HomeUttarakhandBageshwarसांस्कृतिक विरासत का शंखनाद: 29 अप्रैल को बागेश्वर पहुँचेगी गोल्ज्यू संदेश यात्रा

सांस्कृतिक विरासत का शंखनाद: 29 अप्रैल को बागेश्वर पहुँचेगी गोल्ज्यू संदेश यात्रा

तैयारियों को लेकर बैठक संपन्न

सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संजोने के उद्देश्य से अपनी धरोहर न्यास द्वारा आयोजित होने वाली भव्य ‘गोल्ज्यू संदेश यात्रा’ आगामी 29 अप्रैल को जनपद बागेश्वर की पावन धरा पर दस्तक देगी। इस महत्वपूर्ण यात्रा के भव्य स्वागत और सफल संचालन के लिए न्यास की जिला इकाई ने एक अहम बैठक कर रणनीतियों पर चर्चा की और यात्रा के आधिकारिक पोस्टर का विमोचन भी किया।

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3500 किलोमीटर का सफर और सांस्कृतिक संरक्षण

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष विजय भट्ट ने बताया कि न्यास द्वारा प्रत्येक तीन वर्ष में इस गोल्ज्यू संदेश यात्रा का आयोजन किया जाता है। उन्होंने यात्रा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य हमारी लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का संरक्षण करना है। इस बार यात्रा न्याय के देवता गोल्ज्यू की जन्मस्थली चंपावत से शुरू होकर लगभग 3500 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करेगी।”

बागेश्वर में यात्रा का रूट चार्ट

महामंत्री भुवन कांडपाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में यात्रा के जिले में प्रवेश और स्वागत कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा साझा की गई:

  • प्रवेश: यात्रा 29 अप्रैल की सुबह ग्वालदम के रास्ते बागेश्वर जनपद में प्रवेश करेगी।
  • पूजा-अर्चना: स्थानीय गोल्ज्यू मंदिरों में दर्शन के बाद यह यात्रा बागेश्वर शहर पहुंचेगी।
  • मुख्य पड़ाव: बागेश्वर के प्रसिद्ध बाजारी गोल्ज्यू मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी।
  • विश्राम: इसके पश्चात यात्रा कांडा स्थित भंडारी गोल्ज्यू मंदिर जाएगी और रात्रि विश्राम प्रसिद्ध भद्रकाली मंदिर में होगा।

बैठक में उपस्थित गणमान्य

तैयारियों को लेकर आयोजित इस बैठक में यात्रा के स्वागत, सुरक्षा और पूजा व्यवस्थाओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान उमेश साह, बृज किशोर वर्मा, सुनीता टम्टा, चंद्रा उपाध्याय, किरन पांडे, रीना पांडे और विमला कपकोटी सहित न्यास के कई सदस्य और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।


गोल्ज्यू संदेश यात्रा को लेकर बागेश्वर के भक्तों में भारी उत्साह है। न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले गोल्ज्यू संदेश यात्रा के माध्यम से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना जगाने का प्रयास किया जा रहा है।

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