पुजारी का घिनौना सच आया सामने
सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पांच महीने पहले हुए सनसनीखेज पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में वांछित दो शूटरों, जो आपस में सगे भाई थे, को गुरुवार तड़के पुलिस ने एक मुठभेड़ में मार गिराया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन शूटर भाइयों की मां मुस्लिम और पिता हिंदू थे, जिसके चलते उनके दो-दो उपनाम – तिवारी और खान – पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज थे। पुलिस ने दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

पुलिस अधीक्षक (SP) अंकुर अग्रवाल ने मुठभेड़ की जानकारी देते हुए बताया कि स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और स्थानीय पुलिस को इन शूटरों की गतिविधियों की सूचना मिली थी। जिसके आधार पर पिसावा इलाके में तड़के टीम चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान बाइक सवार दो संदिग्ध व्यक्तियों को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश गोली लगने से घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मारे गए बदमाशों की पहचान मिश्रिख थाने के अटवा गांव निवासी राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों सगे भाई थे और उनके दो अलग-अलग धर्मों से संबंध होने के कारण उनके पास दो-दो पहचानें थीं, जिनमें हिंदू और मुस्लिम दोनों नाम शामिल थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उनके पास दो आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं।

राघवेंद्र ने पुजारी को आपत्तिजनक हालत में देखा था, सुपारी देकर करवाई हत्या
इस हत्याकांड का सनसनीखेज कारण भी सामने आया है। पुलिस जांच में पता चला है कि पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी ने कारेदेव बाबा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर को एक बच्चे के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। अपनी पोल खुलने के डर से पुजारी ने इन दोनों शूटर भाइयों को चार लाख रुपये की सुपारी देकर राघवेंद्र की हत्या करवा दी थी। यह घटना इसी साल 8 मार्च को लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर तब हुई थी, जब बाइक सवार हमलावरों ने राघवेंद्र को गोलियों से छलनी कर दिया था। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। पुलिस पहले ही मुख्य साजिशकर्ता पुजारी शिवानंद बाबा समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
पत्रकार हत्याकांड: सिलसिलेवार घटनाक्रम
8 मार्च: लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की गोली मारकर हत्या।
घटना का कारण: पत्रकार द्वारा मंदिर के पुजारी शिवानंद बाबा को आपत्तिजनक स्थिति में देखना।
साजिशकर्ता: पुजारी शिवानंद बाबा उर्फ विकास राठौर, जिसने शूटरों को 4 लाख रुपये की सुपारी दी थी।

गिरफ्तारियां: पुलिस ने पुजारी शिवानंद बाबा, उसके सहयोगी निर्मल सिंह और असलम गाजी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
बदमाशों की पहचान: मारे गए शूटर राजू तिवारी उर्फ रिजवान खान और संजय तिवारी उर्फ अकील खान, सगे भाई, मां मुस्लिम पिता हिंदू।
इनाम: दोनों शूटरों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।
एनकाउंटर: 4 अगस्त को पिसावा इलाके में STF और पुलिस की कार्रवाई में दोनों शूटर ढेर।
उत्तर प्रदेश में एनकाउंटर का रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश में पिछले 8 वर्षों में पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इस दौरान 14,973 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 239 अपराधी मारे गए और 30,694 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। 9,467 अपराधियों के पैरों में गोली लगी। सबसे ज्यादा कार्रवाई मेरठ जोन में हुई है।
एनकाउंटर पर पत्रकार की पत्नी ने उठाए सवाल, CBI जांच की मांग दोहराई
वहीं, इस एनकाउंटर पर पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी की पत्नी रश्मि ने असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जो वाहवाही लूटी है, वह उनके दर्द और न्याय की मांग को दबाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरू से लेकर अंत तक सिर्फ खानापूर्ति की गई और उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है। रश्मि ने इस पूरे मामले की CBI जांच की मांग को दोहराते हुए कहा कि जब तक CBI जांच नहीं होगी, असली चेहरे सामने नहीं आएंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एनकाउंटर की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई और उनसे वादा किया गया था कि दोषियों का एनकाउंटर उसी जगह पर उनकी आंखों के सामने किया जाएगा, जहां उनके पति की हत्या हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

