
तिहरे हत्याकांड के दोषी को दोबारा फांसी!
अदालत का बड़ा फैसला
टिहरी गढ़वाल | सीएनई रिपोर्टर: टिहरी नरपिशाच फिर चढ़ेगा सूली पर – उत्तराखंड के न्यायिक इतिहास के सबसे नृशंस और रूह कंपा देने वाले ‘टिहरी तिहरे हत्याकांड’ में इंसाफ की एक और बड़ी मुहर लग गई है। अपनी सगी गर्भवती भाभी का गला रेतने वाले और मां-भाई को मौत के घाट उतारने वाले कसाई देवर संजय सिंह को अदालत ने एक बार फिर मृत्युदंड (Hanging to Death) की सजा सुनाई है।
मानसिक बीमारी का ढोंग कर फांसी की फंदे से बचने की आरोपी की आखिरी कोशिश भी नाकाम रही। हाईकोर्ट के निर्देश पर हुए मेडिकल परीक्षण में वह पूरी तरह ‘फिट’ पाया गया, जिसके बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने उसे समाज के लिए कलंक मानते हुए फांसी और 10 हजार रुपये अर्थदंड का फैसला सुनाया।
वह खूनी मंजर: 3 पॉइंट्स में वारदात की क्रूरता
- गर्भवती भाभी का सिर धड़ से अलग: 13 दिसंबर 2014 की वह सुबह कोई नहीं भूल सकता। आरोपी ने पहले तलवार की धार तेज की और जंगल में बकरी चरा रही अपनी गर्भवती भाभी कांता देवी का सिर धड़ से अलग कर दिया। कोख में पल रहे मासूम के साथ यह पहली नृशंस हत्या थी।
- घात लगाकर भाई का कत्ल: खून के प्यासे संजय ने गांव लौटकर झाड़ियों में ‘एंबुश’ लगाया। जैसे ही भाई सुरेंद्र सिंह वहां से गुजरा, संजय ने पीछे से वार कर उसे संभलने का मौका तक नहीं दिया। भाई की मौके पर ही मौत हो गई।
- मां को भी नहीं बख्शा: चीख-पुकार सुनकर दौड़ती हुई आई मां मीना देवी को भी रास्ते में ही मौत की नींद सुला दिया। इस नरसंहार के सदमे ने आरोपी के पिता को भी बाद में लील लिया।
पुलिस को छोड़ने पड़े थे आंसू गैस के गोले
हत्याकांड के बाद आरोपी घर में बंदूक और खून से सनी तलवार लेकर किसी खूंखार शिकारी की तरह दुबक गया था। उसे पकड़ने के लिए पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी और अंततः आंसू गैस के गोले दागकर ही उसे काबू किया जा सका।
कानूनी दांव-पेच और अंतिम प्रहार
- 24 अगस्त 2021: निचली अदालत ने पहली बार फांसी सुनाई।
- 10 मई 2022: हाईकोर्ट ने मानसिक जांच के लिए मामला वापस भेजा।
- ताजा फैसला: मेडिकल रिपोर्ट ने आरोपी को स्वस्थ बताया और अदालत ने दोबारा फांसी की सजा मुकर्रर की।
अदालत का संदेश स्पष्ट है: रिश्तों का कत्ल करने वाली ऐसी दरिंदगी के लिए सभ्य समाज में कोई जगह नहीं है। 12 साल बाद ही सही, लेकिन न्याय की तलवार ने अपना काम कर दिया है।

