HomeUttarakhandPithoragarhकुमाऊंनी भाषा का मानकीकरण होना जरुरीः भगत सिंह कोश्यारी

कुमाऊंनी भाषा का मानकीकरण होना जरुरीः भगत सिंह कोश्यारी

👉 ‘पहरु’ के सौजन्य से नगर पालिका सभागार पिथौरागढ़ में कुमाऊंनी संगोष्ठी
👉 मुख्य अतिथि भगतदा ने किया हीरा सिंह राणा विशेषांक का विमोचन

सीएनई रिपोर्टर, पिथौरागढ़ः पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने कहा है कि कुमाऊंनी समाज को अपनी मातृभाषा से जुड़े रहना चाहिए और आपसी बोलचाल में इसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके मानकीकरण पर भी जोर दिया। श्री कोश्यारी पिथौरागढ़ में कुमाऊंनी मासिक पत्रिका ‘पहरु’ के सौजन्य से आयोजित कुमाऊंनी भाषा पर आधारित संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

यह संगोष्ठी नगरपालिका सभागार पिथौरागढ़ में गत बुधवार को आयोजित की गई। जिसमें मुख्य अतिथि पूर्व मुख्यमंत्री/पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने पहरु के हीरा सिंह राणा विशेषांक का विमोचन किया। साहित्यकार प्रकाश पुनेठा को विक्टोरिया क्रास कैप्टन गजे घले पुरस्कार एवं डा. आनंदी जोशी को लेखन योजना पुरस्कार के तहत पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर श्री कोश्यारी ने कुमाऊंनी समाज से कुमाऊंनी भाषा को अपनी बोलचाल में अपनाने की अपील की। उन्होंने कुमाऊंनी भाषा के मानकीकरण करने पर भी जोर दिया।

इस मौके पर पहरू के संपादक डा. हयात सिंह रावत, डा. पीतांबर अवस्थी, डा. तारा सिंह, डा. दिनेश जोशी, डा. दीप चंद्र जोशी, गोविंद सिंह बिष्ट समेत तमाम लोगों ने अपनी बात रखी और अपनी मातृभाषा कुमाऊंनी के उत्थान के लिए पूरे कुमाऊंनी लोगों से आगे आने का आह्वान किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता रमा जोशी व संचालन दिनेश भट्ट ने किया। कार्यक्रम में राजेश मोहन उप्रेती, मदन सनयाल, मंजुला अवस्थी, प्रमिला बोहरा, प्रकाश रावत, जनार्दन उप्रेती, आशा सौन, डा. प्रमोद क्षत्रिय, मो. नाजिम अंसारी, विप्लव भट्ट, लाल सिंह रावत, दान सिंह बोरा, गिरीश चंद्र जोशी आदि तमाम लोग शामिल हुए।

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