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बर्बाद हो गई गेहूं की फसल, सूखे से हालात, मायूस किसानों ने सरकार से की मुआवजे की दरकार

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सीएनई रिपोर्टर, सुयालबाड़ी
समय पर बारिश नही होने, वन्य जीवों द्वारा निरंतर पहुंचाये जा रहे नुकसान व कई अन्य प्राकृतिक कारणों से इस बार गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। जिससे काश्तकारों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में खेत बंजर दिखाई दे रहे हैं। प्रभावित काश्तकारों का कहना है कि फसल चौपट होने से वह भुखमरी की कगार पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने सरकार से मुआवजा देने की मांग की है। ग्राम सरना के राजू तिवारी व अन्य ग्रामीणों ने बताया कि इस बार गेहूं की फसल की पैदावार ही नही हो पायी है और उनके खेत बंजर पड़े हैं। इधर सरना, रैंगल, सैंज, ढटलगांव, सिरसा के तमाम ग्रामीणों ने भी गेहूं की फसल नही होने पर मुआवजा देने की मांग की है, जिससे वह अपने परिवार का भरण—पोषण कर सकें। किसानों का कहना है कि सरकार किसान हित में बड़े—बड़े वायदे तो करती है, लेकिन कोई भी सरकारी योजना धरातल पर उतरती नही दिखाई देती है। इस साल गेहूं की फसल बुरी तरह चौपट होने के बावजूद कोई भी सरकारी नुमाइंदा किसानों की सुध लेने नही पहुंचा है।

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Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
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