HomeCovid-19उत्तराखंड, ख़बर जरा हट के : सामाजिक दूरी की है हिदायत, आत्मीय...

उत्तराखंड, ख़बर जरा हट के : सामाजिक दूरी की है हिदायत, आत्मीय दूरी नही ! सामने आ रहा कोरोना काल का सबसे घिनौना सच, अपने सगे संबंधियों को अस्पताल छोड़ लौट कर नही आ रहे कई परिजन

ADVERTISEMENTS

सीएनई रिपोर्टर
कोरोना संक्रमण के इस दौर में सरकार, प्रशासन व स्वास्थ्य महकमा लगातार सामाजिक दूरी की हिदायत दे रहा है, लेकिन देखने में आ रहा है कि सोशल डिस्टेंसिंग के बहाने ‘पारिवारिक दूरी’, ‘आत्मीय दूरी’, ‘भावात्मक दूरी’ जैसी जीचें भी सामने आने लगी हैं।

हालात ऐसे हो चुके हैं कि सामान्य मौतों से मरने वालों को भी कोई देखने नही आ रहा। अर्थि को उठाने के लिए कंधे भी नही मिल पा रहे। इससे भी शर्मनाक मामले यह आ रहे हैं कि अस्पतालों में लोग अपने परिवारजनों को छोड़ गायब ही हो जा रहे हैं। इसके बाद मरीज की देखभाल केवल अस्पताल का स्टॉफ ही कर रहा है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ऐसे ही मामले देखने में आये हैं।

65 साल के मैराथन मैन महिपाल सिंह
65 की उम्र में शुगर को दी मात!
देखें 'फिट दादाजी' की पूरी कहानी (आवाज़ के साथ)

Big News : आ गई रूसी दवा स्पूतनिक की पहली खेप, कंपनी का दावा है सिंगल डोज में हारेगा कोरोना

कोरोनाकाल में कई कोरोना संक्रमितों को अपने ही दर्द दे रहे हैं। वे उनको अस्पताल में भर्ती कराने के बाद दोबारा हाल जानने के लिए भी नहीं पहुंच रहे हैं। दून अस्पताल में ऐसे मामले सामने आए हैं। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपनों से भी ऐसी परिस्थिति में मुंह मोड़ रहे हैं। स्थिति ये है कि कुछ लोग अपने परिजनों को सरकारी अस्पतालों के इमरजेंसी वार्ड तक लाने के बाद छोड़कर चले जा रहे हैं।

बाद में अस्पताल द्वारा ऐसे लोगों का उपचार किया जा रहा है। मरीज के बताये मोबाइल नंबर पर संपर्क करने पर परिजनों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।

Big Breaking : उत्तराखंड में कहर बरपा रहा कोरोना, आज मिले 8 हजार 517 नए संक्रमित, 151 की गई जान

दून अस्पताल के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पिनौती रॉय नामक एक व्यक्ति, जो देहरादून में नौकरी करते थे। कुछ दिन पहले इनकी तबीयत खराब हुई तो परिजनों ने किसी की मदद से इन्हें दून अस्पताल में भर्ती करवाया। इसके बाद से किसी ने इनके बारे में जानने की कोशिश नहीं की। कुछ दिन बाद इनकी मौत हो गई। परिजनों को बताने के बावजूद शव लेने भी कोई नहीं आया।

वहीं एक अन्य मामले में अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आया मरीज संक्रमित निकला था। उसके परिजनों का पता नहीं चल पा रहा है। कुछ अन्य मरीज भी ऐसे हैं, जिनके परिजन नहीं आ पा रहे हैं। उनकी देखभाल अस्पताल कर्मचारियों द्वारा की जा रही है।

हृदय विदारक: पति की मौत के 4 घंटे बाद कोरोना ने छीनी पत्नी की जिंदगी, बेटी के सिर उठा मां—बाप का साया, गरुड़ निवासी परिवार पर कहर, घर में मचा कोहराम

वहीं एक अन्य मामले में एक लड्डू सरकार नाम का व्यक्ति भती है। इनका उपचार लावारिस में चल रहा है। जानकारी के अनुसार शुरू के समय में एक दो-दिन लड्डू के हालचाल जानने के लिए एक व्यक्ति आता था। जो अब ना आता है ना ही कर्मचारियों को इस संबंध में फोन किया।

यही सब उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों से सुनने को मिल रहा है। बहुत से अस्पतालों में मरीजों को देखने आना तो दूर परिजन फोन पर भी उसका हाल—चाल नही पूछ रहे हैं। कुल मिलाकर कोरोना काल ने मानवीय रिश्तों की सच्चाई भी दुनिया के सामने रखनी शुरू कर दी है।

BREAKING NEWS: बागेश्वर में कहर बरपा रहा कोरोना संक्रमण, मृतकों की संख्या पहुंची 30, आज कोरोना पॉजिटिव केसों की संख्या 166

Breaking Almora : कोरोना की गिरफ्त में अल्मोड़ा, 24 घंटे में 353 नए एक्टिव केस, नगर के विभिन्न मोहल्लों में 63 कोरोना पॉजिटिव, दो की मौत

उत्तराखंड, ख़बर जरा हट के : सामाजिक दूरी की है हिदायत, आत्मीय दूरी नही ! सामने आ रहा कोरोना काल का सबसे घिनौना सच, अपने सगे संबंधियों को अस्पताल छोड़ लौट कर नही आ रहे कई परिजन

तो क्या मोदी सरकार कर रही राष्ट्रीय लॉकडाउन की तैयारी, नेशनल कोविड—19 टॉस्क फोर्स प्रमुख व नीति आयोग के सदस्य पॉल ने दिये संकेत

सलाम SDRF ! ‘Corona’s Front Line Warriors’ की बड़ी भूमिका निभा रही जांबाजों की यह टीम, तमाम खतरों के बीच कर रहे कोरोना संक्रमितों के शवों का दाह संस्कार

ADVERTISEMENTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments