HomeBreaking Newsनिमिषा प्रिया को नहीं मिली माफी, तो क्या अब सजा—ए—मौत तय

निमिषा प्रिया को नहीं मिली माफी, तो क्या अब सजा—ए—मौत तय

ADVERTISEMENTS

मृतक के भाई का आरोप, भ्रामक ख़बरें दिखा रहा भारतीय मीडिया

CNE DESK। यमन के नागरिक तलाल अब्दो महदी की हत्या किए जाने की आरोपी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा टली जरूर है, लेकिन उसे माफी नहीं मिली। यानी, शरियत कानून के तहत उसे मौत की सजा जरूर मिलेगी।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार महदी के भाई अब्देल फत्तह महदी ने सोशल मीडिया पर इस मामले में बयान दिया है। उसने कहा कि वे अपने भाई की हत्या के मामले में कोई माफी या समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने साफ किया कि चाहे कोई भी कितना दबाव डाले या मिन्नतें करे, वे इस हत्यारिन को क्षमा नहीं करेंगे और ब्लड मनी (खून के बदले दी जाने वाली रकम) नहीं लेंगे।

🔴 BREAKING: खनन कारोबारी का खौफनाक गुस्सा! रेट विवाद में प्रतिद्वंद्वी का क्या हाल किया? (देखें वीडियो)
निमिषा प्रिया को नहीं मिली माफी
निमिषा प्रिया को नहीं मिली माफी

बता दें कि निमिषा को मौत की सजा 16 जुलाई को होनी थी, लेकिन इसे भारत के हस्तक्षेप के बाद टाल दिया गया है।

निमिषा प्रिया : इस भारतीय नर्स को नहीं मिला जीवन दान

दरअसल, मृतक के भाई ने हाल में BBC अरबी को एक इंटरव्यू दिया है। जिसमें उन्होंने हर बात विस्तार से कही है। उन्होंने कहा कि हम शरियत कानून के तहत ‘किसास’ यानी बदले की मांग करते हैं। निमिषा प्रिया को मौत की सजा मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक तरफ उनके भाई की हत्या हुई, तो दूसरी ओर सालों तक चले इस केस की लंबी कानूनी लड़ाई ने भी हमारे परिवार को काफी नुकसान पहुंचाया है। इसलिए वे मुआवजे की कोई रकम नहीं लेना चाहते।

भारतीय मीडिया फैला रही झूठ

महदी ने एक फेसबुक पोस्ट में मामले का खुलासा करते हुए कहा कि भारतीय मीडिया जानबूझकर ऐसे झूठे दावे फैला रहे हैं कि तलाल ने निमिषा प्रिया का पासपोर्ट जब्त कर लिया था या उसका यौन शोषण किया था।

यह बात पूरी तरह से गलत है। महदी ने दावा किया कि न तो खुद निमिषा प्रिया ने और न ही उसकी कानूनी टीम ने कभी अदालत में ऐसा कोई आरोप लगाया।

महदी ने भारतीय मीडिया पर यह आरोप लगाया कि वह दोषी को पीड़ित के रूप में प्रस्तुत कर रही है। उन्होंने लिखा, ‘इसका मकसद जनता को गुमराह करना और अपराधी के लिए झूठी सहानुभूति पैदा करना है।’

उन्होंने यह भी कहा कि निमिषा की पूरी कानूनी प्रक्रिया में भारतीय दूतावास की तरफ से नियुक्त वकील मौजूद थे और सभी कार्यवाही पारदर्शी रही।

भारत और यमन के धर्मगुरुओं ने की थी पहल

बता दें कि गत 15 जुलाई को भारत में कंथापुरम के ग्रैंड मुफ्ती एपी अबूबकर मुसलियार और यमन के चर्चित सूफी विद्वान शेख हबीब उमर बिन हाफिज इस मसले पर बातचीत की थी। इसमें यमन के सुप्रीम कोर्ट के एक जज और मृतक का भाई भी शामिल था।

