काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक 14.9 किमी लंबा रोपवे, कैंची धाम भी जुड़ेगा
रानीबाग में पार्किंग और काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज तक 250 मीटर फुट ओवरब्रिज का प्रस्ताव

सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। नैनीताल और कैंची धाम जाने वाले यात्रियों व श्रद्धालुओं के लिए रोपवे परियोजना को लेकर बड़ी पहल हुई है। काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित 14.9 किलोमीटर लंबे रोपवे से कैंची धाम को भी जोड़ने का निर्णय लिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक रोपवे से सफर करीब 20 से 25 मिनट में पूरा हो सकेगा। रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक एक तरफ का प्रस्तावित किराया 375 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। परियोजना के मूर्त रूप लेने से नैनीताल जाने वाली पहाड़ी सड़क पर यातायात और पार्किंग के दबाव को कम करने तथा काठगोदाम रेलवे स्टेशन से आने वाले पर्यटकों और कैंची धाम के श्रद्धालुओं को वैकल्पिक परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रोपवे परियोजना को गति देने के लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा, नियोजन, सिंचाई एवं लघु सिंचाई डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम की अध्यक्षता में बुधवार को सर्किट हाउस, काठगोदाम में उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंची धाम को रोपवे से जोड़ने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई और परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की गई।
रेलवे स्टेशन से रोपवे स्टेशन तक पहुंचना भी होगा आसान
परियोजना में केवल रोपवे निर्माण ही नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी और पार्किंग की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया गया है। काठगोदाम रेलवे स्टेशन से रोडवेज परिसर तक करीब 250 मीटर लंबा फुट ओवरब्रिज बनाए जाने का प्रस्ताव है। इससे रेलवे स्टेशन पर उतरने वाले यात्रियों को रोपवे स्टेशन तक पहुंचने में सुविधा होगी।
काठगोदाम और आसपास के क्षेत्रों में पार्किंग की सुविधा विकसित करने की भी योजना है। इससे बाहर से निजी वाहनों से आने वाले पर्यटक अपने वाहन पार्क कर आगे की यात्रा रोपवे से कर सकेंगे।
पांच स्टेशन, 58 टावर और प्रति घंटे 1800 यात्री
बैठक में नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) के प्रोजेक्ट मैनेजर ने परियोजना से संबंधित प्रस्तावित तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसके अनुसार काठगोदाम-नैनीताल रोपवे परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 28 करोड़ रुपये बताई गई है।
प्रस्तावित रोपवे में काठगोदाम, रानीबाग, भुजियाघाट, ज्योलीकोट और हनुमानगढ़ी स्टेशन बनाए जाने हैं। करीब 14.9 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 58 टावर प्रस्तावित हैं। रोपवे की क्षमता करीब 1800 यात्रियों प्रति घंटे की बताई गई है।
रानीबाग से हनुमानगढ़ी तक एक तरफ की यात्रा के लिए 375 रुपये प्रति व्यक्ति किराया प्रस्तावित है। हालांकि अंतिम किराया और परियोजना की अन्य शर्तें आगे की प्रक्रिया एवं स्वीकृतियों के बाद स्पष्ट होंगी।
ज्योलीकोट बनेगा जंक्शन, यहीं से कैंची धाम के लिए आगे बढ़ेगा प्रस्ताव
परियोजना की एक महत्वपूर्ण कड़ी ज्योलीकोट को बनाया गया है। प्रमुख सचिव ने निर्देश दिए कि ज्योलीकोट रोपवे स्टेशन को जंक्शन स्टेशन के रूप में विकसित करने की योजना पर आगे काम किया जाए। इसी स्टेशन से कैंची धाम के लिए रोपवे कनेक्टिविटी प्रस्तावित है।
कैंची धाम देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। रोपवे से जुड़ने पर श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग के अतिरिक्त एक वैकल्पिक परिवहन माध्यम मिल सकता है। पर्यटन सीजन और विशेष अवसरों पर इस सुविधा का महत्व और बढ़ सकता है।
रानीबाग में 33 एकड़ भूमि पर पार्किंग की संभावना
बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने रानीबाग में प्रस्तावित रोपवे स्टेशन का स्थलीय निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में करीब 33 एकड़ भूमि खाली पड़ी है। इस क्षेत्र में रोपवे स्टेशन के साथ पार्किंग विकसित करने की संभावना पर भी काम किया जाएगा।
इससे नैनीताल की ओर जाने वाले पर्यटक अपने वाहन रानीबाग क्षेत्र में पार्क कर आगे की यात्रा रोपवे से कर सकेंगे। इससे नैनीताल शहर में निजी वाहनों की संख्या और पार्किंग की समस्या को कम करने में मदद मिलने की संभावना है।
पहाड़ की संवेदनशीलता को देखते हुए पहले होगा तकनीकी अध्ययन
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि हल्द्वानी से नैनीताल तक का पर्वतीय क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील है। इसलिए परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले तकनीकी अध्ययन पूरा किया जाना जरूरी है। अध्ययन के परिणामों के आधार पर ही निर्माण की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
प्रमुख सचिव ने वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही एनएचएलएमएल और संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने को कहा।
सड़क का दबाव घटा तो यात्रियों को मिलेगा सीधा फायदा
काठगोदाम-हल्द्वानी से नैनीताल जाने वाली सड़क पर पर्यटन सीजन, सप्ताहांत और छुट्टियों के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इसके कारण यात्रियों को कई बार जाम और पार्किंग की समस्या का सामना करना पड़ता है। रोपवे शुरू होने पर पर्यटकों के सामने सड़क मार्ग के साथ एक वैकल्पिक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा।
रोपवे के कारण यात्रा समय में कमी आने के साथ ही नैनीताल शहर में वाहनों की संख्या और पार्किंग दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव रोपवे के संचालन, यात्री क्षमता और पर्यटकों द्वारा इसके उपयोग पर निर्भर करेगा।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार को मिल सकता है बढ़ावा
रोपवे से काठगोदाम, रानीबाग, ज्योलीकोट और नैनीताल क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। बाहर से आने वाले यात्रियों की आवाजाही बढ़ने से होटल, होम-स्टे, रेस्टोरेंट, दुकान, टैक्सी, गाइड और अन्य पर्यटन आधारित कारोबारों को लाभ मिल सकता है।
निर्माण के दौरान तथा संचालन शुरू होने के बाद तकनीकी रखरखाव, सुरक्षा, टिकटिंग, पार्किंग, खानपान और पर्यटन सेवाओं में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
निजी वाहनों का दबाव घटा तो पर्यावरण को भी लाभ की संभावना
रोपवे का उपयोग यदि बड़ी संख्या में पर्यटक निजी वाहनों के विकल्प के रूप में करते हैं, तो सड़क पर वाहनों की संख्या, ईंधन की खपत और वाहन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है। साथ ही सड़क की तरह पूरे पहाड़ी मार्ग को चौड़ा करने की आवश्यकता नहीं होने के कारण भूमि उपयोग का स्वरूप भी अलग होगा। हालांकि इसके वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन तकनीकी एवं पर्यावरणीय अध्ययन के बाद ही किया जा सकेगा।
विभागों को तेजी से काम आगे बढ़ाने के निर्देश
बैठक में सचिव लोक निर्माण विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं आयुष विभाग डॉ. पंकज कुमार पांडेय तथा सचिव पर्यटन धीराज सिंह गर्ब्याल ने प्रतिभाग किया।
इसके अलावा जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, प्रभागीय वनाधिकारी आकाश गंगवार, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, एनएचएलएमएल के प्रोजेक्ट मैनेजर प्रशांत जैन, उपजिलाधिकारी मोनिका सहित लोक निर्माण विभाग, विद्युत, वन, सिंचाई और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों के मुताबिक परियोजना का तकनीकी अध्ययन, आवश्यक भूमि एवं वन संबंधी औपचारिकताएं तथा अन्य प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्माण की दिशा में आगे कदम बढ़ाया जाएगा।









