ग्रामीणों को वनाग्नि के प्रति किया जागरूक
पैदल गश्त और ग्रामीणों से संवाद
CNE REPORTER, नैनीताल। वनाग्नि के बढ़ते खतरों और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से नैनीताल वन प्रभाग इन दिनों पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। इसी क्रम में शनिवार को वन विभाग की एक विशेष टीम द्वारा उत्तरी गौला रेंज के अंतर्गत महत्वपूर्ण निरीक्षण और जन-जागरूकता अभियान चलाया गया।



शनिवार को उत्तरी गौला रेंज की हरतोला प्रथम बीट में विभाग द्वारा कराए गए अग्रिम मृदा कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया गया। वन अधिकारियों ने धरातल पर हुए कार्यों की गुणवत्ता को परखा ताकि वर्षा काल और आगामी सीजन में मिट्टी के कटाव को रोका जा सके और जल संरक्षण की दिशा में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।

निरीक्षण कार्य संपन्न करने के पश्चात वन विभाग की टीम जंगल के दुर्गम रास्तों से पैदल गश्त करते हुए नैकाना गांव पहुंची। इस पैदल मार्च का मुख्य उद्देश्य वनों की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेना था। गांव पहुंचने पर टीम ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ एक बैठक की, जिसमें वनाग्नि (जंगल की आग) की विभीषिका पर चर्चा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि वनाग्नि न केवल वन्यजीवों और वनस्पतियों को नष्ट करती है, बल्कि यह स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बेहद घातक है।

वनाग्नि रोकथाम हेतु विशेष अपील
टीम ने ग्रामीणों से अपील की कि वे वनाग्नि काल के दौरान वन विभाग का पूर्ण सहयोग करें। लोगों को सख्त हिदायत दी गई कि वे जंगल के आसपास जलती हुई बीड़ी, सिगरेट या माचिस की तीली जैसी ज्वलनशील वस्तुएं न फेंकें। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि कोई भी व्यक्ति वनों में जानबूझकर आग लगाते हुए पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध विभाग द्वारा कठोर कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
नैकाना गांव में जन-जागरूकता अभियान चलाने के बाद टीम ने वहां से प्रस्थान किया और रामगढ़ पहुंची। इस पूरे अभियान और निरीक्षण के दौरान टीम द्वारा कुल 6 किलोमीटर की दूरी पैदल तय की गई। इस सक्रियता से विभाग ने संदेश दिया है कि वनों की सुरक्षा के लिए उनकी टीम हर समय फील्ड में डटी हुई है।
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण और गश्त दल का नेतृत्व वन क्षेत्राधिकारी विजय भट्ट ने किया। टीम में उनके साथ मुख्य रूप से वन दरोगा पद्मा दत्त पाण्डेय, वन आरक्षी रमेश बिष्ट, उपनल कार्मिक कुन्दन सिंह, पंकज रैक्वाल व मनोज कैड़ा और अग्नि श्रमिक राजू शामिल रहे।


