कुलपति की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी : उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) में उच्च शिक्षा और शोध की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
शुक्रवार, 06 फरवरी 2026 को विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति की अध्यक्षता में शोध परिषद की चतुर्थ बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य आकर्षण ‘शोध अध्यादेश-2026’ के प्रारूप को मिली आधिकारिक मंजूरी रही।
शोध अध्यादेश-2026: पारदर्शिता और गुणवत्ता पर जोर
बैठक के दौरान सहायक निदेशक डॉ. एस.एन. ओझा ने ‘शोध अध्यादेश-2026’ (Research Ordinance-2026) का विस्तृत प्रारूप प्रस्तुत किया। उपस्थित सदस्यों ने अध्यादेश के विभिन्न बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। चर्चा के उपरांत, सर्वसम्मति से इस नए प्रारूप को अनुमोदन प्रदान किया गया। यह नया अध्यादेश विश्वविद्यालय में शोध की प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखता है।
इस मौके पर सदस्य सचिव एवं निदेशक (शोध) प्रो. गिरिजा पांडे और अतिरिक्त निदेशक प्रो. मंजरी अग्रवाल ने चतुर्थ शोध परिषद की कार्यसूची और विश्वविद्यालय की नवीन शोध नीतियों को सदन के सम्मुख रखा।
बैठक में शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने और शोधार्थियों (Research Scholars) को एक उत्कृष्ट शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में आमंत्रित बाह्य विशेषज्ञों ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय द्वारा अपनाई जा रही शोध नीतियों की खुले मन से प्रशंसा की। बैठक में डॉ. एच.सी. पुरोहित (दून विश्वविद्यालय),
प्रो. गोपाल नन्द साहू (कुमाऊं विश्वविद्यालय), प्रो. जयदीप शर्मा (इग्नू) ने विचार रखे।विशेषज्ञों ने कहा कि ये नीतियां न केवल गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देंगी, बल्कि नैतिक और पारदर्शी अनुसंधान की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होंगी।
इस महत्वपूर्ण निर्णय के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक और शोध परिषद के सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से प्रो. पी.के. सहगल (उपनिदेशक शोध), डॉ. एस.एन. ओझा (सहायक निदेशक), श्रीमती करिश्मा (शोध अधिकारी) व विभिन्न विद्याशाखाओं के निदेशक एवं अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