यमन के शेख हबीब को बातचीत के लिए मुफ्ती मुसलियार ने मनाया था। ऐसा भी पहली बार हुआ, जब पीड़ित परिवार का कोई करीबी सदस्य बातचीत को तैयार हुआ हो। बातचीत शरिया कानून के तहत हुई, जो पीड़ित परिवार को दोषी को बिना किसी शर्त के या फिर ब्लड मनी के बदले में माफ करने का कानूनी अधिकार देता है।

यमन में भारतीय दूतावास नहीं, रियाद के जरिए बातचीत

भारत के पास यमन में स्थायी राजनयिक मिशन (दूतावास) नहीं है। 2015 में राजनीतिक अस्थिरता के कारण राजधानी सना में भारतीय दूतावास बंद कर दिया गया था और इसे जिबूती (अफ्रीका) में ट्रांसफर कर दिया गया था।

भारत सरकार यमन सरकार से मुख्य रूप से ‘नॉन-रेजिडेंट राजदूत’ के जरिए बात करती है। फिलहाल भारत सरकार रियाद में मौजूद राजदूत के जरिए बातचीत कर रही है।

यमन के गृह युद्ध ने बदल दी निमिषा की जिंदगी

यमन में गृह युद्ध की वजह से भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ शुरू किया था। यह ऑपरेशन अप्रैल-मई 2015 तक चला, जिसमें 4,600 भारतीयों और करीब एक हजार विदेशी नागरिकों को यमन से निकाला, लेकिन इनमें सिर्फ निमिषा ही भारत नहीं लौट पाईं।

आरोप है कि 2016 में महदी ने निमिषा के साथ शारीरिक उत्पीड़न करना शुरू कर दिया। उसने निमिषा के क्लिनिक का प्रॉफिट भी हड़प लिया। जब निमिषा ने इस बारे में सवाल किया तो दोनों के रिश्ते खराब हो गए। महदी निमिषा को यमन से बाहर नहीं जाने देना चाहता था, इसलिए उसने निमिषा का पासपोर्ट अपने पास रख लिया।

निमिषा ने पुलिस में महदी की शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने निमिषा को ही 6 दिनों की हिरासत में ले लिया, क्योंकि महदी ने एडिटेड फोटो दिखाकर निमिषा का पति होने का दावा किया।

काउंसिल ने सुनाई है मौत की सजा

यमन की सुप्रीम ज्यूडिशियल काउंसिल ने निमिषा को महदी की हत्या के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। निमिषा ने यमन की सुप्रीम कोर्ट में माफी की अपील दायर की, जिसे 2023 में खारिज कर दिया गया। राष्ट्रपति रशद ने भी 30 दिसंबर 2024 को सजा को मंजूरी दे दी।

कहानी को डिटेल में समझने के लिए पूर्व प्रकाशित ख़बर पढें —

ADVERTISEMENTS
Deepak Manral
Deepak Manralhttp://creativenewsexpress.com
तीन दशकों के करीब का कार्यानुभव रखने वाले दीपक मनराल पत्रकारिता जगत का एक सम्मानित नाम हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1996 में एक त्रैमासिक पत्रिका के सहयोगी संपादक के रूप में की थी। बीते 25 वर्षों में उन्होंने अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक आज, उत्तरांचल दीप और चारधाम टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में 'ब्यूरो प्रमुख' की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। वर्तमान में वे 'गंगोत्री अक्षर उजाला पोस्ट' के संपादक हैं और सीएनई (CNE) मीडिया हाउस के संस्थापक व स्वामी के रूप में डिजिटल मीडिया को नई दिशा दे रहे हैं। अपनी निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारिता के लिए पहचाने जाने वाले मनराल आज भी प्रतिदिन 'ग्राउंड ज़ीरो' से जुड़कर सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं।
RELATED ARTICLES

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments