व्यापक पशु व जन हानि, 324 मकानों को पहुंचा नुकसान
खतरे के करीब पहुंचा अलकनंदा का जल स्तर
उत्तराखंड। मानसून सीजन में बारिश के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पशु व जन हानि हुई है। विगत 51 दिनों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान 25 इंसानों की जान गई है। वहीं, सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 67 है। भारी बारिश के चलते 324 मकान आंशिक रूप से व तीन पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं। यही नहीं, प्रदेश के विभिन्न जनपदों में बड़ी संख्या में पशुहानि भी हुई है। इस बीच लगातार हो रही बारिश के चलते श्रीनगर गढ़वाल में अलकनंदा नदी का जल स्तर भी खतरे के करीब पहुंच गया है।
उत्तराखंड में मानसून इस बार शुरूआती दिनों से ही अपना असर दिखा रहा है। सर्वाधिक नुकसान उत्तरकाशी में हुआ है, जहां 10 लोगों की मौत हुई है और 8 अब भी लापता हैं। दूसरी ओर सड़क हादसों में सबसे ज्यादा जानें पिथौरागढ़ में गई। यहां 14 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
राज्य आपतकालीन परिचालन केंद्र के उप सचिव व ड्यूटी आफिसर सुनील कुमार सिंह के अनुसार चार धाम यात्रा में वर्तमान वर्ष शुरू होने से अब तक कुल 147 लोगों की मौत स्वास्थ्य संबंधी तथा 15 की अन्य कारणों से मौत हुई है। वहीं, प्राकृतिक आपदा में 5 मरे हैं तथा 01 अब भी लापता है।
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प्राकृतिक आपदा में कितनी मौतें !
प्राकृतिक आपदा में भी बहुत से लोगों को अपने जीवन से हाथ धोना पड़ा है। अल्मोड़ा में किसी की जान नहीं गई, बागेश्वर में 1 व्यक्ति घायल हुआ। चमोली में 4 की जान गई और 2 घायल हुए। चंपावत में 1 व्यक्ति की मौत हुई। देहरादून में 3 की मौत, 3 घालय। हरिद्वार में 1 की मौत। नैनीताल और पिथौरागढ़ में प्राकृतिक आपदाओं से मरने वाले या घायलों की संख्या शून्य है। पौड़ी में 2 घायल हुए हैं। रूद्रप्रयाग में 3 की मौत 8 घायल। टिहरी में 2 तथा यूएस नगर में 1 की मौत हुई। उत्तरकाशी में 10 की मौत, 8 घायल व 2 लापता हैं।
सड़क दुर्घटना में हुई मौतों का आंकड़ा
सड़क हादसों में अल्मोड़ा में 2, चमोली 4, चंपावत 2, देहरादून 10, हरिद्वार 1, नैनीताल 7, पौड़ी 5, पिथौरागढ़ 14, रुद्रप्रयाग 10, टिहरी 7 व उत्तरकाशी में 5 लोगों की जान गई है। बागेश्वर व यूएस नगर में क्रमश: 4 व 18 घायल हुए हैं। इन दो जिलों में सड़क हादसों में हुई मौतें शून्य दिखाई गई हैं।
नदियों का जलस्तर
मंगलवार प्रात: 8 बजे अलकनंदा का जल स्तर 624.50 मी.मं पहुंच चुका था, जबकि खतरे का निशान 627 मी. है। भागीरथी का जल स्तर भी खतरे के निशाल के काफी करीब है। मंदाकिनी नदी भी उफान पर है। इसका जल स्तर 623.10 नापा गया है। वहीं, अन्य कई जनपदों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने की सूचना है।
मानसून की वर्तमान स्थिति
उत्तराखंड में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। बीती रविवार रात से कई स्थानों पर लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बारिश ने तबाही मचाई है। राजधानी देहरादून में 24 घंटे के भीतर 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जबकि कुमाऊं के बनबसा क्षेत्र में रिकॉर्ड 200 मिमी तक वर्षा दर्ज की गई है।
बारिश के चलते रुद्रप्रयाग, टिहरी और पौड़ी जिलों में भारी भूस्खलन हुआ है। बदरीनाथ हाईवे पर खांकरा और सिरोबगड़ के बीच मलबा आने से यातायात नौ घंटे तक ठप रहा, जिससे करीब 10 हजार यात्री फंसे रह गए। हाईवे के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं। इसके अलावा कोटद्वार में दुगड्डा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी भारी मलबा और बोल्डर गिरने से रास्ता बंद हो गया, जिसे छह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद ही खोला जा सका।
मौसम विभाग का ऑरेंज अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने आज भी प्रदेश के चार जिलों – उत्तरकाशी, देहरादून, रुद्रप्रयाग और टिहरी – के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन इलाकों में बहुत भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है। नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी गरज-चमक के साथ तेज बारिश और झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

