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धराली रेस्क्यू ऑपरेशन, तीसरा दिन : वायुसेना ने संभाला मोर्चा

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उत्तरकाशी: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में धराली में आई प्राकृतिक आपदा के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन तीसरे दिन भी जारी है। खराब मौसम और भूस्खलन के कारण बाधित हुई सड़कों के बीच अब वायुसेना (Indian Air Force) ने मोर्चा संभाल लिया है। चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से राहत और बचाव कार्य में तेज़ी लाई गई है। अब तक 307 लोगों को गंगोत्री और आसपास के क्षेत्रों से सुरक्षित निकालकर हर्षिल पहुँचाया जा चुका है।

धराली रेस्क्यू ऑपरेशन, तीसरा दिन
धराली रेस्क्यू ऑपरेशन, तीसरा दिन

आपदा में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। रेस्क्यू किए गए लोगों में 13 घायल भी शामिल हैं, जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई है। बुधवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद धराली और हर्षिल का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी सांसदों के एक दल ने आपदा की जानकारी दी है, जिसके बाद पीएम ने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

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रेस्क्यू किए गए लोगों का विवरण

आपदा प्रबंधन सचिव के अनुसार, अब तक 307 तीर्थयात्रियों को सुरक्षित रूप से हर्षिल लाया गया है। इनमें गुजरात (131), महाराष्ट्र (123), मध्य प्रदेश (21), उत्तर प्रदेश (12) और अन्य राज्यों के के भी कई लोग शामिल हैं। इनमें से 135 लोगों को हर्षिल से उत्तरकाशी और देहरादून भेजा जा चुका है। वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से 35 लोगों को देहरादून के जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुँचाया गया, जहाँ से उन्हें उनके गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की जा रही है।

राज्य सरकार, जिला प्रशासन, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य सभी एजेंसियाँ राहत एवं बचाव कार्य में पूरी तत्परता से जुटी हुई हैं। चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से एनडीआरएफ की टीमों और आवश्यक उपकरण को भी धराली तक पहुँचाया जा रहा है, क्योंकि भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग पूरी तरह से बाधित है।

उत्तरकाशी के धराली गांव में 5 अगस्त 2025 को आई आपदा में मरने वालों और लापता लोगों की संख्या को लेकर विभिन्न स्रोतों से अलग-अलग जानकारी सामने आ रही है। राहत और बचाव कार्य अभी भी जारी है, इसलिए सही और अंतिम संख्या बताना मुश्किल है।

मृतकों व लापता लोगों की सही संख्या ?

कुछ रिपोर्टों में 5 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा बढ़कर 6 तक बताया गया है। स्थानीय प्रशासन और सूत्रों के मुताबिक, 50 से 100 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें सेना के जवान भी शामिल हैं, जिनकी संख्या 9 से 11 तक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का जिक्र है कि आधिकारिक आंकड़े वास्तविक त्रासदी को कम करके आंक रहे हैं, क्योंकि कई स्थानीय लोग और यात्री मलबे में फंसे हो सकते हैं। हालांकि, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां पूरी तत्परता के साथ रेस्क्यू और राहत कार्यों में जुटी हैं, और हेलीकॉप्टरों की मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। मौसम और टूटी सड़कों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधाएं आ रही हैं, जिससे सही स्थिति का आकलन करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।

उत्तरकाशी जिले में धराली में आई प्राकृतिक आपदा के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन

📍 घटना विवरण : उत्तरकाशी: धाराली गांव में अचानक बाढ़ और मलबा – 5 अगस्त 2025

दिनांक व जगह: यह त्रासदी 5 अगस्त 2025 को धाराली गांव, उत्तरकाशी ज़िला, उत्तराखंड में हुई

प्रमुख कारण: केवल बारिश नहीं, बल्कि उच्च हिमनदीय तलछट या ग्लेशियर-पोंड बर्स्ट जैसे भूवैज्ञानिक कारणों ने लगभग 36 करोड़ घन मीटर मलबा एक साथ नीचे गिरवा दिया, जिसने खीर गंगा नदी के रास्ते तेज़ बहाव के साथ गांव तक पहुंचते ही तबाही कर दी

⚠️ प्रभाव:
कम से कम 6 लोग मृत पाए गए और लगभग 100 लोग लापता बताए गए हैं।

लगभग 50 से अधिक संरचनाएँ जैसे मकान, होटेल और होमस्टे बहकर नष्ट हो गए; कई बाजार और सड़के भी पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गए

🆘 बचाव व राहत प्रयास:
भारतीय सेना, NDRF, SDRF, ITBP, और स्थानीय पुलिस की टीमों ने राहत कार्य युद्धस्तर पर प्रारंभ किया है। लगभग 200 से अधिक लोग अब तक बचाए गए, तथा मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश जारी है

खराब हालात के बीच भी दो Chinook और दो Mi-17 हेलीकॉप्टर, ड्रोन, ट्रैकर डॉग्स, भारी मशीनरी, और अस्थायी ज़िपलाइन नेटवर्क की सहायता से निरंतर प्रयास जारी हैं

सड़क संपर्क कट जाने से लिमचागढ़ में अस्थायी पुल बनाया जा रहा है, बिजली और मोबाइल नेटवर्क पुन:स्थापित करने की भी कोशिशें की जा रही हैं

💰 आधिकारी कार्रवाई:

राज्य सरकार ने ₹20 करोड़ रुपये का आपदा राहत कोष जारी किया है; साथ ही मुख्य सचिव स्तर से पूरे केंद्रीय सहयोग का आश्वासन दिया गया है

🧠 विशेषज्ञ विश्लेषण—आपदा के पीछे भूवैज्ञानिक हालात:

भूस्खलन को सामान्य बारिश घटना नहीं बताया जा सकता; दरअसल, उच्च ऊँचाई पर स्थित अस्थिर हिमनदीय तलछट गिरने से यह तबाही हुई, जिसकी मोटाई लगभग 300 मीटर और क्षेत्रफल 1.1 वर्ग किमी से अधिक था

डॉ. डी. डी. चुनियाल सहित भूविज्ञानी मानते हैं कि ग्लेशियर-रिज़र्वायर का टूटना (pond burst) ही मुख्य कारण रहा, न कि बारिश आत्मनिर्भर घटना; क्षेत्र में भारी मानव हस्तक्षेप, पर्यटन विकास और नियमों का उल्लंघन भी आपदा की तीव्रता बढ़ाने में सहायक रहे हैं

📌 भविष्य के लिए सन्देश:

यह आपदा अति तीव्र ओरोग्राफिक बारिश (cloudburst) और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की चेतावनी देती है, विशेषकर हिमालयी क्षेत्र में

साथ ही यह स्पष्ट संकेत देती है कि संरक्षण नियमों का उल्लंघन, अनियंत्रित निर्माण, और प्राकृतिक जलपथों में मानव हस्तक्षेप भविष्य में ऐसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ा सकते हैं।

धाराली में हुई यह त्रासदी 5 अगस्त 2025 को हुई जब एक भूगर्भीय विस्फोट की तरह हिमनदीय मलबा नदी में समाहित हो गया और क्षेत्र को पलक झपकते में लगभग नष्ट कर दिया। मौजूदा बचाव कार्यों की गति धीमी दिखाई दे रही है पर अधिक से अधिक जान बचाने की कोशिश जारी है। भविष्य में ऐसे हादसों से बचने के लिए पर्यावरणीय नियमों का पालन, सटीक भूगर्भीय अध्ययन और आपदा पूर्व चेतावनी सबसे आवश्यक हैं।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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