HomeUttarakhandNainitalजवाहर नवोदय में 5 दिवसीय कला कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

जवाहर नवोदय में 5 दिवसीय कला कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

प्रो. शेखर चंद्र जोशी, डॉ. संजीव आर्या व पूरन चंद्र उपाध्याय ने किया उद्घाटन

सीएनई रिपोर्टर सुयालबाड़ी। जवाहर नवोदय विद्यालय सुयालबाड़ी नैनीताल में पांच दिवसीय कला कार्यशाला का शुभारंभ हो गया है। उद्घाटन एसएसजे विश्वविद्यालय से आये मुख्य अतिथि प्रो. शेखर चंद्र जोशी, डॉ. संजीव आर्य व प्राचार्य पूरन चंद्र उपाध्याय ने संयुक्त रूप से किया।

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कला कार्यशाला के अंतर्गत उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश के जवाहर नवोदय विद्यालय से आये कला अध्यापकों का पंजीकरण का कार्य पूर्ण कराया गया। इसके पश्चात् ‘कला कार्यशाला” कस उद्घाटन मुख्य अथिति प्रोफेसर शेखर चन्द्र जोशी, डा० संजीव आर्या एवं विद्यालय के प्राचार्य पूरन चन्द्र उपाध्याय द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप जलाकर एवं पुष्प अर्पित कर किया गया।

पांच दिवसीय कला कार्यशाला को सम्पन्न करने हेतु मंच संचालन का कार्यभार विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक भूप सिंह एवं कला अध्यापक वाई०एस०मिश्रा द्वारा किया गया। दीप प्रज्जवलन के पश्चात् प्राचार्य द्वारा सभी अध्यापको व अल्मोड़ा से आये अथिति के बारे में परिचय देते हुए उनका अभिनन्दन व स्वागत किया गया। डा० संजीव आर्या द्वारा सभी कला शिक्षकों को कला के महत्व के बारे में बताया गया।

इसके पश्चात् प्रोफेसर शेखर चन्द्र जोशी जी ने कला में प्रयोग हो रहे विभिन्न माध्यमों की विशेषताओं से रुबरु कराया। इनके द्वारा स्वनिर्मित कला जगत से संबंधित स्लाइड्स के माध्यम से भारत में फैली विभिन्न कलाओं से अवगत कराया गया। जिससे कलाकरों ने अलग-2 राज्यों की लोक कलाओं के बारे में जाना। उनके द्वारा निर्मित नाखून से बनी कलाकृतियो को दिखाया गया, जिससे सभी कला अध्यापक प्रेरित हुए।

कला में प्रतीकों के महत्व तथा वर्तमान समाज मे व्याप्त Digital Technology से सम्बन्धित कलाकृतियों व चित्रकारों के बारे में बताया गया। प्रो0 जोशी जी ने कोलाज पेण्टिग की विशेषताओं के विषय में बताया गया। कोलाज पेंटिंग के महत्व एवं माध्यम के गुणों पर चर्चा की गई। प्रो. जोशी ने पेपर कोले, डिकोपेज, फौटो मॉन्टेज एवं असेम्बलेज के गुणो पर चर्चा की। आर्ट इंटीग्रेशन में कला अध्यापक की अहम भूमिका के महत्व को बताया। डा० संजीव आर्या जी ने पेपर क्राफ्ट के माध्यम से मुखौटे बनाने की कला सीखाई। सभी कला अध्यापको के द्वारा मुखौटे व कोलाज पेंटिंग्स बनाई गई।

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