अल्मोड़ा। काफी जद्दोजहद के बाद राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा में लाई गई करीब सवा सौ साल पुरानी नौका को करीब पांच साल बाद पानी से बचाव के लिए एक अदद अस्थाई छत मिल सकी है। जब यह नौका यहां लाई गई, तब इसके संरक्षित करने और बेहतर रखरखाव करने के दावे राजकीय संग्रहालय द्वारा किए गए। मगर आज तक कुछ खास नहीं हो पाया।
उल्लेखनीय है कि उधमसिंहनगर जिले के सितारगंज तहसील के खमरिया गांव में वर्ष 2014 के अंतिम महीनों में एक प्राचीन लोहे की नौका मिली। जिसे लगभग सवा सौ से डेढ़ सौ साल पुरानी ब्रिटिशकालीन माना जा रहा है। यह लोहे की नौका करीब 25 कुंतल वजनी है। इस नौका प्राचीनता की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस नौका को मई, 2015 में राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा लाया गया। जब यह नौका अल्मोड़ा लाई गई, तो उस वक्त इसे लैमिनेट कर संरक्षित करने तथा लोगों के दर्शनार्थ संग्रहालय में उचित स्थान पर सजाने, संवारने व संरक्षित करने की बात कही गई थी। मगर अब पांच साल होने को हैं और ऐसा कुछ नहीं हो सका। यह नौका लाने के बाद से संग्रहालय के बाहर खुले में रखी गई थी, जो बारिश व धूल इत्यादि से खराबी की ओर जा रही है। इसके उचित रखरखाव का इंतजाम नहीं हो सका। इसे वाटरप्रूफ करने का इंतजाम भी अभी तक नहीं हो सका। बमुश्किल अब इसे एक अस्थाई छत मिल पाई है। राजकीय संग्रहालय के प्रभारी डा. चंद्र सिंह चाैैहान ने बताया कि 1.05 लाख रूपये से इसकी छत का निर्माण हुआ है, ताकि बारिश के सीधे पानी से इसे बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि अब नये सिरे से इसे संरक्षित व उचित स्थान पर व्यवस्थित करने के प्रयास होंगे। जल्द ही इसके लिए अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
अल्मोड़ा: प्राचीन नौका को पांच साल में मिल सकी एक अदद छत, लाकर खुले में छोड़ दी
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