संविधान शिल्पी बाबा साहेब की जयंती की धूम
सीएनई रिपोर्टर, रानीखेत : भारत रत्न और भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती सोमवार को रानीखेत में बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक शिरकत की। बाबा साहेब के जयकारों से पूरा नगर गुंजायमान रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ नगर में निकाली गई एक विशाल शोभायात्रा से हुआ। सैकड़ों समर्थकों और अनुयायियों ने ‘जय भीम’ के नारों के साथ मुख्य मार्गों से होते हुए भ्रमण किया। इसके पश्चात सभी लोग अंबेडकर पार्क में एकत्रित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत संगठन के पदाधिकारियों द्वारा बाबा साहेब की प्रतिमा के सम्मुख दीप प्रज्वलित कर और पुष्प अर्पित कर की गई।

मुख्य अतिथियों का संबोधन
इस गरिमामयी आयोजन में नगर पालिका अध्यक्ष (चिलियानौला) अरुण रावत और व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
- अरुण रावत ने बाबा साहेब को नमन करते हुए क्षेत्रवासियों को जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बाबा साहेब के जीवन संघर्षों और उनके प्रेरणादायी विचारों को साझा करते हुए कहा कि उनके आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
- वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मे बाबा साहेब ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कभी हार नहीं मानी। वे एक महान विद्वान, समाज सुधारक और कानूनविद थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समानता और न्याय के लिए समर्पित कर दिया।
सांस्कृतिक प्रस्तुति और बच्चों का उत्साह
कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने बाबा साहेब के नैतिक मूल्यों और उनके जीवन संघर्षों पर आधारित नाटकीय संवाद पेश किए। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से बच्चों ने उनके ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ के संदेश को जीवंत कर दिया।
“बाबा साहेब का सपना एक ऐसे भारत का था जहाँ जाति-पाति का भेद न हो और हर नागरिक को प्रगति के समान अवसर मिलें।” — कार्यक्रम में वक्ता
इस अवसर पर संगठन के अध्यक्ष गुसाईं राम आर्या, दिनेश टम्टा, इंद्र लाल, रमेश पाल, आनंद राम, चंद्र प्रकाश, अनिल टम्टा और वीरेंद्र पवार सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


