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सरकारी कार्मिकों के हितों की अनदेखी कर रही सरकार : कर्नाटक

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✒️ हजारों पदोन्नतियां प्रभावित, शिक्षा विभाग में नौनिहालों का भविष्य प्रभावित

अल्मोड़ा। पूर्व दर्जा मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने कहा कि सरकार कार्मिकों की समस्याओं व लंबित मामलों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। साथ ही कार्मिकों की समस्याओं का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शिथिलीकरण का शासनादेश निर्गत नहीं किए जाने से हजारों पदोन्नतियां प्रभावित हो रही हैं।

शिथिलीकरण में संपूर्ण सेवाकाल में एक बार अर्हकारी सेवा में छूट देने का प्राविधान है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार द्वारा खुद बनाये गये स्थानांतरण एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। कार्मिकों को उनके विकल्प के आधार पर स्थान आबंटित नहीं किए गए हैं और मृत आश्रितों को भी शिक्षा विभाग में उनके विकल्प के आधार पर तैनाती नहीं दी जा रही है। सुगम स्थानों पर नई तैनाती नहीं होने से वहां कार्यरत कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्य भार बढ़ रहा है। सूचना का अधिकार, सेवा के अधिकार का दायरा दिन प्रतिदिन बढ़ाया जा रहा है, किंतु राज्य सरकार ने केवल आयोग बनाने के अतिरिक्त एक पद का भी किसी भी जिले में सृजन नहीं किया है।

इससे विभाग के दैनिक कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अधिकांश पदों को समाप्त कर दिया गया है। जिससे कार्यालयों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और अधिकारी, कार्मिकों द्वारा ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का भी काम किया जा रहा है। अधिकांश राजकीय इंटर कालेज, हाईस्कूल, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं। उन पदों को भरने के लिए सरकार द्वारा कोई प्रयास नहीं किया गया। फलस्वरूप नौनिहालों के साथ हो रहा खिलवाड़ लगातार जारी है। सभी विभागों के संगठनों के साथ भी नियमित वार्ता करनी चाहिए ताकि संगठन की समस्याओं का भी निस्तारण हो सके।

राज्य सूचना आयोग का कुमाऊं मंडल स्तरीय कार्यालय नैनीताल या अल्मोड़ा में खुलना चाहिए ताकि कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से देहरादून के चक्कर न लगाना पड़े। उत्तराखंड में शिक्षा ग्रहण के बाद छात्र-छात्राओं को उचित मार्गदर्शन हेतु प्रत्येक जिले में कैरियर काउंसिलिंग की भी स्थापना होनी आवश्यक है। जिससे वे भी उचित दिशा में बढ़ सकें। विद्यालयों में वर्तमान विषयों के साथ-साथ रोजगार शिक्षा व कानूनी शिक्षा भी दिए जाने की आवश्यकता है। कर्नाटक ने सरकार से इन जनहित के गंभीर मुद्दों पर तत्काल कार्यवाही करने की मांग की है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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