सावधान! ये हैं साइबर ठगी के वो 12 तरीके, जिनसे लुट गए 90 करोड़

0
सावधान! ये हैं साइबर ठगी के वो 12 तरीके, जिनसे लुट गए 90 करोड़
सावधान! ये हैं साइबर ठगी के वो 12 तरीके, जिनसे लुट गए 90 करोड़

2025 में उत्तराखंड में 10,300 मामले दर्ज

वॉइस क्लोनिंग और फर्जी चालान से रहें सावधान

CNE REPORTER, देहरादून: उत्तराखंड में साइबर अपराधी अब केवल ओटीपी (OTP) पूछने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और AI वॉइस क्लोनिंग जैसे मनोवैज्ञानिक हथियारों से आपकी जीवनभर की कमाई पर डाका डाल रहे हैं।


ADVERTISEMENTS

साल 2025 में प्रदेश के भीतर साइबर अपराध के आंकड़ों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जहाँ 10,300 से अधिक मामलों में जनता के 90 करोड़ रुपये से ज्यादा की चपत लगाई गई है। पुलिस के अनुसार, ठग अब सीधे पैसे नहीं मांगते, बल्कि डर, लालच और सरकारी कार्रवाई का खौफ दिखाकर पीड़ित से खुद ही पैसे ट्रांसफर करवा रहे हैं।


‘डिजिटल अरेस्ट’: 27 दिन तक बंधक और 1.20 करोड़ की चपत

हाल ही में अल्मोड़ा से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक महिला को सरकारी एजेंसी का फर्जी अधिकारी बनकर ठगों ने 27 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए डिजिटल अरेस्ट में रखा। मानसिक दबाव का आलम यह था कि महिला ने अलग-अलग किश्तों में 1.20 करोड़ रुपये ठगों के हवाले कर दिए। वहीं, नैनीताल में एक 80 वर्षीय बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर डराकर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उनसे 20 लाख रुपये लूट लिए गए।

स्मार्ट डिवाइस और मासूमों के जरिए सेंधमारी

अब साइबर ठगी केवल बड़ों तक सीमित नहीं है। रामनगर में एक मासूम बच्चा पिता के मोबाइल पर गेम खेल रहा था और देखते ही देखते पिता के खाते से 1 लाख रुपये गायब हो गए। यही नहीं, देहरादून में RTO चालान के नाम पर आए एक फर्जी लिंक ने शख्स की एफडी (FD) तक तुड़वा दी। ठगों ने फोन में मालवेयर ऐप इंस्टॉल कर पूरा कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था।

सावधान! इन 12 तरीकों से खाली हो सकता है आपका बैंक खाता

उत्तराखंड पुलिस ने उन 12 नए ट्रेंड्स की पहचान की है, जिनका इस्तेमाल अपराधी कर रहे हैं:

  1. डिजिटल अरेस्ट: वीडियो कॉल पर फर्जी पुलिस या सीबीआई अधिकारी बनना।
  2. AI वॉइस क्लोनिंग: आपके परिजन की आवाज निकालकर पैसे मांगना।
  3. इन्वेस्टमेंट स्कैम: शेयर बाजार और IPO में भारी मुनाफे का लालच।
  4. RTO/बिजली बिल लिंक: फर्जी बकाया बताकर फोन हैक करना।
  5. मुद्रा लोन फ्रॉड: 10 लाख से अधिक के फर्जी लोन ऑफर।
  6. वर्क फ्रॉम होम: नौकरी के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस लेना।
  7. सोशल मीडिया हैकिंग: रिश्तेदारों के नाम पर मदद मांगना।
  8. QR कोड स्कैम: पेमेंट रिसीव करने के बहाने पिन दर्ज करवाना।
  9. कस्टमर केयर फ्रॉड: गूगल पर फर्जी नंबरों के जरिए ठगी।
  10. ऑनलाइन शॉपिंग: भारी डिस्काउंट के नाम पर डेटा चोरी।
  11. लैंड साइबर फ्रॉड: ऑनलाइन दस्तावेजों से छेड़छाड़।
  12. फर्जी नोटिस: गिरफ्तारी का डर दिखाकर जबरन वसूली।

एक्सपर्ट की राय: “जागरूकता ही एकमात्र कवच”

साइबर क्राइम कंट्रोल एएसपी कुश मिश्रा के मुताबिक, साइबर अपराधी अब आपकी सोशल मीडिया एक्टिविटी पर नजर रखते हैं। वे आपके वीडियो से आपकी आवाज चुराकर (Voice Cloning) आपके करीबियों को फोन कर एक्सीडेंट या गिरफ्तारी का झांसा देते हैं। मिश्रा चेतावनी देते हैं कि कोई भी सरकारी एजेंसी व्हाट्सएप पर पूछताछ नहीं करती। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुद्रा लोन कभी भी 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होता, अतः बड़े दावों वाले कॉल पूरी तरह फर्जी हैं।

सुरक्षित रहने के गोल्डन टिप्स

  • किसी भी अनजान वीडियो कॉल को अटेंड न करें और न ही घबराएं।
  • परिजन की आवाज में कॉल आए तो पहले उनके असली नंबर पर फोन कर पुष्टि करें।
  • किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और न ही कोई ऐप डाउनलोड करें।
  • शिकायत दर्ज करें: अगर ठगी हो जाए, तो तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें।
ADVERTISEMENTS
कैंचीधाम की भीड़ ने किया बेहाल!
दिन भर सरकते रहे वाहन
▶ पूरी खबर YouTube पर देखें