जानिए, क्या था पूरा मामला ?
सीएनई रिपोर्टर, बागेश्वर। उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने बागेश्वर जनपद में संचालित पैथोलॉजी लैब्स पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं जिलाधिकारी के निर्देश पर गुरुवार को की गई इस छापेमारी में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि शहर की नामी लैब्स में बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण, फायर सेफ्टी और पॉल्यूशन कंट्रोल जैसे अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इन लैब्स में ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट्स पर किसी योग्य पैथोलॉजिस्ट के बजाय लैब टेक्नीशियन ही फर्जी हस्ताक्षर कर रहे थे।


अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अमित मिश्रा ने बताया कि गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर तीन प्रमुख लैब्स को तत्काल प्रभाव से सीज कर दिया गया है। कालिका पैथोलॉजी सेंटर पर सर्वाधिक 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि मां भगवती लैब और शिवम पैथोलॉजी सेंटर पर 2.5-2.5 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। इन तीनों केंद्रों पर क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के उल्लंघन और पंजीकरण दस्तावेजों में फर्जीवाड़े के चलते ताला जड़ दिया गया है। इसके अतिरिक्त, चंदन डायग्नोस्टिक लैब में भी खामियां मिलने पर उसे चेतावनी देते हुए 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
संयुक्त छापेमारी से मचा हड़कंप
इस कार्रवाई को अंजाम देने वाली जांच समिति में तहसीलदार रितु गोस्वामी, जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. चंद्र शेखर पाठक और डॉ. आकाश कुमार सहित राजस्व विभाग के अधिकारी शामिल रहे। छापेमारी के दौरान राजस्व निरीक्षक सुंदर परिहार और उप निरीक्षक कुंदन प्रसाद व हेमंत परिहार की मौजूदगी में दस्तावेजों को कब्जे में लिया गया। स्वास्थ्य विभाग की इस सख्त कार्रवाई से जनपद के अन्य निजी अस्पतालों और लैब संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।


