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अल्मोड़ा: उत्तराखंड का उत्तर रक्षा गृह भवन बना सफेद हाथी

👉 नेक मंशा से 04.23 करोड़ खर्च, अब संचालन पर लगा ग्रहण
👉 डेढ़ साल पहले कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने किया था उद्घाटन
👉 अभी तक पदों का सृजन नहीं, व्यवस्था पर सवालिया निशान

राजेंद्र रावत/चन्दन नेगी

बेशक शासन की उत्तर रक्षा गृह के संचालन की मंशा नेक है, मगर जब करीब 04.23 करोड़ की लागत से निर्मित आलीशान उत्तर रक्षा गृह काफी समय तक सफेद हाथी बनकर खड़ा रहे, तो इससे विकास के दावों की हवा तो निकल ही रही है, साथ ही शासन की कार्यप्रणाली व लेटलतीफी पर सवालिया निशान भी लग रहे हैं। मामला सिर्फ भवन के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अनदेखी का आलम ये है कि बिना इंतजामों के ही भवन का उद्घाटन भी कर दिया गया। उद्घाटन के बाद डेढ़ साल से अधिक वक्त पार हो गया और अभी तक स्टाफ की तैनाती तो दूर, पदों का सृजन तक नहीं हो सका है। इन हालातों में भवन शोपीस सा बना है।

यहां बात हो रही है अल्मोड़ा नगर के निकटवर्ती बख गांव में करीब 04.23 करोड़ रुपये की लागत से बने प्रदेश के इकलौते उत्तर रक्षा गृह की। जहां किशोरी सदन में निवासरत बालिकाओं में से 18 साल की उम्र पार कर चुकी 18 से 23 साल की उम्र तक की युवतियों को इस गृह में रखने की योजना है। शासन के निर्णयानुसार अल्मोड़ा में उत्तर रक्षा गृह वर्ष 2021 में बनकर तैयार हो गया। इसके बाद प्रदेश की महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने 16 दिसंबर 2021 को इस भवन का उद्घाटन भी कर दिया। तब से इसके संचालन पर ब्रेक लगा है, जबकि उद्घाटन के बाद डेढ़ साल से अधिक का समय बीत चुका है। आज तक इसके संचालन के लिए पदों का सृजन तक नहीं हो सका है और वर्तमान तक सफेद हाथी साबित होकर यह भवन विकास के दावों की पोल खोल रहा है।
क्या कहते हैं विभागीय अधिकारी

अल्मोड़ा: उत्तर रक्षा गृह के संबंध में जिला प्रोबेशन अधिकारी राजीव नयन तिवारी से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि अल्मोड़ा में निर्मित उत्तर रक्षा गृह वर्तमान में पूरे राज्य का एकमात्र है। जहां 18 से 23 साल की निराश्रित युवतियों को रखा जाना है। उन्होंने कहा कि इस गृह के संचालन के लिए पृथक से स्टाफ की नियुक्ति होनी है और इसके लिए अभी शासन से पदों का सृजन नहीं हुआ है जबकि जिला स्तर से निदेशालय से पत्राचार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पद सृजन उपरांत की नियुक्ति व उत्तर रक्षा गृह का संचालन हो सकेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस गृह की क्षमता 50 है। किशोरी सदन से 18 वर्ष की आयु पार कर चुकी युवतियों को कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण के लिए अन्य जगहों भेजा गया है। वर्तमान में यहां 18 वर्ष से अधिक उम्र की कोई युवती बालिका सदन में नहीं है। वहीं निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पद सृजित नहीं होने से संचालन नहीं हो रहा है और पद सृजन का मामला शासन के विचाराधीन है। अधिकारियों के बयान से यह भी स्पष्ट नहीं है कि कब तक पदों का सृजन होगा और यदि देर—सबेर पद सृजित हो भी गए, तो उसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया में भी वक्त लग सकता है। फिलहाल इस गृह के जल्दी संचालन की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
ये है उत्तर रक्षा गृह का उद्देश्य

अल्मोड़ा: दरअसल, शिशु सदन में 01 दिन से 09 साल की उम्र तक के अनाथ व निराश्रित बच्चों को रखा जाता है,​ जिसमें बालक—बालिका दोनों शामिल हैं और 10 से 18 वर्ष की उम्र वाली निराश्रित व पीड़ित बालिकाओं को किशोरी सदन अल्मोड़ा में रखा जाता है जबकि इस उम्र के बालकों को देहरादून में आश्रय दिया जाता है। किशोरी गृह में रहते 18 साल की उम्र पार करने वाली युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने की योजना सरकार ने बनाई है और इस योजना से ये युवतियां लाभान्वित भी हो रही हैं। उन्हें कौशल विकास योजना के तहत उनकी रुचि के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण ​देहरादून व दिल्ली एवं अन्य जगहों पर दिए जाते हैं, ताकि वे रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें। शासन ने विचारा कि निराश्रित युवतियों के प्रशिक्षण व रोजगार मिलने तक 18 साल के बाद कुछ वक्त लगेगा। इस कारण सरकार ने इन्हें आश्रय देने के लिए उत्तर रक्षा गृह बनाने का निर्णय लिया, ताकि उनकी 18 से 23 साल की उम्र तक रहने की ​उचित व्यवस्था हो सके। भले ही यह योजना बेहतर हो, मगर काफी समय बीत जाने के बाद भी इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है।

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