नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा से बातचीत
— रमेश जड़ौत की रिपोर्ट
नगर निगम अल्मोड़ा ने शहर की सूरत संवारने और सड़कों को ‘कचरा मुक्त’ बनाने के लिए एक बेहद दिलचस्प और व्यावहारिक मास्टरप्लान तैयार किया है। अब शहर के बाज़ारों में न गंदगी दिखेगी और न ही कूड़ेदानों के पास बंदरों का उत्पात।
दरअसल, शहर में ‘डस्टबिन वाली’ नई व्यवस्था लागू की जा रही है। नगर आयुक्त सीमा विश्वकर्मा ने बाज़ारों की पुरानी समस्या का सटीक समाधान निकाला है। अक्सर देखा जाता था कि सड़कों पर रखे बड़े कूड़ेदानों से बंदर और आवारा पशु कचरा बाहर फैला देते थे, जिससे सफाई के बावजूद गंदगी बनी रहती थी। अब इस ‘पारंपरिक’ सिस्टम को विदा किया जा रहा है।
किसे क्या मिलेगा?
नगर निगम हर दुकानदार को निजी डस्टबिन उपलब्ध कराएगा, ताकि कूड़ा सड़क के बजाय दुकान के अंदर सुरक्षित रहे:
सामान्य दुकानदार: इन्हें दो-दो डस्टबिन दिए जाएंगे (गीले और सूखे कूड़े के पृथक्करण के लिए)।
कपड़ा व्यापारी: इनकी जरूरत को देखते हुए इन्हें एक डस्टबिन प्रदान किया जाएगा।
कूड़ा उठाने का ‘परफेक्ट’ टाइम टेबल
अब व्यापारियों को कूड़ा फेंकने के लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं होगी। नगर निगम की गाड़ियाँ खुद चलकर आपकी दुकान के पास आएंगी। कूड़ा वाहन दिन में दो बार दस्तक देंगे:
सुबह की शिफ्ट: जब बाज़ार खुलते हैं, ताकि रात भर का जमा कचरा साफ हो जाए।
शाम की शिफ्ट: जब बाज़ार बंद होने का समय होता है, ताकि अगली सुबह शहर चमकता हुआ मिले।
बंदरों और आवारा पशुओं से मिलेगी मुक्ति
नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि पुराने सार्वजनिक डस्टबिन हटा लिए जाएंगे। इससे दो बड़े फायदे होंगे। पहला सड़कों पर कूड़ा नहीं बिखरेगा। दूसरा बाज़ारों में कूड़े के लालच में आने वाले बंदरों और पशुओं की संख्या में कमी आएगी, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों को परेशानी नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि समस्त व्यापारियों को अब निर्धारित डस्टबिन का ही उपयोग करना होगा। यह कदम न केवल शहर को स्वच्छ बनाएगा, बल्कि व्यापारिक क्षेत्रों को अधिक सुंदर और व्यवस्थित भी करेगा। कुल मिलाकर अब शहर के बाज़ारों में डस्टबिन सिर्फ एक डिब्बा नहीं, बल्कि स्वच्छता की पहचान बनेंगे।



