जिलेभर से पहुंचे पंचायत प्रतिनिधियों ने निकाली रैली
धरना देकर सरकार को दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सीडीओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। ग्राम पंचायतों की विभिन्न लंबित समस्याओं और मांगों के समाधान में हो रही देरी को लेकर मंगलवार को अल्मोड़ा जिले के ग्राम प्रधानों का आक्रोश खुलकर सामने आया। जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन पहुंचे और सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। इससे पहले प्रधानों ने विकास भवन तिराहे से विकास भवन तक जोरदार रैली निकालकर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। विकास भवन पहुंचने के बाद प्रधानों ने परिसर का घेराव किया और लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग उठाई।
धरना स्थल पर ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ग्राम पंचायत और ग्राम प्रधान हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी संभालने वाले पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उनका कहना था कि ग्राम प्रधान गांव के विकास कार्यों से लेकर ग्रामीणों की छोटी-बड़ी समस्याओं तक के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्राकृतिक आपदा हो, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन हो अथवा ग्रामीणों की रोजमर्रा की समस्याएं—प्रधान हर परिस्थिति में ग्रामीणों के बीच मौजूद रहते हैं।
‘आश्वासन मिला, लेकिन कार्रवाई का इंतजार खत्म नहीं हुआ’
ग्राम प्रधानों ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर वे लंबे समय से शासन और प्रशासन के साथ वार्ता करने के साथ ही पत्राचार भी करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आए हैं। प्रधानों ने कहा कि अगस्त माह में मुख्यमंत्री की ओर से उनकी मांगों पर आश्वासन दिया गया था और अगस्त के अंत तक अधिकांश मांगों पर कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। इसके बावजूद निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी उनकी समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
प्रधानों का कहना था कि लगातार आश्वासन मिलने और कार्रवाई नहीं होने से पंचायत प्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी कारण प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों को धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
मानदेय से लेकर पंचायत निधि तक उठीं प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधानों ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने ग्राम प्रधानों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि किए जाने की मांग की। साथ ही वार्ड सदस्यों को बैठक भत्ता दिए जाने और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय के लिए अलग से फंड की व्यवस्था किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
प्रधानों ने कहा कि ग्राम पंचायतों को मिलने वाले राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग के अनुदान में पर्याप्त वृद्धि की जानी चाहिए, ताकि पंचायतें अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य करा सकें। उन्होंने 73वें संविधान संशोधन की मूल भावना के अनुरूप ग्राम पंचायतों को 29 विभागों का हस्तांतरण किए जाने की भी मांग की।
इसके अलावा विधायक और सांसद निधि की तर्ज पर पंचायत निधि गठित करने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। ग्राम प्रधानों ने कहा कि यदि पंचायतों को पर्याप्त वित्तीय अधिकार और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तो ग्रामीण क्षेत्रों की विकास योजनाओं को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
10 लाख तक के कार्य पंचायतों को सौंपने की मांग
प्रधानों ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और मध्यम स्तर के निर्माण कार्यों को पूरा कराने के लिए ग्राम पंचायतों को अधिक अधिकार दिए जाने चाहिए। उन्होंने 10 लाख रुपये तक के निर्माण कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को कार्यदायी संस्था बनाए जाने की मांग की।
इसके साथ ही सभी ग्राम प्रधानों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने की मांग भी रखी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना के सर्वेक्षण में छूटे पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने के लिए ग्राम पंचायतों को अधिकार देने की मांग करते हुए प्रधानों ने कहा कि ऐसे पात्र परिवारों के नाम ग्राम पंचायत की आम बैठकों के माध्यम से सूची में शामिल किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
‘अधिकार और संसाधन मिले तो गांवों की तस्वीर बदल सकती है’
ग्राम प्रधानों ने कहा कि पंचायतों को केवल जिम्मेदारियां सौंपना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें उन जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पर्याप्त अधिकार, वित्तीय संसाधन और प्रशासनिक सहयोग भी उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। उनका कहना था कि यदि ग्राम पंचायतों को मजबूत किया जाता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
प्रधानों ने सरकार से मांग की कि पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मांगों पर अब भी ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
धरना-प्रदर्शन के उपरांत ग्राम प्रधानों ने मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से सरकार से उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की गई।
धरना-प्रदर्शन में सुनील जोशी, देवेंद्र सिंह नयाल, सुनील बाराकोटी, उमेश मेहरा, दीपक सिंह, प्रीति पंत, सुरेश भट्ट, भूपाल बोरा, इन्दर सिंह मनराल, विनोद जोशी, देवेन्द्र मेहरा, चंद्रिका तिवारी, नंदन सिंह फर्त्याल, नवीन भट्ट, बची बोरा, टीका सिंह, मदन सिंह बिष्ट, प्रिया भोज, पंकज रौतेला सहित जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान मौजूद रहे।









