HomeBreaking Newsयमन में भारतीय निमिषा प्रिया को मिलेगी सजा-ए-मौत

यमन में भारतीय निमिषा प्रिया को मिलेगी सजा-ए-मौत

बचाने की लगभग हर उम्मीद खत्म

जानिए, कौन है निमिषा ! क्या है यह पूरी कहानी….

Nimisha Priya : यमन में भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की जिंदगी बचाने की हर कोशिश जैसे अब नाकाम होते दिख रही है। केरल की नर्स निमिषा पर अपने ब‍िजनेस पार्टनर की हत्‍या का आरोप है। इस मामले में यमन में उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है।

दरअसल, आज सोमवार को सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में साफ ​किया कि वह निमिषा प्रिया को बचाने के लिए कुछ खास नहीं कर सकते हैं। लाइव लॉ ने सरकार के वकील एजी वेंकटरमणी के हवाले से कहा कि यमन की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार कुछ नहीं कर सकती। इसे कूटनीतिक रूप से मान्यता नहीं दी गई है।

ज्ञात रहे कि जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच के सामने इस मामले की सुनवाई हो रही थी। याचिकाकर्ता Save Nimisha Priya International Action Council Organization की तरफ से कोर्ट में बताया गया कि प्रिया का परिवार और समर्थक पीड़िता के परिवार के साथ ‘Blood Money’ पर बातचीत कर रहे हैं, ताकि शरीयत कानून के तहत उसे माफ किया जा सके। याचिकाकर्ता- संगठन ने आग्रह किया कि केंद्र सरकार डिप्लोमेटिक चैनल्स से बातचीत में मदद कर सकती है।

सरकार ने अपनी ओर से पूरी कोशिश करने पर जोर देते हुए यह भी कहा कि एक सीमा है जहां तक भारत सरकार जा सकती है। हम वहां पहुंच चुके हैं। यमन दुनिया के किसी भी अन्य हिस्से जैसा नहीं है। हम सार्वजनिक रूप से जाकर स्थिति को जटिल नहीं बनाना चाहते, हम निजी स्तर पर कोशिश कर रहे हैं। जस्टिस मेहता ने कहा कि मामला बेहद ही दुखद है।

8.5 करोड़ के मुआवजे का दिया था ऑफर

केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल आर.वेंकटरमणी ने सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखा। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ में सुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि मृतक के परिवार को 1 मिलियन डॉलर (लगभग 8.5 करोड़) रुपये के मुआवजे का ऑफर दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।

जानिए, निमिषा के बारे में पूरी डिटेल !

यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा का सामना कर रहीं केरल की नर्स निमिषा प्रिया सालों से सना के केंद्रीय कारागार में बंद हैं। यमन में इस्लामी शरिया क़ानून है इसलिए सजा ए मौत से बचना बहुत मुश्किल है। एक उम्मीद थी कि अगर महदी परिवार ब्लड मनी के बदले निमिषा को माफ़ करता है तो वो फांसी की सज़ा से वह बच सकती थी, लेकिन परिवार ने रुपये लेने से मना कर दिया है।

कौन हैं निमिषा प्रिया ?

मीडिया आलेखों के अनुसार, केरल के पलक्कड़ जिले की रहने वाली निमिषा प्रिया को 2017 में यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई है। निमिषा 2012 में नर्स के तौर पर यमन गई थीं। 2015 में निमिषा और तलाल ने मिलकर वहां एक क्लीनिक शुरू किया था।

तलाल ने धोखे से क्लीनिक में अपना नाम शेयरहोल्डर के तौर पर शामिल करके आधी आय हड़पने की कोशिश की और खुद को निमिषा के पति के तौर पर पेश किया। जब निमिषा ने इस बारे में पूछताछ की तो दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। तलाल ने उसके साथ मारपीट और यौन शोषण करना शुरू कर दिया।

