टीबी की पहचान और उपचार की दी जानकारी
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और क्षय रोग के प्रति ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बुधवार को हवालबाग विकासखंड सभागार में जनप्रतिनिधियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों को क्षय रोग की पहचान, प्रमुख लक्षण, जांच, उपचार तथा इससे बचाव के प्रभावी उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही उनसे अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी के संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करने की अपील की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षेत्र पंचायत प्रमुख हिमानी कुंडू ने की। प्रशिक्षण के दौरान जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. प्रांशु डेनियल ने क्षय रोग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि टीबी की समय पर पहचान और नियमित उपचार बीमारी पर नियंत्रण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में आधुनिक जांच सुविधाओं के माध्यम से टीबी की पहचान की जा रही है। इसके लिए हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीन के साथ-साथ बलगम की जांच भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि लंबे समय तक खांसी रहना, लगातार बुखार आना, रात में पसीना आना, वजन कम होना, कमजोरी और भूख में कमी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर व्यक्ति को चिकित्सकीय जांच के लिए प्रेरित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समय रहते बीमारी की पहचान हो जाने पर नियमित एवं निर्धारित अवधि तक उपचार लेकर टीबी को नियंत्रित किया जा सकता है।
जिला क्षय रोग अधिकारी ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधि लोगों के बीच सीधे संपर्क में रहते हैं। ऐसे में वे टीबी के लक्षणों और उपचार को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने तथा संदिग्ध मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में टीबी के प्रति व्यापक जागरूकता अभियान चलाने और संभावित मरीजों को जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से टीबी का उपचार निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है। इसलिए आर्थिक कारणों से किसी भी व्यक्ति को जांच या उपचार से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसे लोगों की पहचान करने में सहयोग करें, जिनमें टीबी के संभावित लक्षण दिखाई दे रहे हों, ताकि उन्हें समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. पूनम ने भी क्षय रोग के लक्षणों, संक्रमण से बचाव तथा आवश्यक सावधानियों के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और टीबी से जुड़े लक्षणों को छिपाने के बजाय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर जोर दिया।
क्षेत्र पंचायत प्रमुख हिमानी कुंडू ने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और विभिन्न विभागों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को टीबी के लक्षणों, जांच और निशुल्क उपचार की जानकारी देने तथा जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन आनंद सिंह मेहता ने किया। समापन अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने तथा टीबी मुक्त समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने की शपथ ली।
इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी संतोष जेठी, सहायक खंड विकास अधिकारी रमेश सिंह कनवाल, सहायक विकास अधिकारी पंचायत तनुज गोस्वामी, प्रधान संगठन अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नयाल, महामंत्री विनोद जोशी, उपाध्यक्ष चन्द्रिका तिवारी, शिवराज नयाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं विकासखंड के कार्मिक उपस्थित रहे।









