CNE की वन विभाग के अनुभाग अधिकारी (Section Officer) बृजेश विश्वकर्मा से बातचीत
सिरसा में गुलदार की बढ़ती मौजूदगी ने लोगों को चिंतित कर दिया है। CNE ने इस समस्या की तह तक जाने के लिए वन विभाग के अनुभाग अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा से बात की, ताकि इस मानव-वन्यजीव संघर्ष के कारण और समाधान को समझा जा सके। श्री विश्वकर्मा ने बताया कि कि वन क्षेत्राधिकार नितिन पंत के निर्देशन में गुलदार प्रभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त करी जा रही है और जनता को बचाव हेतु “क्या करें, क्या ना करें ” की जानकारी दी जा रही है ताकि गुलदार/वन्य जीवों से संघर्ष की स्थिति ना आये।
क्यों आबादी की ओर आ रहे हैं गुलदार?
अनुभाग अधिकारी बृजेश विश्वकर्मा के अनुसार, गुलदार का आबादी की ओर आना कोई असामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह मानव और वन्यजीवों के साथ-साथ रहने की एक स्थानीय प्रक्रिया है। इसका मुख्य कारण भोजन की तलाश है। उन्होंने बताया कि लोग अक्सर अपने घरों के आसपास बचा हुआ खाना और कूड़ा फेंक देते हैं। इससे गुलदार तो सीधे नहीं आते, लेकिन उन्हें खाने के लिए चूहे, कुत्ते, सुअर जैसे छोटे जानवर आते हैं। इन छोटे जानवरों का शिकार करने के लिए गुलदार और अन्य मांसाहारी वन्यजीव आबादी के करीब आते हैं, जिससे अचानक इंसानों से आमना-सामना होने पर वे आत्मरक्षा में हमला कर सकते हैं।
गुलदार से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय
✒️ वन विभाग के अधिकारी ने इस समस्या से निपटने के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिनका पालन कर गुलदार के हमलों से बचा जा सकता है:
- घरों के पास सफाई रखें: अपने घर के आसपास और गलियों में बचा हुआ खाना या कूड़ा न फेंकें। कूड़े का सही निस्तारण करें ताकि कुत्ते, चूहे और सुअर जैसे जानवर आकर्षित न हों।
- झाड़ियों को साफ रखें: घरों और रास्तों के आसपास उगी झाड़ियों को हटा दें, क्योंकि ये गुलदार के छिपने का आदर्श स्थान बन सकती हैं।
- पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करें: अपने गांव और घर के आसपास स्ट्रीट लाइट और अन्य रोशनी की व्यवस्था करें, खासकर रात के समय।
- शौचालय घर के अंदर बनवाएं: रात या सुबह के समय घर के बाहर अकेले न निकलें। शौचालय घर के अंदर ही होना चाहिए, जिसका प्रवेश द्वार घर के अंदर से हो।
- समूह में चलें: बच्चों को स्कूल या कहीं और अकेले न भेजें। हमेशा समूह में और बड़ों की देखरेख में चलें।
- जानवरों का शिकार न करें: जंगलों में शाकाहारी जानवरों (जैसे घूरड़, काकड़, खरगोश) का शिकार न करें। जब इन जानवरों की संख्या पर्याप्त होगी, तो गुलदार को जंगल में ही भोजन मिल जाएगा और वह आबादी की ओर नहीं आएगा।
- पानी का संरक्षण करें: जंगलों में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करें। इससे वन्यजीवों को जंगल में ही पर्याप्त पानी मिलेगा और वे बस्तियों की ओर नहीं आएंगे।
- आग से बचें: जंगलों में आग न लगाएं। वनाग्नि की घटना होने पर वन्यजीव अपनी जान बचाने के लिए आबादी की ओर भागते हैं।
- पालतू कुत्ता रखें: घर में कुत्ता पालें। गुलदार के आने पर वह आपको पहले ही सचेत कर देगा।
- विशेष सावधानी बरतें: शाम और सुबह के समय विशेष सावधानी बरतें, खासकर उन घरों में जो गांव से अलग बने हैं।
- अपने घरों के आस-पास झूठा खाना, कूड़ा आदि ना फेंके : जिस कारण गुलदार, बन्दर और सर्प आजकल हमारे घरों के आस-पास अक्सर दिखाई दे रहें हैं। झूठे खाने, कूड़े का उचित निस्तारण करें।
इन सरल उपायों को अपनाकर हम न सिर्फ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं, बल्कि मानव और वन्यजीवों के बीच एक सामंजस्यपूर्ण संबंध भी बना सकते हैं।

