समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा
सीएनई रिपोर्टर, अल्मोड़ा। उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा के विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक तांबा उद्योग और इससे जुड़े शिल्पकारों के दिन अब बहुरने की उम्मीद जगी है। उत्तराखण्ड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद के उपाध्यक्ष (दर्जा राज्य मंत्री) गोविंद सिंह पिलख्वाल ने आज अल्मोड़ा के ऐतिहासिक ‘टम्टा मोहल्ला’ का सघन भ्रमण किया।

इस दौरान उन्होंने सदियों पुरानी ताम्र शिल्प कला को जीवित रखने वाले कॉपर शिल्पकारों एवं स्थानीय नागरिकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। दर्जा राज्य मंत्री ने शिल्पकारों की जमीनी समस्याओं को न सिर्फ बेहद गंभीरता से सुना, बल्कि उनके त्वरित और स्थायी समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करने का ठोस आश्वासन भी दिया।
बैठक के मुख्य बिंदु: इन गंभीर समस्याओं पर हुआ मंथन
ऐतिहासिक टम्टा मोहल्ले में आयोजित इस बैठक के दौरान शिल्पकारों ने अपने पारंपरिक व्यवसाय के सामने आ रही चुनौतियों को खुलकर साझा किया। चर्चा के मुख्य विषय निम्नलिखित रहे:
- कार्ड नवीनीकरण की पेचीदगियां: शिल्पकारों ने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक शिल्पकार पहचान पत्रों (आईडी कार्ड) के नवीनीकरण में उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसे सरल बनाया जाए।
- सरकारी योजनाओं का लाभ: कई पात्र शिल्पकारों तक अभी भी कल्याणकारी और वित्तीय योजनाओं की पहुंच नहीं हो पाई है।
- कच्चे माल (तांबे) की किल्लत: शिल्पकारों ने बाजार में कच्चे माल की बढ़ती कीमतों और इसकी सुलभ उपलब्धता न होने पर चिंता जताई। उन्होंने मांग की कि सरकार उन्हें किफायती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध कराए।
- विपणन (मार्केटिंग) सुविधाओं का अभाव: तैयार उत्पादों को उचित बाजार और सही मूल्य दिलाने के लिए एक मजबूत मार्केटिंग तंत्र या शोरूम की व्यवस्था की जाए।
दर्जा राज्य मंत्री गोविंद सिंह पिलख्वाल ने शिल्पकारों के एक-एक सुझाव को नोट किया और विश्वास दिलाया कि वे इन सभी जायज मांगों को संबंधित विभागों के उच्चाधिकारियों और सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर इनका जल्द निस्तारण करवाएंगे।
“ताम्र शिल्प हमारी सांस्कृतिक पहचान, संरक्षण सरकार की प्राथमिकता”
बैठक को संबोधित करते हुए उपाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल ने अल्मोड़ा के ताम्र शिल्प की सराहना करते हुए कहा:
“उत्तराखण्ड की ताम्र शिल्प कला सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि हमारे प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर और गौरवशाली इतिहास है। इस अनूठी कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार पूरी तरह कटिबद्ध है। शिल्पकारों के हितों की रक्षा करना, उनके हुनर को वैश्विक मंच प्रदान करना और उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
बैठक में ये लोग रहे मौजूद
पारंपरिक शिल्प को नई संजीवनी देने के उद्देश्य से आयोजित इस बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिल्पकारों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर स्थानीय पार्षद अमित साह ‘मोनू’, कृष्ण बहादुर सिंह, नीरज सांगा, सुंदर कुमार टम्टा, नरेंद्र कुमार तथा विक्की सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जागरूक युवा और ताम्र शिल्प से जुड़े कई वरिष्ठ शिल्पकार उपस्थित रहे। सभी ने दर्जा राज्य मंत्री के इस दौरे का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार के इस कदम से अल्मोड़ा के ऐतिहासिक तांबा उद्योग को एक नई दिशा मिलेगी।