निमिषा ने तलाल को दिया था नशीला इंजेक्शन

बताया जा रहा है कि उत्पीड़न से तंग आकर निमिषा ने जुलाई 2017 में तलाल को एक नशीला इंजेक्शन दे दिया जिससे उसकी मौत हो गई। कहा जा रहा है कि इसके बाद निमिषा ने अपनी कलीग हनान के साथ मिलकर महदी के शरीर के टुकड़े कर डाले और उसकी शरीर को पानी के टैंक में फेंक दिया। बता दें कि हनान यमनी नागरिक है। इस मामले में साल 2018 में निमिषा को मौत की सजा सुनाई गई थी, जबकि हनान को आजीवन कैद हुई थी। निमिषा का एक 8 साल का बेटा भी है। निमिषा साल 2018 से ही यमन के सना में काम कर रही है।

यमनी नागरिक तलाल अब्दो महदी, जिसके कत्ल का निमिषा पर आरोप है

हालांकि निमिषा का कहना है कि उसका इरादा उसे मारने का नहीं था और वह सिर्फ तलाल के पास मौजूद अपने पासपोर्ट को वापस लेना चाहती थी। निमिषा की मां प्रेमकुमार ने यमन जाकर अपनी बेटी को बचाने के लिए हर संभव कोशिश की लेकिन यमन की निचली अदालत ने निमिषा को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। वहीं यमन की सुप्रीम कोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।

केरल की निमिषा प्रिया पढ़ाई में काफी अच्छी थीं लेकिन घर की हालत ठीक नहीं थी जिस वजह से उनकी मां उनकी पढ़ाई का खर्चा नहीं उठा पा रही थीं। जैसे-तैसे उन्हें आधी-अधूरी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद स्थानीय चर्च उनकी पढ़ाई के लिए आगे आया और निमिषा के नर्सिंग डिप्लोमा कोर्स के लिए पैसे भी दिए। निमिषा ने नर्सिंग का कोर्स तो कर लिया लेकिन काफी ढूंढने के बाद भी उन्हें केरल में नौकरी नहीं मिली। हर जगह उन्हें निराशा हाथ लगी और कहा गया कि उन्होंने डिप्लोमा से पहले अपनी पढ़ाई पूरी नहीं की इसलिए नौकरी नहीं मिल सकती।

इस बीच निमिषा और उनकी मां को पता चला कि यमन में नर्सों के लिए अच्छे अवसर हैं और वहां उन्हें आसानी से नौकरी मिल सकती है। न चाहते हुए भी निमिषा की मां ने अपनी बेटी को यमन भेजने का फैसला किया और 19 साल की निमिषा अच्छे भविष्य का सपना लिए यमन चली गईं।

यमन जाते ही निमिषा को देश की राजधानी सना के एक सरकारी अस्पताल में नर्स की नौकरी मिल गई। तब यमन आज की तरह गृहयुद्ध की चपेट में नहीं था और वहां शांति थी। नौकरी मिलते ही निमिषा मां को बताती हैं कि उनके दिन अब बदलने वाले हैं क्योंकि उन्हें सरकारी अस्पताल में नौकरी मिल गई है।

टॉमी थॉमस और निमिषा प्रिया की शादी 2011 में हुई थी

टॉमी थॉमस से कोच्चि में की थी शादी

सबकुछ अच्छा चल रहा था और फिर तीन साल बाद निमिषा अपनी शादी के लिए कोच्चि आईं। निमिषा की शादी ऑटो चलाने वाले टॉमी थॉमस से हुई और शादी के बाद वो पति के साथ यमन लौट गईं। यमन में पहुंचकर निमिषा ने अपना काम जारी रखा और थॉमस ने भी नौकरी ढूंढ ली। उन्हें कोई अच्छी नौकरी तो नहीं मिली लेकिन एक इलेक्ट्रिशियन ने उन्हें अपना असिस्टेंट रख लिया।

फिर आया साल 2012 जब निमिषा ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के आने से घर में खुशियां तो आईं लेकिन दोनों वर्किंग पैरेंट्स के लिए अलग देश में बेटी की देखभाल करना मुश्किल हो गया। बेटी की देखरेख करना दोनों के लिए मुश्किल हो रहा था। थॉमस को सैलरी भी काफी कम मिलती थी, जिससे आर्थिक दिक्कतें भी बढ़ने लगी थी। ऐसे में थॉमस अपनी बच्ची की परवरिश के लिए 2014 में उसे लेकर वापस केरल लौट आए। इधर थॉमस बच्ची के साथ देश लौटे और उधर, यमन में गृहयुद्ध शुरू हो गया और भारतीयों को यमन के नए वीजा मिलने बंद हो गए।

