गलत पार्किंग ने बिगाड़ी व्यवस्था
सिरफिरों की मनमर्जी, भुगत रही पूरी जनता
सीएनई रिपोर्टर, हल्द्वानी। अल्मोड़ा-हल्द्वानी हाईवे पर स्थित विश्वप्रसिद्ध कैंचीधाम में जाम की समस्या एक बार फिर लोगों के लिए भारी मुसीबत बन गई। स्वतंत्रता दिवस के अवकाश के मौके पर शनिवार को कैंचीधाम में अच्छी-खासी आवाजाही रही, लेकिन यात्रियों का कहना है कि जाम की भयावह स्थिति केवल वाहनों की संख्या बढ़ने से नहीं बनी, बल्कि कुछ वाहन चालकों की मनमानी, गलत साइड में की गई पार्किंग और यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी ने हालात बिगाड़ दिए।








जाम में फंसे लोगों का कहना था कि सड़क पर जगह की कमी के बीच भी कुछ वाहन चालकों ने अपनी सुविधा के लिए गाड़ियां गलत तरीके से सड़क पर खड़ी कर दीं। नतीजा यह हुआ कि एक ओर से आने वाले वाहन और दूसरी ओर से निकलने वाले वाहन आमने-सामने आ गए और देखते ही देखते सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कई लोग घंटों इस जाम में फंसे रहे।

गलत साइड गाड़ियां खड़ीं, सड़क हुई संकरी और थम गए पहिए
शनिवार को कैंचीधाम क्षेत्र में जो तस्वीर सामने आई, उसने यातायात व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए। यात्रियों के अनुसार, कुछ वाहन चालकों ने सड़क की दिशा और निर्धारित पार्किंग व्यवस्था की परवाह किए बिना गलत साइड में वाहन खड़े कर दिए।
पहाड़ी मार्ग पर पहले ही सड़क की चौड़ाई सीमित है। ऐसे में सड़क के किनारे बेतरतीब तरीके से खड़े वाहन यातायात के लिए बड़ी बाधा बन जाते हैं। यही हुआ। एक-दो वाहनों की मनमानी धीरे-धीरे बड़ी समस्या में बदल गई और जाम का दायरा बढ़ता चला गया।
लोगों का कहना था कि यदि गलत तरीके से खड़े वाहनों को तत्काल हटवा दिया जाता और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर कार्रवाई होती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
असली समस्या पर कब होगी कार्रवाई?
कैंचीधाम में जब भी जाम लगता है, अक्सर वाहनों और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को इसकी वजह माना जाता है। लेकिन शनिवार को जाम में फंसे यात्रियों का कहना था कि सिर्फ भीड़ को जिम्मेदार ठहराकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
लोगों का सवाल था कि यदि पहले से यह पता है कि स्वतंत्रता दिवस, सप्ताहांत और अन्य अवकाशों पर कैंचीधाम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचेंगे, तो यातायात व्यवस्था को उसी हिसाब से क्यों नहीं तैयार किया जाता?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—जब कोई वाहन चालक गलत साइड में वाहन पार्क करता है या वन-वे व्यवस्था तोड़ता है, तो उसे रोकने वाला कौन है?
