सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखंड लोक वाहिनी (उ लो वा) ने 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाली महापंचायत और 12 फरवरी की प्रस्तावित राष्ट्रीय आम हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह आंदोलन प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय तथा लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
उ लो वा के वरिष्ठ नेता एडवोकेट जगत रौतेला ने कहा कि प्रदेश की जनता से आह्वान है कि वे बड़ी संख्या में महापंचायत में शामिल होकर इसे ऐतिहासिक रूप से सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार प्रायोजित शिकायतकर्ता की याचिका के आधार पर कराई जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह से छलावा है। उ लो वा पहले से ही यह मांग करता रहा है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी न्याय सुनिश्चित हो सके। वर्तमान परिस्थितियों में इस मांग की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है।
एडवोकेट रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी की नृशंस हत्या के बाद भी प्रदेश में कामकाजी युवतियों और महिलाओं पर हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते कुछ दिनों में ही मात्र पांच दिनों के भीतर देहरादून जिले में तीन युवतियों की हत्या की घटनाएं सामने आई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी है। उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाना केवल एक परिवार की लड़ाई नहीं, बल्कि यह उत्तराखंड के अस्तित्व, अस्मिता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
उ लो वा के महासचिव पूरन चन्द्र तिवारी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शुरुआत से ही सरकार वीआईपी बताए जा रहे लोगों को बचाने की कोशिश करती रही है। एक संदिग्ध और पक्षधरता वाले व्यक्ति की शिकायत के आधार पर सीबीआई जांच कराना, असल दोषियों को बचाने की एक और चाल है। उन्होंने कहा कि अंकिता के माता-पिता द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र के आधार पर जांच न कराना, सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
तिवारी ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में एसआईटी से लेकर सीबीआई जांच तक का रास्ता जनता के सड़क संघर्षों से तय हुआ है और आगे भी यदि न्याय मिलेगा तो वह केवल जन आंदोलनों के दबाव से ही संभव होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश को जानबूझकर साम्प्रदायिक विद्वेष की आग में झोंका जा रहा है। कोटद्वार की घटना इसका ताजा उदाहरण है, जहां सांप्रदायिक उन्माद के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों को ही पुलिस निशाना बना रही है। उन्होंने कोटद्वार के दीपक कुमार पर दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लेने की मांग की।
इसके साथ ही उन्होंने मसूरी में बुल्ले शाह की मजार तोड़े जाने तथा विकासनगर में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे सामाजिक सौहार्द और भाईचारे पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की शांति, एकता और समरसता को बनाए रखना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
बैठक में जंग बहादुर थापा, अजयमित्र सिंह बिष्ट, बिशन दत्त जोशी, दयाकृष्ण कांडपाल, रेवती बिष्ट, अजय मेहता सहित अनेक कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में महापंचायत और राष्ट्रीय आम हड़ताल को सफल बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का संकल्प लिया।

