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सबहिं नचावत राम गोसाईं : महिला ने 01 अरब की रकम डाल दी कूड़े में

सालों रहीं डिप्रेशन की शिकार

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रकम डाल दी कूड़े में : यकीन करना मुश्किल है, लेकिन यह बात पूरी तरह सत्य है कि इस महिला ने एक अरब की रकम 12 मिलियन डालर) कूड़े में फेंक दी। आप सोच रहे होंगे कि ऐसा करने वाली कोई साधू होगी। नहीं, ऐसा नहीं, दरअसल इस महिला ने गलती से ऐसा कर दिया। जब उसे अपनी गलती का अहसास हुआ तो वह जैसे अपने होश हवास ही खो बैठी। नतीजन वह कई साल तक डिप्रेशन की मरीज बन गई।

जेनेट वैलेंटी Janet Valenti

मेरी किस्मत ने दे दिया धोखा….

हम यहां चर्चा कर रहे हैं एक ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना की, जो एक 77 साल की महिला के साथ घटी है। हैरानी की बात तो यह है कि इस महिला ने घटना के 30 साल बाद अपनी कहानी सोशल मीडिया में साझा की है। उसने बताया कि आज से तीस साल पहले वह अरबपति बन सकती थी, लेकिन किस्मत ने उसके साथ धोखा किया।

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यह है पूरा घटनाक्रम

77 साल की एक महिला है। जिसका नाम जेनेट वैलेंटी Janet Valenti है। महिला न्यूयॉर्क की रहने वाली है। उसने 30 साल पहले लॉटरी के कुछ टिकट खरीदे थे। जिसकी कहानी उसने आज बताई है। महिला के अनुसार मामला 17 जुलाई 1991 का है। महिला का कहना है कि यह वह दिन था जब वह अपने एक दोस्त के वीकेंड बिताने को घर से निकल पड़ी थी।

अगले दिन पड़ा सच्चाई का पता

महिला के अनुसार उसके दोस्त ने उसे बताया कि स्टेटन द्वीप में एक विनिंग टिकट बेचा गया था। जिसके बाद जेनेट ने अपने सभी लॉटरी नंबर चेक किये। इस दौरान उसे पता चला कि उसके एक टिकट में 12 मिलियन डॉलर (लगभग 1 अरब रुपये) का ईनाम निकला है।

घर गई, टिकट ढूंढा तो याद आया कूड़े में डाल दिया था

महिला के अनुसार यह सूचना​ मिलते ही वह नाचते—गाते घर चली गई। जब घर पहुंची तो टिकट ढूंढना शुरू कर दिया। इस बीच उसे याद आया कि घूमने निकलते हुए उसने जल्दबाजी में टिकट को उसने कूड़े में डाल दिया था।

पड़ोसी ने उठाया कचरा और बर्बाद हो गई उम्मीदें

जेनेट ने मीडिया को बताया कि जल्दबाजी में उसने कूड़े के ढेर में टिकट ढूंढ़ने की कोशिश की। फिर भी वह नहीं मिला। तभी उसे पता चला कि उसकी पड़ोसन उस दिन उसका कूड़ा फेंक दिया था। जबकि इससे पूर्व उसने इस तरह की मदद कभी नहीं की। पता चला कि उसके कूड़े को कचरा गाड़ी अपने साथ ले जा चुकी है। जिसमें उसका लाटरी टिकट भी था। जिसमें उसका एक अरब का ईनाम निकला था।

01 अरब तब खोए जब सबसे अधिक जरूरत थी

जेनेट के अनुसार उसके जीवन का सबसे दुखद पहलू तो यह रहा कि उसने एक अरब रुपए तब खोए जब उसके पति की मौत हो गई थी। यह वह समय था कि जब उसके दो बच्चों की परवरिश के लिए उसे पैसों की सबसे अधिक जरूरत थी। जब उसने इस संबंध में पूछताछ की तो उसे पता चला कि राज्य लॉटरी नियमों के अनुसार, विजेता टिकट की खरीद के एक साल बाद यानी 17 जुलाई 1992 तक उसका दावा मान्य था। देखते ही देखते एक साल बीत गया पर उसका टिकट नहीं मिला। जिस कारण उसके 12 मिलियन डॉलर का पुरस्कार हवा—हवाई हो गया।

काश पैसे मिल जाते

महिला का कहना है कि अगर यह रकम मिल जाती तो उसकी किस्मत बदल गई होती। हालात इतने बुरे हो गये कि जेनेट डिप्रेशन में चली गई। महिला का कहना है कि इस हालत में भी उसने कई आलेख पढ़े। जिससे उसे ताकत मिली। आलेखों में बताया गया था कि लॉटरी की रकम किस तरह घर तबाह कर देती है। जिससे उसे भरोसा हुआ कि ऐसा तो दुनिया में पता नहीं कितनों के साथ हुआ है। जिस कारण उसने अपनी किस्मत को दोष देना बंद कर दिया और वह अवसाद से बाहर आ गई।

अब भी लॉटरी खेलती है

L का कहना है कि वह आज की तारीख में भी लॉटरी टिकट खरीद लेती हैं। उसे उम्मीद है कि एक न एक दिन वह जरूर जीत जायेगी। वह अब कभी भी अपने टिकट कूड़े में नहीं डालती।

रकम डाल दी कूड़े में

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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