Crime Story/कलयुगी श्रवण की करतूत : लखनऊ में वर्धमान पैथोलॉजी लैब के मालिक मानवेंद्र सिंह की उनके 21 साल के इकलौते बेटे अक्षत प्रताप सिंह ने गोली मारकर की हत्या।…..दिल दहला देने वाली खबर… ऐसी खबर, जो इंसानियत को शर्मसार कर दे, रिश्तों को लहूलुहान कर दे और पूरे समाज को झकझोर कर रख दे। कलियुग अपने चरम पर है… जहाँ कोख से जन्मा बेटा ही अपने जन्मदाता का हत्यारा बन बैठा।

पिता की हत्या, फिर लाश के टुकड़े-टुकड़े… रूह कांप उठेगी
20 फरवरी की सुबह…लखनऊ का पॉश इलाका ‘आशियाना’
घर के अंदर गोलियों की गूंज…
और उसी पल एक पिता की सांसें थम गईं।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत की सारी हदें तोड़ दीं।
बेटे ने पिता के शव को बाथरूम में ले जाकर आरी से काटा।
टुकड़ों को नीले ड्रम में भर दिया।
सिर अलग कर कार में रखा और 21 किलोमीटर दूर फेंक आया।
बाकी हिस्सों को जलाने की साजिश रची — तारपिन का तेल, रूम स्प्रे, दुर्गंध मिटाने की तैयारी…

CNE REPORTER, लखनऊ। इसे कलयुग का चरम कहें या संस्कारों की बलि, नवाबों के शहर लखनऊ के आशियाना इलाके से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जिस पिता ने अपनी पत्नी की मौत के बाद नौ सालों तक मां बनकर बेटे को पाला, उसी बेटे ने पिता के सीने में पीतल उतार दिया। इतना ही नहीं, क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए बेटे ने पिता के जिस्म को आरी से काटकर टुकड़ों में बांट दिया।
मौत का वो खौफनाक मंजर : तारीख 20 फरवरी, सुबह के साढ़े चार बजे थे। जब पूरी दुनिया चैन की नींद सो रही थी, सेक्टर-L के एक घर में रिश्तों का गला घोंटा जा रहा था। बीकॉम के छात्र अक्षत प्रताप सिंह ने अपनी पिता की ही लाइसेंसी राइफल उठाई और सो रहे पिता के सिर में गोली दाग दी। पिता, जो उसे डॉक्टर (MBBS) बनाना चाहते थे, उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा मौत का सौदागर बन चुका है।

आरी से किए टुकड़े, बहन को बनाया बंधक
हत्या के बाद अक्षत के भीतर का इंसान मर चुका था। उसने बाजार से आरी खरीदी और अपने पिता के शव को बाथरूम में ले जाकर कसाई की तरह काट दिया। 11वीं में पढ़ने वाली छोटी बहन चीखी, तो हत्यारे भाई ने उसकी गर्दन पर हाथ रख दिया— “चुप रह, वरना तेरा भी यही हाल करूँगा।” तीन दिन तक वह मासूम बच्ची अपने ही पिता की कटी हुई लाश के साथ उसी घर में कैद रही।
गुमराह करने की नाकाम कोशिश : शातिर दिमाग अक्षत ने दुर्गंध छिपाने के लिए रूम स्प्रे छिड़का और अवशेषों को जलाने के लिए तारपिन का तेल लाया। तीन दिन बाद खुद ही थाने जाकर ‘गुमशुदगी’ की रिपोर्ट लिखवाई। लेकिन कहते हैं कि अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, पाप का घड़ा भरता ही है। पुलिस की पूछताछ में अक्षत के चेहरे का डर उसकी सच्चाई बयां कर गया। कड़ाई हुई तो टूट गया और उगल दिया वो सच, जिसे सुनकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
तीन दिन तक लाश छिपी रही, बेटा करता रहा नाटक
तीन दिन तक घर में पिता की लाश के टुकड़े पड़े रहे…
और बेटा बाहर दुनिया के सामने बेगुनाही का नाटक करता रहा।
तीन दिन बाद थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखवाई।
लेकिन हाव-भाव, आंखों की घबराहट, चेहरे की बेचैनी —
पुलिस को शक हो गया।
सख्ती हुई…
तो बेटा टूट गया…
और सच उगल दिया।
वजह: डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता
इस खून के पीछे की वजह और भी डरावनी है।
पिता चाहते थे बेटा NEET क्वालिफाई कर डॉक्टर बने।
बेटा चाहता था लॉन या होटल का बिज़नेस।
बस इसी बात पर बहस हुई…
और उसी बहस ने बाप-बेटे के रिश्ते को खून में डुबो दिया।

🕯️ टूट गया एक पूरा परिवार
मानवेंद्र सिंह मूल रूप से जालौन जिले के रहने वाले थे। उनके पिता सुरेंद्र पाल सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस से रिटायर्ड हैं। कई साल पहले मानवेंद्र आशियाना सेक्टर-L में मकान बनवाकर रहने लगे थे। मानवेंद्र सिंह की पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। उन्होंने अकेले अपने दोनों बच्चों को पाल-पोसकर बड़ा किया।
जिस बेटे के भविष्य के लिए उन्होंने अपने सपने कुर्बान किए —
उसी बेटे ने उनका ही भविष्य छीन लिया… उनकी ज़िंदगी छीन ली।
पड़ोसियों का दर्द: “मानवेंद्र भाई साहब पूरे मोहल्ले को जोड़कर चलते थे। रामलीला में उनका बेटा अक्षत ‘मेघनाद’ का रोल करता था, पर असल जिंदगी में वह ‘कंस’ से भी बदतर निकलेगा, ये किसी ने नहीं सोचा था।”
आज एक पिता की अस्थियां नहीं, बल्कि टुकड़ों में बंटा शरीर मिला है। सिर अब भी लापता है। एक तरफ पिता का प्रेम था जो बेटे को समाज में ऊंचा मुकाम देना चाहता था, और दूसरी तरफ एक ऐसा अहंकार जिसने सब कुछ राख कर दिया। लखनऊ की ये गलियां आज खामोश हैं, और हर ज़ुबान पर एक ही लानत है— “धिक्कार है ऐसे कपूत पर!”

