चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। विकासखंड भैसियाछाना की ग्राम सभा बेलवाल गांव के तोक भनलगांव और ग्राम सभा बबुरियानायल के ग्रामीणों के लिए सड़क आज भी एक अधूरा सपना बनी हुई है। वर्षों से सड़क की मांग को लेकर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हालात यह हैं कि जिस सड़क को लेकर कभी उम्मीद जगी थी, वह आज तक धरातल पर आकार नहीं ले सकी। सड़क के अभाव ने केवल ग्रामीणों की आवाजाही मुश्किल नहीं की, बल्कि गांवों की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर तक बदल दी है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि बबुरियानायल लगभग खाली हो गया है, जबकि भनलगांव के अधिकांश परिवार भी गांव छोड़कर धौलछीना में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, तत्कालीन विधायक रघुनाथ सिंह चौहान के कार्यकाल में जमराड़ी बैंड से भनलगांव तक सड़क स्वीकृत कराई गई थी। इस स्वीकृति के बाद ग्रामीणों को उम्मीद बंधी थी कि अब वर्षों से चली आ रही परेशानी का अंत होगा और गांव सड़क सुविधा से जुड़ सकेगा। लेकिन विडंबना यह है कि सड़क स्वीकृत होने के बावजूद उसका सर्वे कार्य तक आज तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में निर्माण कार्य शुरू होना तो दूर, ग्रामीण अभी भी सर्वे की प्रतीक्षा में हैं।
एक सड़क की कमी ने बदल दी पूरे गांव की तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का अभाव किसी एक सुविधा से वंचित होने भर का मामला नहीं है। इसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। सड़क न होने के कारण गांवों से आवागमन कठिन बना हुआ है और धीरे-धीरे लोग अपने पुश्तैनी घर छोड़कर सड़क से जुड़े क्षेत्रों की ओर जाने लगे।
सबसे गंभीर स्थिति बबुरियानायल की बताई जा रही है। सड़क सुविधा के अभाव में यहां से लोगों का पलायन इस कदर बढ़ा कि गांव में अब पहले जैसी आबादी ही नहीं रह गई। ग्रामीणों के मुताबिक, यहां के सभी लोग धौलछीना में रहने लगे हैं। यानी सड़क के अभाव ने एक पूरे गांव को ही लगभग उजाड़ दिया।
वहीं भनलगांव में भी करीब 75 प्रतिशत लोग धौलछीना में किराये के कमरों में रहने लगे हैं। जिन घरों और आंगनों में कभी बच्चों की चहल-पहल और ग्रामीण जीवन की रौनक रहती थी, वहां अब सन्नाटा बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क सुविधा उपलब्ध हो जाती तो लोगों को अपने गांव छोड़ने की मजबूरी नहीं आती।
पहले सड़क, फिर गांव बचाने की लड़ाई
ग्रामीणों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि विकास की बुनियादी जरूरत है। सड़क आने से गांव बाजार, विद्यालय, अस्पताल, रोजगार और अन्य आवश्यक सुविधाओं से सीधे जुड़ता है। इसके उलट सड़क के अभाव में गांव लगातार पिछड़ता जाता है और अंततः पलायन का दंश झेलता है।
भनलगांव और बबुरियानायल की मौजूदा स्थिति इसी चिंता को सामने रखती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई तो आने वाले समय में गांवों में बची-खुची आबादी भी पलायन कर सकती है।
ग्राम प्रधान ने दी दो टूक चेतावनी
ग्राम प्रधान सुनीता मेहरा ने सड़क के सर्वे कार्य को शीघ्र पूरा कराने और उसके बाद निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्रामीण वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिले हैं। स्वीकृति के बावजूद यदि सड़क का सर्वे तक पूरा नहीं हो पा रहा है तो यह ग्रामीणों की गंभीर उपेक्षा है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सड़क के सर्वे और निर्माण कार्य को लेकर शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण आगामी विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि ग्रामीणों की मूलभूत समस्या का समाधान किए बिना केवल चुनाव के समय गांवों में पहुंचकर वोट मांगना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों का सवाल—आखिर कब तक चलता रहेगा इंतजार?
ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जब सड़क को स्वीकृति मिल चुकी है तो फिर सर्वे कार्य में इतनी देरी क्यों हो रही है? वर्षों से सड़क का इंतजार कर रहे लोगों को आखिर कब तक आश्वासनों के सहारे रखा जाएगा?
भनलगांव और बबुरियानायल की स्थिति बताती है कि पहाड़ में सड़क की अनदेखी केवल विकास कार्य को रोकना नहीं है, बल्कि यह पलायन को बढ़ावा देने वाली सबसे बड़ी वजहों में से एक बन सकती है। ग्रामीणों की मांग अब महज सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रह गई है। यह मांग उनके गांव, उनके घर और उनकी आने वाली पीढ़ियों को बचाने की मांग बन चुकी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और शासन से जमराड़ी बैंड-भनलगांव सड़क का सर्वे तत्काल पूरा कराने, भनलगांव से बबुरियानायल तक सड़क की योजना को आगे बढ़ाने तथा निर्माण कार्य शीघ्र शुरू कराने की मांग की है, ताकि वर्षों से सड़क के इंतजार में खाली होते जा रहे गांवों में एक बार फिर जीवन और उम्मीद लौट सके।