गृहयुद्ध की शुरुआत में यमन के हालात ज्यादा खराब नहीं थे और बेटी से दूर निमिषा सोचने लगीं कि कैसे वो अपनी कमाई बढ़ाएं ताकि पति और बच्ची को आराम से साथ रख सकें। इसके लिए उन्होंने अपना खुद का क्लिनिक खोलने की सोची, लेकिन यमन के कानून के मुताबिक, अगर किसी विदेशी को यमन में अपना बिजनेस खोलना है तो उसे किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ पार्टनरशिप करनी होती है।

यमन नागरिक महदी की एंट्री

निमिषा यमन में किसी को ज्यादा जानती नहीं थीं और तभी उसे ख्याल आया महदी का, जिसकी पत्नी ने उसी सरकारी अस्पताल में अपना बच्चा जन्मा था जहां निमिषा काम करती थीं। महदी और उसके परिवार से निमिषा की जान-पहचान हो गई थी। महदी कपड़े की दुकान चलाकर अपना गुजारा करता था। निमिषा ने महदी के सामने साथ मिलकर क्लिनिक खोलने का प्रस्ताव रखा तो वो मान गया।

महदी ने चुरा ली थी शादी की तस्वीरें

क्लिनिक खोलने से पहले जनवरी 2015 में निमिषा अपनी बेटी के बाप्टिज्म यानी एक ईसाई प्रथा के लिए भारत आईं। इस बार उनके साथ महदी भी आया था। केरल में एक महीने रहने के दौरान निमिषा और उनके पति ने उधार आदि लेकर करीब 50 लाख रुपये जुटाए ताकि वो वापस जाकर क्लिनिक खोल सकें, लेकिन महदी ने इसी दौरान निमिषा के घर से उनकी शादी की तस्वीरें चुरा ली। उसके मन में पहले से ही निमिषा के लिए छल था और उनकी नजर उनके पैसों पर थी। उसने निमिषा की शादी की तस्वीरें चुरा लीं ताकि बाद में वो दावा कर सके कि निमिषा की उससे शादी हुई है और वही निमिषा का पति है।

इस साजिश से बेखबर निमिषा यमन लौटीं और महदी के साथ मिलकर क्लिनिक की शुरुआत की। निमिषा का क्लिनिक 14 बेड का था और उसका नाम रखा गया-Al Aman Medical Clinic. निमिषा ने इसी दौरान बेटी और पति को यमन बुलाने की कोशिशें भी शुरू कर दीं लेकिन तभी यमन में गृहयुद्ध तेज हो गया और भारत सरकार ने यमन की यात्रा पर रोक लगा दी।

भारत सरकार ने यमन में रह रहे अपने 4,600 नागरिकों को बाहर निकाला लेकिन निमिषा ने अपना नया क्लिनिक छोड़ भारत लौटने से इनकार कर दिया। उनपर दोस्तों और रिश्तेदारों का बहुत कर्जा था जिसे उन्होंने क्लिनिक खोलने के लिए लिया था। ऐसे में वो भारत नहीं लौट सकती थीं, लेकिन उन्हें पता नहीं था कि यमन में रहना उनकी जान पर बन आएगा।

​महदी ने निमिषा से बना लिए पत्नी जैसे संबंध

प्रिया का क्लिनिक अच्छा चलने लगा और इसी बीच महदी ने अपने असली रंग दिखाने शुरू किए। उसने सबको बता दिया कि निमिषा उसकी पत्नी है और क्लिनिक से होने वाली कमाई उसने निमिषा से छिनना शुरू कर दिया। आरोप है कि उसने निमिषा का शारीरिक शोषण भी शुरू कर दिया था।

