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कृषि की आधुनिक तकनीकों के प्रसार से थमेगा पहाड़ से पलायन: डा. मांगी लाल

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👉 अल्मोड़ा के हवालबाग में विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का भव्य 52वां कृषि विज्ञान मेला

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा: विवेकानन्द पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा के प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र, हवालबाग में आज शनिवार को काफी चहल पहल रही, जहां संस्थान का 52वां कृषि विज्ञान मेला भव्यता से आयोजित हुआ। यह मेला ‘खेती में नवीनता–पोषण में श्रेष्‍ठता’ की थीम पर आधारित था। इसके जरिये पर्वतीय कृषि की आधुनिक तकनीकों और शोध परिणामों को सीधे किसानों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

मेले की गतिविधियों का औपचारिक शुभारंभ सुबह 10 बजे से हुआ और किसानों को प्रयोगात्मक प्रक्षेत्र का भ्रमण कराकर उन्नत फसलों व नवीन कृषि तकनीकों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। बाद में मुख्य अतिथि कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग, भारत सरकार के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के महानिदेशक डा. मांगी लाल जाट के पहुंचने पर उनका स्वागत हुआ और पौधारोपण कार्यक्रम किया गया। उन्होंने विधिवत मेले का शुभारंभ किया और मेले में लगे स्टालों का भ्रमण किया। तत्पश्चात कार्यक्रम का शुभारम्भ ‘वंदे मातरम्’ गीत के साथ हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. मांगी लाल जाट ने संस्थान के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास और नई प्रजातियों के विकास की उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों को बधाई दी। उन्होंने विशेष रूप से ‘वी.एल. त्रिपोषी’ और ‘सुपोषिता’ जैसी बायोफोर्टिफाइड मक्का किस्मों को पोषण सुरक्षा की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया। उनके अनुसार, उर्वरकों की बचत करने वाले बैक्टीरिया और आधुनिक यंत्रों का विकास ‘कम लागत, अधिक उत्पादन’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होगा। उन्‍होंने उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के प्रति सचेत किया और उर्वरकों के सीमित उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों के किसानों की मेले में भागीदारी को ‘लैब टू लैंड’ कार्यक्रम की एक बड़ी सफलता करार दिया। डॉ. जाट ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए कृषि की आधुनिक तकनीकों का प्रसार बेहद जरूरी है।

इससे पहले संस्थान के निदेशक डॉ. लक्ष्‍मीकान्‍त ने सभी अतिथियों और कृषकों का अभिनंदन करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और पर्वतीय किसानों के कल्याण के लिए हो रहे प्रयासों का विवरण प्रस्तुत किया।उन्होंने बताया कि संस्थान अब तक 200 से अधिक उन्नत प्रजातियां विकसित कर चुका है जिसमें उनके द्वारा विशेष रूप से बायोफोर्टिफाइड मक्का की किस्मों ‘वी.एल. त्रिपोषी’ और ‘वी.एल. सुपोषिता’ की सफलता का उल्लेख किया जो पोषण सुरक्षा की दृष्टि से मील का पत्थर हैं। डॉ. लक्ष्मीकांत ने मशरूम उत्पादन और मौनपालन के माध्यम से किसानों की आय कई गुना बढ़ाने के सफल उदाहरण दिए। उन्होंने गर्व के साथ बताया कि इस मेले में चीन सीमा से सटे सुदूर गांवों के किसानों सहित कुल 1129 कृषकों ने पंजीकरण कराया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) डॉ. राजबीर सिंह ने पर्वतीय कृषि के विकास में विस्तार शिक्षा और तकनीकी हस्तांतरण की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से नई प्रजातियों को सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक पहुँचाना संस्थान की एक बड़ी उपलब्धि है। इस मौके पर कई किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की और संस्थान की तकनीकों के लाभ बताए। समारोह में प्रगतिशील किसान मंजू देवी, सरदार सिंह, चन्‍दन सिंह, संतोष कुमार, चम्‍पा देवी, लाल सिंह कठायत, हेमा देवी, खीम सिंह, श्‍याम सिंह, शारदा देवी एवं शालिनी देवी को पुरस्कृत किया गया।मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों ने संस्थान की प्रजातियों वीएल त्रिपोषी, वीएल सुपोषिता, वीएल मधुरिमा, वीएल मडुवा 410 का लोकार्पण किया। इसके अतिरिक्त संस्थान के प्रकाशनों पर्वतीय कृषि दर्पण, पर्वतीय क्षेत्रों की महत्वपूर्ण फसलों की उन्नत किस्मों हेतु प्रबंधन कृषि पद्धतियां, उत्तराखंड की पारंपरिक फसल भट (काली सोयाबीन) के मूल्य वर्धित उत्पाद एवं पर्वतीय क्षेत्रों में दलहनी मटर की वैज्ञानिक खेती का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण ‘शताब्दी महिला छात्रावास’ का शिलान्यास रहा।

किसान मेले में लगभग 40 प्रदर्शनियां लगायी गयी। मेले में आयोजित कृषक गोष्ठी में पर्वतीय कृषि से सम्बन्धित विविध पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी। कृषि विज्ञान मेले में कृषक गोष्ठी का संचालन डॉ. कामिनी बिष्‍ट, वरिष्‍ठ वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम का संचालन डा. अनुराधा भारतीय तथा निधि सिंह ने किया जबकि डा. निर्मल कुमार हेडाऊ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) और डॉ. राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार) शामिल रहे। इनके अतिरिक्‍त डॉ. यशपाल सिंह मलिक, संयुक्त निदेशक, मुक्तेश्वर परिसर, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, मुक्तेश्वर एवं डॉ. अमित पांडे, निदेशक, शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान, भीमताल ने मेले में हिस्सा लिया।

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