CDO की Class : छात्राओं से पूछे सवाल तो खुली पढ़ाई की असली तस्वीर !

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CDO की Class : छात्राओं से पूछे सवाल तो खुली पढ़ाई की असली तस्वीर !
CDO की Class : छात्राओं से पूछे सवाल तो खुली पढ़ाई की असली तस्वीर !

हिंदी-गणित से लेकर अंग्रेजी तक परखी समझ

बोले—सिर्फ परीक्षा परिणाम नहीं, बच्चों की समझ भी होगी शिक्षा की कसौटी

सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी/नैनीताल। विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता अब केवल परीक्षा परिणाम और छात्र संख्या से नहीं आंकी जाएगी, बल्कि छात्र-छात्राएं कक्षा के अनुरूप कितना सीख रहे हैं, विषयों को कितना समझ पा रहे हैं और अपने ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग कितना कर सकते हैं, यह भी परखा जाएगा। इसी उद्देश्य से मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे ने नैनीताल स्थित पीएम श्री राजकीय बालिका इंटर कॉलेज कालाढूंगी रोड, हीरानगर में का सघन निरीक्षण कर छात्राओं से सीधे सवाल-जवाब किए। उन्होंने शिक्षकों को स्पष्ट चेतावनी दी कि केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना पर्याप्त नहीं है, प्रत्येक छात्रा के वास्तविक अधिगम स्तर में सुधार दिखाई देना चाहिए। साथ ही विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक संसाधनों के शत-प्रतिशत उपयोग और कमजोर छात्राओं के लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।


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निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने विद्यालय के विभिन्न कक्षा-कक्षों में पहुंचकर छात्राओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने हिंदी, अंग्रेजी, गणित सहित अन्य विषयों से संबंधित प्रश्न पूछे और उनके उत्तरों के माध्यम से विषयगत ज्ञान, तार्किक क्षमता तथा वास्तविक अधिगम स्तर का आकलन किया। उन्होंने छात्राओं से उनकी नियमित पढ़ाई, शिक्षकों की शिक्षण पद्धति और विद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक सुविधाओं के बारे में भी जानकारी ली।

इस दौरान उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर महत्वपूर्ण बात रखते हुए कहा कि किसी विद्यालय की वास्तविक उपलब्धि केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने अथवा नामांकन बढ़ने से निर्धारित नहीं होती। असली सफलता तब मानी जाएगी, जब प्रत्येक विद्यार्थी अपनी कक्षा के निर्धारित शैक्षणिक मानकों और अधिगम प्रतिफलों को प्राप्त कर सके। इसके लिए जरूरी है कि शिक्षक प्रत्येक छात्रा की समझ, सीखने की गति और विषयवार प्रगति पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दें।

उन्होंने शिक्षकों को निर्देश दिए कि पढ़ाई केवल पाठ्यक्रम समाप्त करने की औपचारिकता बनकर न रह जाए। शिक्षण ऐसा हो, जिससे छात्राओं में विषयों की गहरी समझ, तार्किक चिंतन और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित हो सके।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप हो पढ़ाई, आधुनिक संसाधनों का मिले पूरा लाभ

मुख्य विकास अधिकारी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप गतिविधि आधारित, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी शिक्षण व्यवस्था विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पीएम श्री विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक शैक्षणिक वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में विद्यालयों को उपलब्ध कराए गए आधुनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग होना चाहिए।

उन्होंने विद्यालय की प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला, व्यावसायिक शिक्षा की व्यवस्थाओं, खेल मैदान, खेल सामग्री और शिक्षण-अधिगम सामग्री का निरीक्षण कर उनकी उपयोगिता एवं संचालन की स्थिति का जायजा लिया।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों का नियमित संचालन हो तथा छात्राओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखते हुए प्रयोगात्मक एवं गतिविधि आधारित शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला के माध्यम से तकनीक आधारित शिक्षण को भी बढ़ावा दिया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय में उपलब्ध कोई भी संसाधन अनुपयोगी अथवा केवल दिखावे की वस्तु बनकर नहीं रहना चाहिए। सभी सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना प्रधानाचार्य और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। जिन संसाधनों का अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है, उनकी पहचान कर तत्काल सुधार किया जाए।

कमजोर छात्राओं के लिए चलेगी विशेष कक्षा, अधिगम में सुधार नहीं तो तय होगी जवाबदेही

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने छात्राओं के विषयवार शैक्षणिक स्तर का नियमित मूल्यांकन करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन छात्राओं का अधिगम स्तर निर्धारित मानकों से कम पाया जाता है, उनके लिए विशेष उपचारात्मक शिक्षण (Remedial Teaching) की व्यवस्था की जाए, ताकि वे भी अपनी कक्षा के अनुरूप शैक्षणिक दक्षताएं हासिल कर सकें।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिक्षक का दायित्व है कि वह अपनी कक्षा के प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की प्रगति पर नजर रखे। केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करना अथवा निर्धारित पाठ्यक्रम पूरा कर लेना शिक्षण कार्य की सफलता नहीं माना जा सकता। इसके लिए नियमित मूल्यांकन, कमजोर छात्राओं की पहचान, अतिरिक्त शिक्षण और उनकी प्रगति की समीक्षा अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विद्यालय में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जाए। जिन कक्षाओं अथवा विषयों में छात्राओं का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से कम पाया जाता है, वहां सुधार के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। शिक्षा की गुणवत्ता में निरंतर सुधार नहीं होने की स्थिति में संबंधित जिम्मेदारियों का निर्धारण किया जाएगा।

मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता भी परखी, पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश

विद्यालय निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने मध्याह्न भोजन की व्यवस्था का भी जायजा लिया। उन्होंने छात्राओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने विद्यालय परिसर, कक्षा-कक्षों और उपलब्ध आधारभूत सुविधाओं की स्थिति का भी परीक्षण किया तथा आवश्यक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।

अधिकारियों को दो टूक—निरीक्षण के निर्देश कागजों में नहीं, धरातल पर दिखने चाहिए

मुख्य विकास अधिकारी ने जिला परियोजना अधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी और प्रधानाचार्य को निर्देश दिए कि निरीक्षण के दौरान सामने आए सभी सुधारात्मक बिंदुओं पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी संसाधनों और मध्याह्न भोजन की व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि जिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर चिह्नित कर समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। संबंधित अधिकारी नियमित अनुश्रवण करते हुए यह सुनिश्चित करें कि निरीक्षण के दौरान दिए गए निर्देश केवल अभिलेखों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका वास्तविक प्रभाव विद्यालय की व्यवस्थाओं और छात्राओं के शैक्षणिक प्रदर्शन में भी दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि पीएम श्री विद्यालयों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसलिए इन विद्यालयों में उपलब्ध शैक्षणिक एवं आधारभूत सुविधाओं के उच्च मानक बनाए रखना विद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभागीय अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

निरीक्षण के दौरान मुख्य शिक्षा अधिकारी एस० सी० आर्या, जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी मुकेश नेगी, जिला समन्वयक, समग्र शिक्षा, नैनीताल रविन्द्र तिवारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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