निमिषा की मां प्रेमा ने याचिका में कही यह बात

निमिषा प्रिया की मां प्रेमा कुमारी की तरफ से दिल्ली हाई कोर्ट में दायर याचिका के मुताबिक, ‘निमिषा के क्लिनिक खोलने के कुछ समय बाद ही महदी ने क्लिनिक के कागजात में छेड़छाड़ कर उसे अपना बताना शुरू किया। वो सबसे कहता कि निमिषा मेरी पत्नी है और उसने क्लिनिक की कमाई भी रखनी शुरू कर दी। निमिषा ने आरोप लगाया कि महदी ने सालों तक उसे और उसके परिवार को प्रताड़ित किया। महदी ने उसका पासपोर्ट भी रख लिया था ताकि वो यमन से भाग न सके। वो ड्रग्स लेता था और निमिषा को टॉर्चर करता था। उसने कई बार बंदूक की नोंक पर निमिषा को धमकी भी दी। उसने क्लिनिक के सारे पैसे रख लिए और उसके गहने भी जबरदस्ती छीन लिए।’

याचिका में आगे कहा गया है कि शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर निमिषा ने सना की पुलिस में इसकी शिकायत की। लेकिन पुलिस ने महदी पर कोई कार्रवाई करने के बजाए निमिषा को ही अरेस्ट कर लिया और उन्हें छह दिनों तक जेल में रखा।

जेल से निकलने के बाद निमिषा पर महदी के अत्याचार कई गुना बढ़ गए। इसी बीच जुलाई 2017 में निमिषा की जान-पहचान अपनी क्लिनिक के पास वाली जेल की वार्डन से हो गई। वार्डन ने निमिषा की कहानी सुन उसे सुझाव दिया कि वो बेहोशी की दवा की मदद ले सकती है जिससे उसे अपना पासपोर्ट मिल जाए।

प्रताड़ना से परेशान निमिषा किसी भी तरह से अपना पासपोर्ट हासिल कर अपने देश वापस भाग जाना चाहती थीं और इसी कारण उन्होंने महदी को बेहोशी को दवाई दे दी, लेकिन महदी ड्रग्स लेता था जिससे उसपर बेहोशी का दवा का कोई असर नहीं हुआ। ऐसे में निमिषा ने उसे दूसरे दिन बेहोश करने की कोशिश की और इस बार बेहोशी की दवा का डोज थोड़ा ज्यादा रखा, लेकिन डोज महदी के लिए इतना ज्यादा हो गया कि वो हमेशा के लिए बेहोश हो गया, मिनटों में उसकी मौत हो गई।

कथित तौर पर मौत के बाद निमिषा ने महदी के शव के टुकड़े किए वाटर टैंक डाल दिया। इसके बाद वो वहां से फरार हो गई। महदी की मौत के लिए निमिषा को जिम्मेदार बताया गया और उसकी तलाश शुरू की गई। निमिषा एक महीने बाद सऊदी अरब की सीमा के नजदीक यमन से गिरफ्तार कर ली गईं और उन्हें जेल में बंद कर दिया गया।

साल 2020 में सुनाई गई मौत की सजा

साल 2020 में एक स्थानीय अदालत ने निमिषा को मौत की सजा सुनाई। इधर, भारत में निमिषा के परिवार ने स्थानीय अदालत के फैसले को यमन के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। याचिका 2023 में खारिज कर दी गई जिसके बाद जनवरी 2024 में यमन के हूती विद्रोहियों के शीर्ष राजनीतिक परिषद ने निमिषा के फांसी को मंजूरी दे दी।

इसके बाद निमिषा का मां अपनी बेटी को बचाने की कोशिशों में किसी तरह यमन पहुंचीं और उन्होंने किसी स्थानीय मध्यस्थ के जरिए महदी के परिवार से बातचीत शुरू की। निमिषा को बचाने का एक ही रास्ता था कि पीड़ित महदी के परिवार को ‘ब्लड मनी’ दी जाए। शरियत कानून में यह मान्यता है कि मृतक परिवार पैसे लेकर अपराधी को माफ कर सकता है।

निमिषा के परिवार के वकील का कहना है कि मध्यस्थता वार्ता के तहत दो बार 19 लाख रुपये की मांग की गई थी और भारतीय दूतावास के जरिए महदी पक्ष के वकील को 38 लाख रुपये भेजे जा चुके हैं, बावजूद इसके, निमिषा की मौत की सजा नहीं टाली जा सकी है। निमिषा के परिवार के वकील का कहना है कि अब तो कोई चमत्कार ही उसे बचा सकता है।

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