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चम्पावत न्यूज: जिला प्रशासन द्वारा 268 आशाओं को निकालने के आदेश तत्काल निरस्त किया जाय : ऐक्टू

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हल्द्वानी। ऐक्टू से संबद्ध उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन द्वारा केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रीय आह्वान पर विरोध दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया और आशाओं के मुद्दों को उठाया गया। इस अवसर पर प्रदेश महामंत्री डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, “आशाओं को मातृ- शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए नियुक्त किया गया था लेकिन आशाओं पर फालतू काम का बोझ तो डाल दिया जाता है लेकिन उसका भुगतान नहीं किया जाता। कोरोना लॉकडाउन काल में आशाओं ने फ्रंट लाइन वर्कर्स की भूमिका का निर्वहन बखूबी अपनी जान को जोखिम में डालकर भी किया है लेकिन उसके लिए उनको कोई भी भत्ता नहीं दिया गया है, इसलिए आशाएँ लॉकडाउन भत्ते की हकदार हैं।

उन्होंने कहा कि इस सब पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना तो दूर रहा अपनी न्यायसंगत मांगों को उठाने वाली आशाओं के खिलाफ कार्यवाही करने की बात की जा रही है। चम्पावत जिला प्रशासन ने 268 आशाओं को निकालने के आदेश जारी किए हैं और उधमसिंहनगर जिले में भी ऐसी आशाओं की लिस्ट तैयार हो रही है जो अपने काम का मेहनताना मांग रही हैं। अन्य जिलों में भी आशाओं को निकालने की लिस्ट तैयार करने की बात सामने आ रही है। यह सरासर अन्याय है।

आशाओं को उकसाने वाली यह कार्यवाही बंद की जाय। आशाएँ सिर्फ अपने काम का दाम मांग रहे हैं लेकिन यदि उत्पीड़न की कार्यवाही की गई तो इसके खिलाफ पूरे प्रदेश की आशाएँ एकजुट होकर लड़ेंगी। अगर एक भी आशा को निकाला गया तो यूनियन उग्र आंदोलन को बाध्य होगी।” नगर अध्यक्ष रिंकी जोशी ने कहा कि, “आशाओं ने हमेशा ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित किये गए सारे कार्य स्वास्थ्य पूरी निष्ठा से किये हैं, यहां तक कि कोरोना महामारी और लॉकडाउन में भी सारे काम आशाएँ कर रही हैं लेकिन बिना मानदेय, बिना लॉकडाउन भत्ता, बिना कर्मचारी का दर्जा पाए आशाएँ कैसे और कब तक काम करेंगी?”

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उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन आज 3 जुलाई को अपनी माँगों के संबंध में विरोध दिवस कार्यक्रम आयोजित करते हुए धरना प्रदर्शन करते हुए उपजिलाधिकारी हल्द्वानी के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को नौ सूत्रीय ज्ञापन भेजा गया जिसमें मांग की गई कि, चम्पावत जिला प्रशासन ने आशाओं को निकालने के आदेश जारी किए हैं और उधमसिंहनगर जिले में भी ऐसी आशाओं की लिस्ट तैयार हो रही है, अन्य जिलों में भी यह बात सामने आ रही है। यह वाली कार्यवाही तत्काल बंद की जाय। ऐसे आदेश तत्काल वापस लिए जाय, आशाओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए 18000 रुपये न्यूनतम वेतन दिया जाय,आशाओं को कोरोना महामारी के समय लॉकडाउन भत्ता दस हजार रुपए मासिक की दर से भुगतान किया जाय,आशाओं को बिना किसी भत्ते के चलने वाले सर्विलांस ड्यूटी वाले फैसले को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाय,

आशाओं का मासिक प्रोत्साहन राशि व अन्य बकाया राशि का भुगतान तत्काल किया जाय, जब तक मासिक वेतन और कर्मचारी का दर्जा नहीं मिलता तब तक आशाओं को भी अन्य स्कीम वर्कर्स की तरह मासिक मानदेय फिक्स किया जाय, आशाओं को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन का प्रावधान किया जाय, सेवा(ड्यूटी) के समय दुर्घटना, हार्ट अटैक या बीमारी होने की स्थिति में आशाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए नियम बनाया जाय और न्यूनतम दस लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान किया जाय।

यूनियन द्वारा चेतावनी दी गई यदि मांगों पर कार्यवाही न की गई तो यूनियन अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार को बाध्य होगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। इस अवसर पर डॉ कैलाश पाण्डेय, रिंकी जोशी, हंसी बेलवाल, रेशमा, अनुराधा, भगवती बिष्ट, सलमा, आनंदी, मुन्नी, बबीता, गीता थापा, फरजाना, कमला आर्य, मीना केसरवानी, यास्मीन, दुर्गा शर्मा, निर्मला आर्य, राबिया, शशि पुरी, दीपा बहुगुणा, सुनीता अरोड़ा, सरोज,पुष्पलता, अनिता सक्सेना, प्रभा चौधरी, मीना शर्मा, सुनीता मेहरा, सुधा जायसवाल आदि आशा वर्कर मौजूद रहीं।

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