मौना इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने किया नैनीताल जू का शैक्षिक भ्रमण
सीएनई रिपोर्टर, नैनीताल। वन्यजीव सप्ताह के अवसर पर वन विभाग द्वारा विद्यार्थियों को वन्यजीवों, जैव विविधता और उनके प्राकृतिक आवास के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में 3 अक्टूबर को वन्यजीव सप्ताह के दूसरे दिन मौना इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों का नैनीताल जू का शैक्षिक भ्रमण कराया गया।

प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल एवं वन क्षेत्राधिकारी उत्तरी गौला के सहयोग से आयोजित इस शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने नैनीताल जू में विभिन्न वन्यजीवों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा उनके प्राकृतिक आवास, जीवन-शैली और संरक्षण की आवश्यकता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। विद्यार्थियों ने वन्यजीवों को नजदीक से देखकर उनके प्रति जिज्ञासा और रुचि दिखाई तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को समझा।
इस अवसर पर वन दरोगा श्री प्रदीप कुमार मौर्य ने विद्यार्थियों को वन्यजीव संरक्षण के महत्व की जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष वन्यजीव सप्ताह का थीम “Connecting Habitats, Thriving Wildlife” रखा गया है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों का संरक्षण केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। वन्यजीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक आवास उपलब्ध रहना उनकी निरंतरता के लिए आवश्यक है।
उन्होंने विद्यार्थियों से वन एवं वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी वन्यजीव संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जंगलों और वन्यजीवों का संरक्षण सीधे तौर पर पर्यावरणीय संतुलन से जुड़ा हुआ है। यदि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे तो वन्यजीवों का अस्तित्व भी सुरक्षित रहेगा और मानव जीवन के लिए आवश्यक पारिस्थितिक संतुलन बना रहेगा।
शैक्षिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि मानव और वन्यजीव एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। तेजी से बदलते पर्यावरणीय परिस्थितियों और प्राकृतिक आवासों पर बढ़ते दबाव के बीच मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व की भावना विकसित करना समय की आवश्यकता है। विद्यार्थियों को वन्यजीवों के प्रति भय या उदासीनता के बजाय संवेदनशील और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया।
वन विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ वन्यजीवों और प्रकृति को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिला। भ्रमण के माध्यम से विद्यार्थियों में जैव विविधता के संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षिक भ्रमण बच्चों को प्रकृति के करीब लाने के साथ ही आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को यह संदेश देना रहा कि वन्यजीवों का संरक्षण, उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व ही स्वस्थ एवं संतुलित पर्यावरण की आधारशिला है।









