ढोल-नगाड़ों और चोलिया नृत्य के बीच निकली कदली वृक्ष की भव्य शोभायात्रा
विधायक प्रमोद नैनवाल व करन माहरा ने दी शुभकामनाएं
सीएनई रिपोर्टर, रानीखेत। धार्मिक एवं पर्यटन नगरी रानीखेत में मां नंदा-सुनंदा का ऐतिहासिक एवं आस्था से जुड़ा पर्व इस वर्ष भी पारंपरिक हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को मां नंदा-सुनंदा के स्वरूप कदली वृक्ष की ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आकर्षक चोलिया नृत्य के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पूरा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर नजर आया।
मां नंदा-सुनंदा का यह पावन पर्व रानीखेत में पिछले 137 वर्षों से श्रद्धा एवं पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता रहा है। इसी ऐतिहासिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।







कार्यक्रम के तहत सुबह नंदा देवी मंदिर परिसर से श्रद्धालु कदली वृक्ष स्थल माधव कुंज, राय स्टेट स्थित विमल भट्ट के निवास पहुंचे। यहां पुरोहित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां नंदा-सुनंदा के स्वरूप कदली वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। पूजा के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
माधव कुंज में महिलाओं ने मां नंदा-सुनंदा की स्तुति में सुंदर भजन प्रस्तुत किए। वहीं चोलिया कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर वातावरण को और अधिक भक्तिमय एवं उत्सवपूर्ण बना दिया। चोलिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद मां नंदा-सुनंदा के स्वरूप कदली वृक्ष को विधिवत सजाकर श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शोभायात्रा के रूप में नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नंदा देवी मंदिर परिसर लेकर पहुंचे। शोभायात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह दिखाई दिया। जगह-जगह लोगों ने श्रद्धा के साथ मां नंदा-सुनंदा का स्वागत किया।
कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक प्रमोद नैनवाल भी पहुंचे। उन्होंने मां नंदा-सुनंदा के पावन पर्व पर नगर एवं क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पर्वतीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व समाज को एकजुट करने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का कार्य करते हैं। युवा पीढ़ी को इन ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पर्वों के संरक्षण के लिए जागरूक करना बेहद आवश्यक है।
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने भी नंदा देवी महापर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह बचपन से ही रानीखेत के इस ऐतिहासिक पर्व से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि मां नंदा-सुनंदा के प्रति लोगों की आस्था सदियों से चली आ रही है। उनकी सदैव इच्छा रही है कि भविष्य में भी रानीखेत में इस पर्व को और अधिक भव्य स्वरूप दिया जाए तथा इसके आयोजन में वह अपना योगदान देते रहेंगे।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख हीरा रावत ने भी शोभायात्रा में सहभागिता की और नगरवासियों को नंदा-सुनंदा महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
16 से 23 सितंबर तक होंगे विभिन्न कार्यक्रम
नंदा देवी समिति के अध्यक्ष हरीश लाल साह ने बताया कि इस वर्ष महोत्सव के तहत 16, 17 और 18 सितंबर को मां नंदा-सुनंदा की मूर्ति का निर्माण किया जाएगा। 19 सितंबर को ब्रह्म मुहूर्त में मां नंदा-सुनंदा की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी, जिसके बाद दोपहर 12 बजे हवन का आयोजन होगा।
उन्होंने बताया कि महोत्सव को हर वर्ष की तरह इस बार भी आकर्षक और भव्य बनाने के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए प्राथमिक एवं जूनियर स्तर पर समूह लोकनृत्य प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके अलावा चित्रकला एवं कैरम प्रतियोगिता भी होगी।
स्थानीय बाल कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे, जिनका आयोजन रात आठ बजे से होगा। 20 सितंबर को शगुन आंखर एवं मंगल गीत प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। 21 सितंबर को उत्तराखंडी व्यंजन प्रतियोगिता होगी। 22 सितंबर को महिलाओं की झोड़ा प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें जूनियर एवं सीनियर दोनों वर्गों के प्रतिभागी हिस्सा लेंगे।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण 23 सितंबर, बुधवार को होगा। इस दिन मां नंदा-सुनंदा की विशाल विदाई शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके साथ ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन का समापन होगा।
बड़ी संख्या में गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में छावनी परिषद के एकल सदस्य मोहन नेगी, अगस्त लाल साह, रंगकर्मी विमल सती, संदीप गोयल, दीप पांडेय, धन सिंह रावत, अनिल वर्मा, किरण साह, विपिन चौधरी, ललित साह, पंकज साह, सौरभ अग्रवाल, कन्नू मास्टर, अमित रावत, मुकेश साह, जगदीश अग्रवाल, प्रमोद कांडपाल, यतीश रौतेला, विनीत चौरसिया, मोहित साह, जगदीश बिष्ट, पंकज जोशी, गोपाल देव, पीयूष साह, जयंत रौतेला और विपिन पंत सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं नगरवासी मौजूद रहे।
रानीखेत में नंदा-सुनंदा महोत्सव के माध्यम से धार्मिक आस्था के साथ ही कुमाऊं की लोकसंस्कृति, लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक विरासत की झलक भी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विशाल विदाई शोभायात्रा को लेकर नगरवासियों में विशेष उत्साह बना हुआ है।



