अल्मोड़ा। नगर व इर्द-गिर्द आए दिन पेयजल संकट की समस्या से चिंतित पूर्व मंत्री बिट्टू कर्नाटक ने मंगलवार को उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिशासी अभियन्ता के साथ कोसी पंपिंग पेयजल योजना की व्यवस्थाओं व इंटकवेल का जायजा लिया। उन्होंने इसमें मिली कई कमियों का उल्लेख करते हुए आगाह किया है कि जल्द यह कमियां दूर नहीं हुई, तो अल्मोड़ा की जनता भविष्य भीषण पेयजल संकट से जूझेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से अविलंब ठोस कार्रवाई करते हुए संकट के स्थाई समाधान हेतु जरूरी व्यवस्था व नये निर्माण कार्य करवाने की मांग की है।
श्री कर्नाटक ने उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिशासी अभियन्ता के.डी.भट्ट के साथ इंटकवैल का निरीक्षण किया गया और पाया कि बैराज से पानी मटेला में लगातार जा रहा है, किन्तु मटेला में स्टोरेज टैंक की क्षमता काफी कम है और वाटर ट्रीटमैंट प्लांट काफी पुराने हैं, जो विधिवत कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण पेयजलापूर्ति बाधित हो रही है। उन्होंने आगाह किया है कि अगर तत्काल कोई कार्यवाही नहीं होती है, तो अल्मोडा की जनता को पेयजल की भीषण समस्या से जूझना पडे़गा। उन्होंने कहा है कि वर्तमान में अल्मोडा को 14 एमएलडी पानी की जरूरत है, मगर सिर्फ 7 से 9 एमएलडी ही पानी मिल पा रहा है। वहीं पेयजल योजना की राइजिंग मेन भी बहुत पुरानी हो चुकी है। श्री कर्नाटक ने मांग की है कि अति आवश्यकता को देखते हुए तत्काल मटेला में पूर्ण क्षमता वाला बड़ा स्टोरेज टैंक, वाटर ट्रीटमैंट प्लांट का निर्माण किया जाए। साथ ही राइजिंग मेन में नई लाईनें डाली जाएं। ताकि अल्मोड़ा व इसके आसपास क्षेत्र में पर्याप्त व सुचारू पेयजल आपूर्ति हो सके। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि तत्काल अल्मोड़ा की पेयजल व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए उक्त बिंदुओं पर प्राथमिकता के आधार पर तत्काल कार्यवाही की जाए।
एनआरएचएम उत्तराखंड के पूर्व उपाध्यक्ष (कैबिनेट स्तर) ने यहां जारी बयान में कहा है कि विगत कई वर्षो से सांस्कृतिक नगर अल्मोडा में पेयजल समस्या को देखते हुए पूर्व में हरीश रावत सरकार द्वारा कोसी नदी में एक बैराज का निर्माण किया गया था। तदुपरान्त 11 करोड़ से अधिक लागत से कोसी नदी में इंटकवेल और कोसी से मटेला तक पाईप लाईन का निर्माण हुआ, मगर दुर्भाग्यपूर्ण है कि गर्मी शुरू होते ही अल्मोेडा व इसके इर्द-गिर्द भीषण पेयजल किल्लत प्रारम्भ हो जाती है। फलस्वरूप नौबत यहां तक आ जाती है कि लोगों को कई बार सप्ताह में सिर्फ एक बार ही पेयजलापूर्ति हो पाती है। कई बार पानी पीने योग्य नहीं होता है। उन्होंने कहा कि इसके पश्चात बरसात में भी पानी का भीषण संकट पैदा हो जाता है। इसकी वजह विभाग द्वारा सिल्ट आना बताया जाता है, मगर मूल दिक्कतों का निस्तारण नहीं हो रहा है। मौका मुआयना के दौरान श्री कर्नाटक के साथ इंटक जिलाध्यक्ष दीपक मेहता, हेम जोशी, देवेन्द्र प्रसाद कर्नाटक, ह्दयेश तिवारी, रोहित शैली, प्रकाश मेहता के अतिरिक्त अन्य विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
अल्मोड़ा: वास्तविक दिक्कतें दूर नहीं हुई, तो पानी का बड़ा संकट- बिट्टू, पूर्व मंत्री ने लिया योेजना का गहन निरीक्षण
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