CNE REPORTER : शनिवार को नैनीताल जिले के धारी ब्लॉक अंतर्गत पूर्व माध्यमिक विद्यालय सल्याकोट में वन विभाग द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु वनाग्नि रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे गंभीर विषय रहे। वर्तमान समय में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जंगलों की आग एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है, जिसे देखते हुए स्थानीय स्तर पर बच्चों और ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए इस गोष्ठी की रूपरेखा तैयार की गई थी।



कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता और वन आरक्षी सुनील प्रसाद ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को वनाग्नि के विनाशकारी प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जंगलों में लगने वाली आग न केवल बहुमूल्य जैव विविधता को नष्ट करती है, बल्कि पर्यावरण संतुलन को बिगाड़कर सीधे तौर पर मानव जीवन को भी संकट में डालती है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि जंगल की आग रोकने के लिए छोटी-छोटी सावधानियां बेहद कारगर साबित हो सकती हैं, जैसे कि सूखे पत्तों या घास में बेवजह आग न लगाना और जंगल के रास्तों पर जलती हुई सामग्री न फेंकना।
मानव-वन्यजीव संघर्ष और सह-अस्तित्व की सीख
गोष्ठी का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव पर आधारित था। विशेषज्ञों ने समझाया कि जंगलों के सिमटते दायरे और बढ़ती मानवीय दखलंदाजी के कारण वन्यजीव आबादी रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रही है। इस समस्या के समाधान के रूप में बच्चों को वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने और सुरक्षा मानकों का पालन करने की सलाह दी गई। उन्हें बताया गया कि वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाना समाधान नहीं है, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण ही इस संघर्ष को कम करने का एकमात्र रास्ता है।
इस जागरूकता अभियान में विद्यालय के बच्चों के साथ-साथ सहायक अध्यापक और उपनल स्टाफ के गौरव वर्गली भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने वनों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। विद्यालय प्रबंधन ने वन विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से आने वाली पीढ़ी में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव पैदा होता है, जो भविष्य में एक सुरक्षित पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।


