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Almora News: मिलकर अपनी भाषा—संस्कृति को बचाएं भारत—नेपाल

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— अंतर्राष्ट्रीय सेेमिनार के दूसरे दिन पढ़े गए कई शोध पत्र
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय अल्मोड़ा एवं अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद (नेपाल अध्ययन केंद्र) नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में यहां चल रहे ‘इंडो—नेपाल रिलेशन्स एंड उत्तराखंड इंडिया: शेयर्ड हिस्ट्री एंड कल्चर’ विषयक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के दूसरे दिन मंगलवार को कई विषय विशेषज्ञों ने शोध पत्र पढ़े और भारत—नेपाल के ऐतिहासिक संबंधों व संस्कृति पर विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने भारत—नेपाल को मिलकर अपनी भाषा—संस्कृति को बचाने पर जोर दिया।

विवेकानंद पर्वतीय अनुसंधान संस्थान में संचालित हुए समानांतर सत्रों की अध्यक्षता आज यूएसए के प्रो. बरनार्डो ए माइकल ने की। जिसमें अपने शोध पत्र पढ़ते हुए डॉ. रितेश साह ने गोरखाराज के क्रूर प्रकाश डालते हुए व्याप्त अवधारणा को तोड़ने का प्रयास किया। प्रो. एमएम जोशी ने गोरखाकाल की चिट्ठी पर प्रकाश डालकर कुमाऊं के ब्राह्मण परिवार और गोरखाओं के सौहार्दपूर्ण संबंधों का उल्लेख किया जबकि डॉ. वासुदेव पांडे ने गोरखाकाल के अभिलेखों द्वारा भारत और नेपाल के बीच साझा संस्कृति को प्रस्तुत करने का प्रयास किया।

अन्य सत्र प्रो. माधव पी पोखरेल की अध्यक्षता में चला। जिसमें प्रो. विदुर चालीसे ने विभिन्न काल के अभिलेखों के माध्यम से व्याकरण पक्ष पर शोध प्रस्तुति दी। डॉ. शैलजा पोखरेल, डॉ. भोजराज गौतम ने भारत और नेपाल के सांस्कृतिक, भाषिक, ऐतिहासिक पक्ष पर शोधपत्र पढ़े। नेपाल के विद्वान प्रो. माधव पी पोखरेल ने कहा कि भारत में मैकाले की शिक्षा पद्धत्ति ने शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि अंग्रेज चले गए हैं और हम काले अंग्रेजों का उत्पादन कर रहे हैं। भारत और नेपाल को मिलकर अपनी भाषा-संस्कृति को मिलकर बचाने का प्रयास करना चाहिए।

एसएसजे में संचालित सत्रों में आयोजक सचिव प्रो. विद्याधर सिंह नेगी ने सेमिनार के सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत की। विभिन्न सत्रों में डॉ. अश्विनी अस्थाना ने ‘गलिम्सेस ऑफ डीप रूटेड हिस्टोरिकल एंड आर्किओलॉजिकल इंडो-नेपाल रिलेशनशिप, प्रो. अनिल कुमार जोशी ने कैपिबुलेशन ऑफ़ अल्मोड़ा इन 1815 एंड इट्स रामिफिकेशन्स, डॉ. संदीप बड़ौनी और डॉ. भगवान सिंह धामी ने कार्नोलॉजी एंड इवेंट्स ऑफ गोरखा इनरेशन ऑफ 1789-92 इन डोटी, कुमाऊं एंड गढ़वाल विषय पर शोध पत्र पढ़कर गोरखा शासन से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला। इन सत्रों में विदेशों से आए वासुदेवा बिष्ट, मोहन प्रसाद बिष्ट, डॉ. निहार नायक, डॉ. शैलजा पोखरेल, प्रो. संगीता थपलियाल, डॉ. हरक बहादुर शाही, नारायणी भट्ट आदि ने शोध पत्रों का वाचन किया। दोनों स्थानों पर आयोजित सत्रों में डॉ. चंद्र प्रकाश फुलोरिया, डॉ. लवी त्यागी, डॉ. राकेश साह, प्रो. एमएम जोशी, डॉ. भोजराज गौतम, डॉ. रमेश खत्री, डॉ. स्वेता सिंह, डॉ. रीतु चौधरी, राजेन्द्र सिंह रावल, प्रो. इला साह, प्रो. निर्मला पंत, डॉ. ललित जोशी, डॉ. गोकुल देउपा, दिनेश पटेल, डॉ. ललित जोशी मौजूद रहे।

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