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उत्तराखंड से पंचकूला आए परिवार के 7 लोगों ने दी जान, कार में मिले शव

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CNE DESK/हरियाणा के पंचकूला में घटित एक हृदयविदारक घटना में, एक ही परिवार के सात सदस्यों ने ज़हरीला पदार्थ खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। मृतकों में पति-पत्नी, उनके तीन बच्चे और दो बुज़ुर्ग शामिल हैं। पुलिस को सेक्टर-27 में एक कार में शव मिले, जो देहरादून नंबर की थी। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि परिवार कर्ज से परेशान था।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार सोमवार रात करीब 11 बजे पंचकूला में डायल 112 पर इस बावत सूचना मिली। फोनकर्ता ने बताया कि मकान नंबर 1204 के बाहर खड़ी एक कार में कुछ लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कार में मौजूद सभी लोगों को अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में छह को मृत घोषित किया गया, जबकि एक सदस्य की हालत गंभीर बताई गई थी। इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।

मृतकों में प्रवीण मित्तल उनकी पत्नी रीना, मां विमला, पिता देशराज, जुड़वां बेटी हिमशिखा व दलिशा और बेटा हार्दिक शामिल हैं। मृतक बच्चों की उम्र 12 से 15 साल के करीब है। इधर सूचना मिलने के बाद डीसीपी हिमाद्रि कौशिक समेत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे।

देहरादून में था प्रवीण मित्तल का टूर एंड ट्रैवल्स बिज़नेस

पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि प्रवीण मित्तल देहरादून में टूर एंड ट्रैवल्स का कारोबार करते थे, जो हाल के समय में घाटे में चल रहा था। कर्ज बढ़ने के बाद वे मानसिक तनाव में थे। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि पूरा परिवार पंचकूला क्यों आया और यहीं आत्महत्या क्यों की? पुलिस इस दिशा में भी जांच कर रही है कि जिस घर के पास कार खड़ी थी, वहां उनका क्या संबंध था।

सुसाइड नोट भी मिला

कार से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला है। सुसाइड नोट में कारोबारी ने कर्ज से परेशान होकर खुदकुशी की बात लिखी है। सूत्रों के मुताबिक सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि… मैं नहीं चाहता कि मेरे बाद मेरे बच्चों को परेशान किया जाए।

बागेश्वर धाम की हनुमंत कथा से लौट रहा था परिवार

जानकारी के अनुसार देहरादून निवासी प्रवीण मित्तल अपने परिवार सहित पंचकूला में आयोजित बागेश्वर धाम की हनुमंत कथा कार्यक्रम में शामिल होने आए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद देहरादून वापस जाते हुए उन्होंने सामूहिक आत्महत्या का यह कदम उठाया। मृतकों में प्रवीण मित्तल उम्र 42 वर्ष निवासी देहरादून, वीण के माता-पिता, प्रवीण की पत्नी और 2 बेटी और एक बेटे सहित तीन बच्चे शामिल हैं।

देहरादून के ब्लूमिंग बर्ड स्कूल में पढ़ते थे बच्चे

सामूहिक सुसाइड पर प्रवीण मित्तल की एक पड़ोसी आराधना थापा का भी बयान आया है। थापा के अनुसार यह परिवार काफी साधारण था। उनकी मां बीमार रहती थीं और बच्चे देहरादून के ब्लूमिंग बर्ड स्कूल में पढ़ते थे। ससुर की एक दुकान टपकेश्वर मंदिर के पास थी। यह परिवार लगभग एक साल पहले अपने ससुर के साथ चंडीगढ़ शिफ्ट हो गया था। इससे पहले वे करीब तीन साल कोलागढ़ में रहे, फिर देहरादून के अंकित विहार और टपकेश्वर मंदिर के पास कुछ समय तक रहे। उसके बाद चंडीगढ़ चले गए।

एक करोड़ का लोन लिया था 

प्रवीण के ससुर राकेश गुप्ता ने बताया कि प्रवीण पंचकूला के बरवाला का रहने वाला है। उसने बिजनेस के लिए करीब 10 साल पहले एक करोड़ रुपए का लोन लिया था। इसके बाद वह परिवार के साथ देहरादून चला गया। वहां उसने टूर एंड ट्रैवल्स का काम शुरू किया, लेकिन इसमें घाटा हो गया। प्रवीण और उसका परिवार 10 साल से मेरे संपर्क में नहीं था।

बैंक ने भगोड़ा घोषित किया 

प्रवीण मित्तल की पत्नी रीना की बहन राखी गुप्ता ने बताया कि जब प्रवीण ने लोन नहीं चुकाया तो बैंक ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। कुछ महीने पहले वह अपने बच्चों के स्कूल सेक्टर 22 में गई थी। वहां मुझे रीना मिली थी। उसने भी अपने बच्चों का यहां एडमिशन कराया था।

टैक्सी चलाने लगा था प्रवीण 

प्रवीण मित्तल के मामा के लड़के संदीप अग्रवाल ने बताया कि लगभग 12 साल पहले प्रवीण हिसार से पंचकूला में शिफ्ट हुआ था। यहां उनकी स्क्रैप की एक फैक्ट्री थी। लगभग 5 साल तक उन्होंने किसी से कोई संपर्क नहीं किया। जब प्रवीण देहरादून शिफ्ट हुआ तो उस पर करीब 20 करोड़ रुपए का कर्ज था। उसे जान से मारने की धमकियां भी मिल रही थीं। 5 दिन पहले ही प्रवीण से बात हुई थी। फिलहाल वह टैक्सी चलाने का काम करता था।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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