मनमर्जी करने वाले कुछ चालक, भुगत रही पूरी जनता
जाम में फंसे यात्रियों का कहना था कि समस्या हर वाहन चालक की नहीं है। अधिकांश लोग नियमों का पालन करते हुए चलते हैं, लेकिन कुछ वाहन चालकों की मनमर्जी का खामियाजा सैकड़ों अन्य वाहन चालकों और यात्रियों को भुगतना पड़ता है।
किसी ने गलत जगह गाड़ी खड़ी कर दी, किसी ने वन-वे में घुसने की कोशिश की और किसी ने आगे निकलने की जल्दबाजी में व्यवस्था बिगाड़ दी—इन छोटी-छोटी मनमानी का सामूहिक परिणाम घंटों के जाम के रूप में सामने आता है।
यात्रियों का कहना था कि यातायात नियम इसलिए बनाए जाते हैं ताकि सभी की यात्रा सुगम और सुरक्षित हो सके। यदि कोई व्यक्ति अपनी सुविधा के लिए नियम तोड़ता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
जाम में फंसे लोग बोले—किसी की ट्रेन छूटती है, किसी का जरूरी काम
कैंचीधाम के जाम से सबसे अधिक परेशान स्थानीय पहाड़ी लोग हैं। उनका कहना है कि यहां लगने वाला जाम अब कभी-कभार होने वाली समस्या नहीं रह गया है। आए दिन यातायात बाधित होने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।
हल्द्वानी अथवा अन्य मैदानी क्षेत्रों की ओर जाने वाले लोगों को कई बार जाम के कारण समय का अतिरिक्त अनुमान लगाना पड़ता है। किसी को ट्रेन पकड़नी होती है तो किसी को अस्पताल, कार्यालय या अन्य जरूरी काम के लिए समय पर पहुंचना होता है।
यात्रियों की पीड़ा साफ थी—जिस सफर को कुछ घंटों में पूरा होना चाहिए, वह जाम के कारण अनिश्चित हो जाता है।
कैंचीधाम से हल्द्वानी पहुंचे कुछ यात्रियों ने बताया कि वे समय से अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निकले थे, लेकिन कैंची क्षेत्र में जाम ने पूरी यात्रा का हिसाब बिगाड़ दिया।
यात्रियों का कहना था कि सड़क पर यदि पर्याप्त संख्या में यातायात कर्मी मौजूद हों और गलत पार्किंग करने वाले वाहनों को तत्काल हटाया जाए तो व्यवस्था काफी हद तक सुधर सकती है। लेकिन जब वाहन चालक अपनी मर्जी से जहां चाहें वाहन खड़ा करने लगें और उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई न हो तो जाम लगना स्वाभाविक है।
वन-वे की व्यवस्था भी बनी मजाक?
यात्रियों ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार वाहन चालक वन-वे व्यवस्था का पालन करने के बजाय अपनी सुविधा के अनुसार आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं। आगे निकलने की होड़ में वाहन एक-दूसरे के सामने आ जाते हैं और यातायात पूरी तरह अवरुद्ध हो जाता है।
लोगों का कहना है कि वन-वे व्यवस्था सिर्फ सड़क पर लाइन खींच देने से प्रभावी नहीं होगी, बल्कि उसका पालन भी कड़ाई से कराना होगा।
दिल्ली-हरियाणा समेत बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों पर भी सवाल
कैंचीधाम से लौटे कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली, हरियाणा और अन्य मैदानी क्षेत्रों से आने वाले कुछ पर्यटक पहाड़ी मार्गों की यातायात व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लेते। गलत साइड वाहन खड़ा करना, निर्धारित दिशा के विपरीत आगे बढ़ना और जाम के बीच दूसरे वाहनों को ओवरटेक करने की कोशिश जैसी हरकतों से समस्या बढ़ती है।
हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि नियम तोड़ने वाले किसी भी वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह स्थानीय हो अथवा बाहरी।
जनता का सवाल—दावे बहुत हुए, अब कार्रवाई कब?
कैंचीधाम में यातायात व्यवस्था सुधारने को लेकर समय-समय पर व्यवस्थाएं बनाने और जाम से निजात दिलाने के दावे सामने आते रहे हैं। लेकिन शनिवार की स्थिति ने फिर सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर इन व्यवस्थाओं का असर जमीन पर कितना दिखाई दे रहा है?
जनता की मांग है कि अवकाश और सप्ताहांत के दिनों में कैंचीधाम में विशेष यातायात व्यवस्था लागू की जाए। गलत साइड वाहन पार्क करने वालों के खिलाफ तत्काल चालान और आवश्यक कार्रवाई हो। सड़क पर बेतरतीब खड़े वाहनों को तुरंत हटाया जाए और वन-वे नियम तोड़ने वालों पर भी सख्ती बरती जाए।
एक की मनमानी, सैकड़ों की परेशानी—अब सख्ती जरूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी एक वाहन चालक की मनमानी के कारण सैकड़ों लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है तो यह केवल यातायात की अव्यवस्था नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा गंभीर मामला है।
लोगों का सीधा कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को समझाने भर से काम नहीं चलेगा। गलत साइड पार्किंग और यातायात नियमों की अनदेखी पर ऐसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए कि अगली बार कोई भी वाहन चालक सड़क को अपनी निजी पार्किंग समझने की हिम्मत न करे।
कैंचीधाम में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए यातायात व्यवस्था को अब केवल भीड़ नियंत्रित करने तक सीमित नहीं रखा जा सकता। जरूरत इस बात की है कि नियम तोड़ने वाले कुछ लोगों की मनमानी पर लगाम लगे, ताकि उनकी गलती की सजा पूरी जनता को जाम में फंसकर न भुगतनी पड़े।


