वर: त्वरित न्याय के लिए सजेगी 'राष्ट्रीय लोक अदालत'

बागेश्वर: त्वरित न्याय के लिए सजेगी ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’

वर्षों पुराने विवादों का होगा चंद मिनटों में निपटारा

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर : अगर आप भी कचहरी के चक्करों, लंबे समय से लंबित मुकदमों या बैंक रिकवरी के नोटिसों से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बागेश्वर द्वारा आगामी दिनों में भव्य ‘राष्ट्रीय लोक अदालत’ का आयोजन किया जाएगा।

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इस लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य “सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित न्याय” प्रदान करना है, जिसमें जिला न्यायालय से लेकर बाह्य न्यायालयों तक के मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया जाएगा।

किन मामलों का होगा समाधान?

लोक अदालत में न केवल अदालतों में लंबित (Pending) मामले, बल्कि कोर्ट पहुंचने से पहले के विवाद (Pre-litigation) भी सुलझाए जाएंगे। मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों पर फोकस रहेगा:

  • वित्तीय मामले: चेक बाउंस (धारा 138 एनआई एक्ट), बैंक धन वसूली, बिजली और पानी के बिल।
  • पारिवारिक एवं दीवानी विवाद: वैवाहिक विवाद, किरायेदारी, भूमि अधिग्रहण और राजस्व संबंधी मामले।
  • आपराधिक एवं अन्य: शमनीय (Compoundable) फौजदारी वाद, मोटर दुर्घटना मुआवजा (MACT), श्रम विवाद और उपभोक्ता फोरम के मामले।

तैयारियों के लिए हुई अहम बैठक

लोक अदालत के सफल संचालन हेतु जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पंकज तोमर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में न्यायिक अधिकारियों, बार संघ के अधिवक्ताओं और विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।

अध्यक्ष पंकज तोमर ने अधिवक्ताओं से अपील की कि वे अपने मुवक्किलों को लोक अदालत के लाभों के बारे में बताएं और अधिक से अधिक वादों को समझौते के आधार पर निस्तारित कराने में सहयोग करें। उन्होंने बैंक प्रबंधकों को सख्त निर्देश दिए कि वे धन वसूली से जुड़े ‘प्री-लिटिगेशन’ मामलों में लचीला रुख अपनाएं ताकि आम जनता को कर्ज के बोझ से राहत मिल सके।

क्यों चुनें लोक अदालत?

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव अनीता कुमारी ने लोक अदालत के फायदों पर प्रकाश डालते हुए बताया:

  1. समय और धन की बचत: यहां वर्षों तक चलने वाली लंबी प्रक्रिया से मुक्ति मिलती है।
  2. कोर्ट फीस की वापसी: यदि लंबित मामले का निस्तारण लोक अदालत में होता है, तो नियमानुसार जमा की गई कोर्ट फीस वापस मिल सकती है।
  3. अंतिम फैसला: इसके फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे विवाद हमेशा के लिए खत्म हो जाता है।
  4. आपसी सौहार्द: चूंकि फैसला आपसी सहमति से होता है, इसलिए दोनों पक्षों की जीत होती है और कटुता समाप्त होती है।

अपील: यदि आपका कोई मामला न्यायालय में लंबित है या बैंक आदि से कोई विवाद है, तो तुरंत अपने अधिवक्ता या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय से संपर्क कर अपना मामला लोक अदालत में लगवाएं और सुलभ न्याय का लाभ उठाएं।

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