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अद्भुत : बाइक से पूरी की आदि कैलाश व ओम पर्वत तक 684 किमी की यात्रा

📌 सकुशल वापस लौटे अल्मोड़ा के 15 जांबाज राइडर्स 

विशेष : हिमालयन एडवेंचर बाइक राइडर ग्रुप अल्मोड़ा के पंद्रह सदस्यों द्वारा कुमाऊँ के पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) जिले के आदि कैलाश एवं ओम पर्वत की 684 किलोमीटर की यात्रा पूरी की गई। जिसके बाद सभी बाइक राइडर्स सकुशल अल्मोड़ा लौट आए हैं।

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अल्मोड़ा से प्रस्थान करता हिमालयन एडवेंचर बाइक राइडर ग्रुप अल्मोड़ा
अल्मोड़ा से प्रस्थान करता हिमालयन एडवेंचर बाइक राइडर ग्रुप अल्मोड़ा

सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा : बाइकर ग्रुप ने अल्मोड़ा से 9 जून को यात्रा प्रारंभ की। यह बाइक राइडर ग्रुप अल्मोड़ा से दनिया, घाट, पिथौरागढ़ जोलजीवी होता हुआ 206 किलोमीटर की दूरी पार कर धारचूला पहुंचा। 10 जून को धारचूला से तवाघाट, पांगला, मांगती, गर्भाधार, बूँदी, छियालेख, गरब्यांग, नपलच्यु होता हुआ गुंजी गांव पहुंचा। जहां राइडर्स ने रात्रि विश्राम किया।

गुंजी गांव के पास
गुंजी गांव के पास

जांबाजी से पार किया तेज बहाव का नाला

तीसरे दिन गुंजी से आदि कैलाश को प्रस्थान किया, जो लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है। इस मार्ग में एकाध स्थान पर ही सोलिंग किया मार्ग मिला, शेष मार्ग डामर किया हुआ था। इस घाटी में कुटी यांगति नदी बहती है लेकिन, कुटी गांव से पहले एक तेज बहाव के नाले को बाइक सवारों ने बहुत ही जांबाजी से पार किया। उसके बाद जोलिङकौंग पहुंचकर विहंगम आदि कैलाश के दर्शन किये। ततपश्चात पार्वती सरोवर व स्थानीय मंदिर के दर्शन कर वापस गुंजी की ओर को लौट गए।

इस बीच नाबि, गुंजी, नपलच्यु पड़ाव पर पहुंचकर क्षेत्र के ग्रामीण जनों से स्थानीय शौका समाज की लोक संस्कृति, पर्यटन, तीर्थाटन, पर्यावरण, कृषि, जड़ी—बूटी, स्थानीय परंपरागत ज्ञान एवं जलवायु के बदलते हुए मिजाज के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की गई। साथ मे पूर्व परंपरागत ज्ञान से बने भवनों एवं काष्ठ कला आदि का अध्यन किया।

आदि कैलाश पहुंचा ग्रुप
आदि कैलाश पहुंचा ग्रुप

जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों ने चौंकाया

1994 मे लेखक द्वारा इस घाटी मे तवाघाट चोदास, व्यास से सिनला दर्रा पार कर दारमा घाटी से सोपला होता हुआ धारचुला तक पैदल ट्रैक किया था। सन् 1994 के मुकाबले 2024 मे टिंबर लाइन के तेजी से पीछे खिसकने व तेजी से आदि कैलाश पर्वत के नीचे फैले ग्लेशियर के सिकुड़ने एवं पीछे खिसकने पर चिंता व्यक्त की।

अगली सुबह हिमालयन एडवेंचर बाइक राइडर ग्रुप अल्मोड़ा द्वारा ओम पर्वत की ओर को रवाना हुआ। काला पानी पहुंचने से पहले एक रोंगटे खड़े करने वाला पानी का नाला बहुत ही जोखिम भरा हुआ था। जिसे बहूत ही जोश— खरोश के साथ पार किया। गुंजी पड़ाव से नाभीढांग ओम पर्वत की दूरी 20 किलोमीटर की है। इस मार्ग में अभी तक केवल सोलिंग हुई है। डामर करने का कार्य अभी तक बचा हुआ है। यह मार्ग भारत—तिब्बत और चीन की सीमा लिपुलेख दर्रे को जाता है।

ओम पर्वत
ओम पर्वत

ओम पर्वत का अविस्मरणीय नजारे ने किया मंत्रमुग्ध

इसके बाद दल ने काला पानी मंदिर के पास काली नदी के स्रोत पर स्थापित मंदिर के दर्शन किए एवं काली नदी के स्रोत पर जाकर के उसको बारीकी से देखा। यह भारत—नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा का निर्धारण करती है। फिर नाभीढांग, ओम पर्वत को प्रस्थान किया। पर्यटकों से गुलजार नाभीढांग से ओम पर्वत का अविस्मरणीय नजारा देखा, जो कुदरत ने प्राकृतिक रूप से बर्फ से उकेरा हुआ है।

आदि कैलाश व ओम पर्वत तक 684 किमी की यात्रा
आदि कैलाश व ओम पर्वत तक 684 किमी की यात्रा

ओम पर्वत से बाइक सवार गुंजी से तवाघाट होता हुआ 76 किलोमीटर दूर धारचूला पहुंचा। 12 जून को सुबह धारचूला से कनालीछीना, पिथौरागढ़, घाट होता हुआ देर रात अल्मोड़ा पहुंचने में सफल हुआ। हिमालय एडवेंचर बाइक राइडर ग्रुप में अल्मोड़ा के राजेश बिष्ट, दीपक शाही, मनीष थापा, डॉ महेंद्र सिंह मिराल, उत्तम सिंह, गणेश सिंह शाही, राजू थापा, जितेंद्र सिंह देसवाल, अभिषेक टम्टा, देवेंद्र सिंह बिष्ट, योगेंद्र आगरी, बच्चन सिंह, निहाल सिंह, किशन सिंह खोलिया एवं साज सिंह द्वारा सफलतापूर्वक प्रतिभाग किया गया।

नोट : जानकारी उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण के अध्येता एवं शिक्षक डॉ महेंद्र सिंह मिराल द्वारा दी गयी है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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