उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
रामगढ़ ब्लॉक के किसानों ने फसली बीमा राशि में भेदभाव का आरोप लगाते हुए स्टेट बैंक इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी दी है। जानें क्या है पूरा विवाद।
नैनीताल/रामगढ़: रामगढ़ ब्लॉक के किसानों ने फसली बीमा क्लेम के वितरण में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाते हुए बीमा कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि साधन सहकारी समिति के माध्यम से जिस स्टेट बैंक इंश्योरेंस कंपनी ने उनसे प्रीमियम वसूला, वह अब क्षतिपूर्ति के नाम पर उन्हें अन्य ब्लॉकों की तुलना में मात्र एक चौथाई धनराशि थमा रही है। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस ‘सौतेले व्यवहार’ को तुरंत बंद कर समान रूप से मुआवजा नहीं दिया गया, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
क्या है पूरा मामला?
रामगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले विभिन्न गांवों के किसानों ने साधन सहकारी समिति के जरिए अपनी फसलों का बीमा कराया था। इसके लिए स्टेट बैंक इंश्योरेंस कंपनी द्वारा प्रीमियम की राशि काटी गई थी। अब जब फसलों के नुकसान की भरपाई (क्लेम) का समय आया है, तो किसानों का आरोप है कि उन्हें बेहद कम धनराशि दी जा रही है।
ग्राम प्रधान कमोली, तरुण कांडपाल और सुयालबाड़ी के प्रधान दीपक सुयाल ने संयुक्त रूप से बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ पड़ोसी ब्लॉकों में किसानों को उनकी फसल के नुकसान का उचित मुआवजा मिल रहा है, वहीं रामगढ़ ब्लॉक के किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
किसानों की महापंचायत और चेतावनी
इस समस्या को लेकर प्रभावित किसानों की एक आम बैठक (महापंचायत) आहूत की गई। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बीमा कंपनी किसानों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।
- मुख्य मांग: रामगढ़ ब्लॉक के किसानों को भी अन्य ब्लॉकों की तर्ज पर ही पूर्ण और समान बीमा राशि का भुगतान किया जाए।
- आंदोलन का अल्टीमेटम: किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मुआवजे की राशि में सुधार नहीं किया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
- जिम्मेदारी का निर्धारण: ग्रामीणों ने साफ किया है कि किसी भी प्रकार के जनांदोलन या कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की संपूर्ण जिम्मेदारी बीमा कंपनी और संबंधित प्रशासन की होगी।
भेदभाव से उपजा आक्रोश
किसानों का तर्क है कि जब प्रीमियम की दरें और फसल की प्रकृति समान है, तो मुआवजे के वितरण में रामगढ़ ब्लॉक के साथ यह विसंगति क्यों? स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यह सीधे तौर पर किसानों के आर्थिक शोषण का मामला है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

